पुलिसिया दमन में घायल 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी छात्र इमरजेंसी में भर्ती, एक गंभीर
100 से ज्यादा की संख्या में घायल प्रदर्शनकारी छात्र आरएमएल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हैं।
दिल्ली के संसद मार्ग पर सोमवार को निकाले गए "संसद चलो" मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी छात्र घायल हो गए। 100 से ज्यादा की संख्या में घायल छात्र और प्रदर्शनकारी दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हैं। जिनमें से एक छात्र की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, घायल छात्रों और प्रदर्शनकारियों का इलाज कर रहे डाक्टरों का कहना है कि अधिकांश घायलों की सिर पर गंभीर चोट लगी हुई हैं। ज़्यादातर मरीजों के सिर पर टांके लगाने, टिटनेस के इंजेक्शन देने और घाव की पट्टी करने की ज़रूरत पड़ रही है।
इनमें सबसे गंभीर रूप से घायल उत्तम नगर के 24 वर्षीय रवि हैं, जो उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर के रहने वाले हैं। उन्हें गंभीर सिर की चोट के बाद आईसीयू में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, उनके दिमाग में ब्लीडिंग हुई है और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
रवि के भाई श्याम ने बताया कि,
पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद प्रदर्शनकारी पीछे हटने लगे। इसके बावजूद पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने रवि के सिर पर कई बार लाठी से वार किया, जिससे वह मौके पर ही गिर पड़े। श्याम ने कहा कि रवि ने एक सप्ताह पहले ही इस आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया था। उनका मानना था कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का समर्थन करना जरूरी है।
आरएमएल अस्पताल की नर्सिंग हेड सुपरिटेंडेंट के अनुसार, रवि के सिर पर कई गंभीर चोटें लगीं, जिससे उनके दिमाग में इंट्राक्रैनियल ब्लीडिंग शुरू हो गई। अस्पताल पहुंचने के समय वह किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे और उनके वाइटल पैरामीटर लगातार गिर रहे थे। सोमवार शाम करीब 5:30 बजे तक प्रदर्शन में घायल लगभग 100 लोगों का इलाज किया जा चुका था। इनमें करीब 90 प्रदर्शनकारी और 10 पुलिसकर्मी शामिल थे। चार प्रदर्शनकारियों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। घायल प्रदर्शनकारियों की संख्या इतनी अधिक थी कि कुछ समय बाद आरएमएल अस्पताल ने नए मरीजों को लेना बंद कर दिया और कई घायलों को लेडी हार्डिंग अस्पताल भेजा गया।
अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश घायलों के सिर और हाथ-पैरों में चोटें थीं। कई लोगों के सिर पर टांके लगाने पड़े, टिटनेस के इंजेक्शन दिए गए और घावों की ड्रेसिंग की गई। जिन मरीजों की स्थिति गंभीर थी, उन्हें CT स्कैन, एक्स-रे और अन्य जांचों के लिए भेजा गया। कुछ मरीजों को आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जबकि कुछ को तत्काल ऑर्थोपेडिक सर्जरी की जरूरत बताई गई। डॉक्टरों का कहना है कि घायलों में अधिकांश युवा हैं।
राजस्थान के 21 वर्षीय ऋषि राज सिंह, जिनके सिर पर टांके लगे हैं, ने कहा,
"जब आप सत्ता से लड़ते हैं तो ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार रहना पड़ता है।"
हरियाणा के 22 वर्षीय विशाल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में स्ट्रेचर पर दर्द से कराहते हुए एक्स-रे का इंतजार कर रहे थे। उनके पैर में गंभीर चोट लगी थी। उन्होंने बताया कि वह जंतर-मंतर पर मंच के पास मौजूद थे, तभी पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के लाठीचार्ज शुरू कर दिया।
दिल्ली के शादीपुर निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि उनके दोस्त अखलाक भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं और ICU में भर्ती हैं। उनका कहना है कि अशोक रोड के पास पुलिस ने अचानक लाठीचार्ज शुरू कर दिया। भगदड़ में अखलाक सड़क पर गिर गए और भीड़ के पैरों तले दब गए। करीब आधे घंटे बाद उन्हें बेहोशी की हालत में ढूंढ़कर ऑटो-रिक्शा से RML अस्पताल पहुंचाया गया।
उत्तराखंड के 35 वर्षीय चंचल बोरा अपनी ढाई साल की बेटी के भविष्य को लेकर आंदोलन में शामिल होने दिल्ली आए थे। उनकी पीठ पर गंभीर चोट आई है। उन्होंने कहा कि वह शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन बदले में उन्हें लाठीचार्ज झेलना पड़ा। चंचल ने बताया कि खुद घायल होने के बावजूद उन्होंने एक अन्य घायल प्रदर्शनकारी की मदद की, जिसके सिर से लगातार खून बह रहा था।
प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए। अस्पताल में भर्ती एक पुलिसकर्मी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि संसद मार्ग के पास ड्यूटी के दौरान उनके सिर पर पत्थर लगा था।
घायलों को अस्पताल पहुंचाने में वालिंटियर की भी अहम भूमिका रही। 22 वर्षीय अंशुल ने बताया कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर 30 से अधिक घायल प्रदर्शनकारियों को सड़क से उठाकर एम्बुलेंस और निजी वाहनों के जरिए अस्पताल पहुंचाया। उन्होंने कहा कि लोगों को सड़क पर घायल हालत में तड़पते देखना बेहद भयावह अनुभव था।