International

त्रासदी में भी ड्रामा, नेपाल में संवेदनहीनता के दलदल में फंस गई भारतीय मीडिया

Satish Verma Satish Verma | 1h ago · 5 min read
त्रासदी में भी ड्रामा, नेपाल में संवेदनहीनता के दलदल में फंस गई भारतीय मीडिया

इस कठिन वक्त में भी भला भारतीय न्यूज चैनल के रिपोर्टर, एंकर इतने संवेदनहीन कैसे हो सकते हैं।

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के कारण त्रासदी है, मातम है। दुख, चीख-पुकार और दलदल में फंसे हजारो लोगों को बचाने के जद्दोजहद में नेपाली सेना, बचाव और राहत में जुटे हुए वहां के आपदा विभाग के कर्मचारी दिन-रात एक किए हुए हैं। उनकी संवेदना, उनके संघर्ष और दुख को दिखाने के बजाए भारतीय मीडिया वहां भी अपनी टीआरपी के लिए ड्रामा कर रही है, रिपोर्टर और एंकर ओवरएक्टिंग कर रहे हैं। इस कठिन वक्त और त्रासदी में भी भला भारतीय न्यूज चैनल के रिपोर्टर, एंकर इतने संवेदनहीन कैसे हो सकते हैं?

अपने चैनल की TRP के लिए ऐसी घटिया और चापलूसी से भरी ओवरएक्टिंग करने के लिए और इस दुखद घटना को महज टीआरपी का तमाशा बनाने के लिए हद दर्जे का संवेदनहीन होना पड़ता है, और ऐसी ही संवेदनहीनता भारत से रिपोर्टिंग करने गए कई न्यूज चैनल के एंकर और रिपोर्टर नेपाल में कर रहे हैं।


इस ओवरएक्टिंग में सबसे आगे है सबसे ज्यादा चीखने वाले Republic चैनल के रिपोर्टर और एंकर। गजब है चैनल के मालिक अर्नब गोस्वामी का असर उनके मातहतों पर भी है। या फिर वो इसके लिए ट्रेंड किए जाते हैं और ऐसा करने का निर्देश उन्हें अपने एडिटर-इन-चीफ से ही मिलता है। Republic ही नहीं, News 24, News Nation समेत कई न्यूज चैनलों के रिपोर्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो न सिर्फ हंसी के पात्र बन रहे हैं, बल्कि इनके रिपोर्टिंग की आलोचना भी हो रही है। वैसे इन्हें आलोचना की कोई फिक्र नहीं, इन्हें तो मीम्स मैटरियल बनने में मजा आता है।


लेकिन हैरानी की बात है कि नेपाल सरकार ने इस चापलूस, ड्रामेबाज भारतीय मीडिया को वहां जाने की अनुमति आखिर क्यों दी? त्रासदी के वक्त भी वे वहां पहुंचे और रिपोर्टिंग करने के बजाय TRP के लिए ड्रामा कर रहे हैं। उन्हें तो बेशर्म कहना भी कम होगा।


नेपाल में ग्लेशियर से उत्पन्न विनाशकारी बाढ़ के बाद करीब 600 लोगों की मौत हो गई है और 2,500 से अधिक लोग लापता हैं। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि गर्म होते हिमालय में जलवायु संबंधी खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन इस कठिन परिस्थति में भारतीय मीडिया क्या दिखाने में व्यस्त है? नेपाल में लोगों ने आपदा आने से पहले भगवान शिव के दर्शन कर लिए थे। मतलब हर जगह धर्म का एंगल ठूंस दो।

यह पूछने के बजाय कि इस आपदा की वजह क्या थी, जलवायु परिवर्तन हिमालय को किस तरह अस्थिर कर रहा है और ऐसी आपदाएं लगातार अधिक खतरनाक क्यों होती जा रही हैं, वे इस त्रासदी को धार्मिक तमाशे में बदलने में व्यस्त हैं।

