नेपाल के कई मुर्दाघरों में अब शव रखने तक की भी जगह नहीं
मुर्दाघर में क्षमता कम होने के कारण शवों के लिए जगह की कमी हो रही है।
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ आने के कारण बहुत जान माल की हानि हुई है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, नेपाल में लगभग 538 लोगों के मरने की खबर आई है और मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ने की संभावना है। इस कारण नेपाल के मुर्दाघरों में शव रखने के लिए जगह की कमी हो रही है। अधिकारियों को शवों को रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ रही है।
नेपाल में बाढ़ के कारण स्थिति बदहाल होती जा रही है। मरने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। भोटेकोसी नदी के बाढ़ में बह गए लोगों के शव बहाव के कारण काफी दूर में मिल रहे है जिस कारण अधिकारियों को शवों को पहचानने में मुश्किल आ रही है। कान्तिपुर की खबर के अनुसार रसुवा और नुवाकोट से बहकर आए शव नुवाकोट के साथ-साथ चितवन, तनहूं, नवलपरासी और अन्य इलाकों में भी मिले हैं।
नुवाकोट, धाडिंग और नवलपरासी के मुर्दाघरों में शवों के लिए जगह कम पड़ने के कारण शवों को पड़ोसी जिलों में भेजा जा रहा है। चितवन में बरामद शवों की संख्या अस्पताल में शव रखने की क्षमता से ज्यादा हो रही है। अधिकारी अस्थायी सुविधा केंद्र भी बना रहे हैं। पोखरा के अस्पतालों से भी खबर आ रही है कि कई जिलों से शव आने के कारण उनके अस्पताल के मुर्दाघर भी भरते जा रही है जिससे अब स्थान की कमी होती जा रही है। चितवन में भी बरामद शवों के बढ़ने के कारण अस्पतालों में अधिकारियों को परेशानी हो रही है। अधिकारी भरतपुर में शवों को रखने के लिए अस्थायी केंद्र बना रहे हैं।

फोटो कैप्शन- तराई क्षेत्र में शवों के रखने के लिए अस्थायी मुर्दाघर बनाए गए हैं। फोटो साभार: Kantipur
बुधवार को नेपाल में अचानक बाढ़ आने के कारण सड़कों, पुलों, बस्तियों को भी बारी नुकसान पहुँचा है। बाढ़ के कारण शवों की संख्या अधिक होने के कारण अस्थायी मुर्दाघर बनाए जा रहे हैं। चितवन में अधिकारियों द्वारा भरतपुर में परित्यक्त इमारत को अस्थायी शवगृह में तब्दील किया गया है। शव रखने में आ रही कठिनाई के कारण अस्थायी शव गृह बनाए जा रहे हैं। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार रसुवा और नुवाकोट से बहे शव चितवन,तनाहुन, नवलपरासी, गोरखा और दूसरे जिलों तक मिले हैं जिससे कई इलाकों के मुर्दाघरों में शव रखने तक की जगह नहीं बची है।
चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश आर्यल के कहा कि जिले के अस्पतालों के मुर्दाघरों में एक समय में केवल 30 से 50 शव ही रखे जा सकते हैं। क्षमता से अधिक होने के कारण अधिकारियों ने ये निर्णय लिया है जिससे शवों की पहचान करने में सुविधा होगी। खबर के अनुसार चितवन के अस्थायी केंद्र में 250 शवों को रखा जा सकेगा।
इसके आतिरिक्त पोखरा ऑफ हेल्थ साइंसेज के सूचना अधिकारी सुशील आर्यल ने बताया कि शवों को 2 से 6 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर संग्रहित किया जा रहा है। ऐसा शवों को संरक्षित करने के लिए किया जा रहा है। शवों को सुरक्षित रखने के लिए ड्राइ आइस का भी प्रयोग किया जा रहा है।
कई शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है जिसके लिए अधिकारियों ने शव का पता लगाने और उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस शवों की तस्वीरें, उंगुलियों के निशान और DNA के नमूने ले रही है और पोस्टमार्टम भी कर रही है। अधिकारियों ने बताया जिन शवों की पहचान संभव है उनकी तस्वीरें जारी की जा रही है ताकि परिवार वालों को अपने परिजनों को पहचानने में आसानी हो।
नेपाल के अधिकारी लवारिश लाशों को सुरक्षित दफन करने के लिए स्थानीय सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक शव को एक टैग नंबर दिया जा रहा है तथा उनके दफन का विवरण भी दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक DNA नमूने परीक्षण के लिए काठमांडू भेजे जाएंगे। अधिकारियों द्वारा मृतकों की पहचान करने में परिवारों की मदद के लिए एक क्यूआर कोड प्रणाली भी शुरू की गई है। पुलिस की आशंका के मुताबिक विभिन्न जिलों से शव आने के कारण अज्ञात शवों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है।