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दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर प्रदर्शनकारी लड़कियों को सोशल मीडिया पर दे रहे हैं रेप की धमकी

TCN News Desk TCN News Desk | 16h ago
दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर प्रदर्शनकारी लड़कियों को सोशल मीडिया पर दे रहे हैं रेप की धमकी

कई लड़कियों को दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर के फोन आ रहे हैं, जो उनसे पूछ रहे हैं कि वे प्रदर्शन में क्यों शामिल हुईं?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उनके सोशल मीडिया अकाउंट बंद करवाने के पीछे मोदी और शाह का हाथ है।

राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट पर पर कहा कि "पीएम मोदी और अमित शाह - आप जेन जी' को धमकाकर चुप नहीं करा सकते। पहले आपने उनकी हड्डियां तोड़ीं। अब आप FIR दर्ज कर रहे हैं और उनके सोशल मीडिया अकाउंट बंद करवा रहे हैं। "आप भारत का अतीत हैं। भारत के भविष्य के साथ अपने बर्ताव को लेकर सावधान रहें।"

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The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लेने के आश्वासन के बावजूद दिल्ली पुलिस गुरुवार दोपहर तक छात्रों को पूछताछ के लिए बुलाती रही। कानूनी मदद देने वाली कांग्रेस की लीगल सेल के सदस्य ऋषभ रंजन का हवाला देते हुए अखबार ने बताया कि,

पार्टी द्वारा शुरू की गई हेल्पलाइन पर लगभग 300 कॉल आए। इनमें से करीब 50 कॉल लड़कियों के थे, जिन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने के कारण रेप और जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाया।

रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा के कई छात्रों को बिना किसी पूर्व सूचना के पूछताछ के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन ले जाया गया। आरोप है कि कुछ मामलों में पुलिस की कार्रवाई तब भी जारी रही, जब सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को आदेश दिया था कि बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।

ऋषभ रंजन ने The Hindu को बताया कि,

"कई लड़कियों को दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर के फोन आ रहे हैं, जो उनसे पूछ रहे हैं कि वे प्रदर्शन में क्यों शामिल हुईं। उनके नाम एक लिस्ट में हैं, जिसे ये हैंडल फैला रहे हैं। उन्हें परेशान और धमकाया जा रहा है। इसके स्पष्ट सबूत ऑनलाइन मौजूद हैं। इस मामले में सरकार को गंभीर कार्रवाई करने की जरूरत है।"

विरोध प्रदर्शन के दौरान पीएम मोदी के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप में रुचिका सिंह नाम की 25 साल की छात्रा पर मामला दर्ज किया गया है। 23 जुलाई को की गई उनकी टिप्पणी के कारण उनके खिलाफ 'ज़ीरो एफआईआर' दर्ज की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सिंह के बयानों से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंची और इससे अशांति फैलने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हो सकता था। शिकायत के आधार पर, नोएडा के एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), 353(1) (सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान) और 356(1) (मानहानि) के तहत ज़ीरो एफआईआर दर्ज की।

उधर, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर उस वादे से मुकरने का आरोप लगाया जिसमें कहा गया था कि प्रदर्शन खत्म होने के बाद छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।


खड़गे ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा,

"दस दिन पहले, आपकी सरकार ने युवाओं को लाठियों और पैलेट गन से दबाया था। जब छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया, तो अब आप बदले की भावना से उनके खिलाफ FIR दर्ज कर रहे हैं और उन्हें जबरन हिरासत में ले रहे हैं।"

खड़गे ने आरोप लगाया कि,

"युवाओं ने इस शर्त पर आंदोलन वापस लिया था कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, और अब आपकी सरकारें अपनी ही बात से मुकर गई हैं। भाजपा और संघ से जुडे लोग और इंफ्लुएंशर युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करवा रहे हैं और लड़कियों को ऑनलाइन परेशान कर रहे हैं, रेप की धमकी दे रहे हैं।

लड़कियों की निजी जानकारी को बिना अनुमति के ऑनलाइन प्रकाशित या साझा करना, अक्सर उस व्यक्ति को परेशान करने, डराने-धमकाने या दुर्व्यवहार का शिकार बनाने के इरादे से किया जा रहा है। शाह पर निशाना साधते हुए खड़गे ने आगे कहा कि,

अहंकार इतना है कि गृह मंत्री अमित शाह ने जवाबदेही पर बयान देने के डर से संसद भवन में कदम तक नहीं रखा। अगर थोड़ी भी शर्म बची है, तो अमित शाह के इस्तीफे की मांग करें।"

कांग्रेस नेताओं की ये टिप्पणियां प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान के एक दिन बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार जरूरी हो गए हैं और जोर देकर कहा था कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के प्रति "कोई नरमी नहीं" बरती जाएगी। संसद द्वारा पेपर लीक विरोधी कानून में संशोधन के लिए एक विधेयक पारित करने के कुछ ही समय बाद, इंस्टाग्राम पर देर शाम जारी एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक न केवल छात्रों के लिए, बल्कि केंद्र और कई राज्यों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। “केंद्र और कई राज्य कई सालों से पेपर लीक की समस्या का सामना कर रहे हैं। इस समस्या ने अलग-अलग परीक्षाओं में शामिल होने वाले बच्चों के भविष्य पर खतरा पैदा कर दिया है। “इसलिए, इस समस्या से निपटने के लिए शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव करना ज़रूरी हो गया था,” प्रधानमंत्री ने कहा।