अब एनडीटीवी की ही एक रिपोर्टिंग देख लीजिए। एनडीटीवी के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल वहां बाढ़ के दौरान काठमांडू एयरपोर्ट पर फंसे लोगों से जबरन माइक पर क्या कहलवा रहे हैं।

एनडीटीवी के CEO राहुल कंवल को एक महिला वीडियो में कह रही हैं-

जब पानी तेजी से नीचे आया तो भगवान शिव का चेहरा दिखाई दिया। उन्होंने एक तस्वीर भी दिखाई और दावा किया कि पहाड़ी पर जमा मिट्टी और मलबा भगवान शिव के चेहरे जैसा दिखाई दे रहा था।

इस तरह भारतीय मीडिया नेपाल की फ्लैश फ्लड त्रासदी की रिपोर्टिंग कर रहा है। कहना न होगा कि नेपाल में भारतीय मीडिया संवेदनहीनता के दलदल में फंसी हुई है। मड फ्लड के साथ "मीडिया फ्लड" से नेपाल सरकार बेदम होने लगी है।

गोदी मीडिया के इन एडिटर-इन-चीफ, एंकर, सीईओ, रिपोर्टर को यह पता होना चाहिए नेपाल में उनके साहब नान बायलोजिकल महामानव का शासन नहीं है। कैमरा और माईक लेकर पहुँच गए और लगे रिपोर्टिंग करने। नेपाल की बालेन शाह सरकार ने आपदा कवरेज़ के लिए खास शर्त लगा लगा रखी है।

नेपाल सरकार ने हाल ही में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ की कवरेज करने वाले घरेलू और विदेशी मीडिया संस्थानों के लिए नए नियम लागू किए हैं। सूचना और संचार मंत्रालय के तहत सूचना प्रशासन और प्रेस शाखा विभाग के अनुसार, विदेशी पत्रकारों को अपने पासपोर्ट और वैध वीजा की एक कॉपी के साथ-साथ अपने मीडिया संस्थान से अपॉइंटमेंट लेटर या एग्रीमेंट जमा करना होगा।

सूचना विभाग के प्रवक्ता गोविन्द प्रसाद पांडे ने कहा,

विदेशी पत्रकारों के लिए भी लंबे समय से यही व्यवस्था लागू है, जो प्रिंट और ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं के तहत काम करते हैं। मौजूदा प्रावधान को ही जारी रखा गया है।

बुधवार तड़के भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद, अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कई विदेशी पत्रकार आपदा से बुरी तरह प्रभावित इलाकों में पहुंचने लगे हैं। विभाग ने विदेशी पत्रकारों से अपने मीडिया संस्थान से एक अनुरोध पत्र और संबंधित देश के विदेश मंत्रालय या नेपाल में स्थित उसके दूतावास/कांसुलर कार्यालय से जारी पत्र जमा करने को भी कहा है।

नोटिस में कहा गया है,

ऑनलाइन आवेदन मंजूर होने के बाद, आवेदक को प्रेस प्रतिनिधि प्रमाणपत्र और पत्रकार पहचान पत्र लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से विभाग में आना होगा और निर्धारित फ़ॉर्मेट में पासपोर्ट साइज़ की दो तस्वीरें साथ लानी होंगी।

पांडे ने यह भी स्पष्ट किया कि,

जो विदेशी पत्रकार पहले ही नेपाल पहुंच चुके हैं, उन्हें रिपोर्टिंग शुरू करने से पहले प्रेस पास लेना होगा। अगर कोई बिना प्रेस पास के रिपोर्टिंग करता है, तो इसे कानूनी नहीं माना जाएगा और यह माना जाएगा कि जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गई हैं।

कम्युनिकेशन मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि यह नोटिस देश में काम कर रहे विदेशी पत्रकारों पर नजर रखने के लिए जारी किया गया था।

Satish Verma

Satish Verma

सतीश वर्मा पेशे से पत्रकार हैं। हिंदी की मुख्यधारा की पत्रकारिता में इन्हें 20 साल से ज्यादा का अनुभव है।