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नेपाल ने विदेशी मदद के प्रस्ताव को ठुकराया, 2015 के भूकंप में भारत की मदद से बढ़ा था विवाद

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
नेपाल ने विदेशी मदद के प्रस्ताव को ठुकराया, 2015 के भूकंप में भारत की मदद से बढ़ा था विवाद

नेपाल की बालेन शाह सरकार ने बाढ़ राहत और बचाव में विदेशी मदद के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।

नेपाल की बालेन शाह सरकार ने बाढ़ राहत और बचाव में विदेशी मदद के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। 2015 में विनाशकारी भूकंप के दौरान भारत सरकार की मदद से नेपाल में कई राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया था। नेपाल के नागरिकों और राजनेताओं ने इसे देश की संप्रुभता पर खतरा बताया था।

The Kathmandu Post की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल सरकार ने विनाशकारी बाढ़ के बाद विदेशी बचाव दल भेजने के कई देशों के प्रस्तावों को ठुकरा दिया है। इस आपदा में कम से कम 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल सरकार का कहना है कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां खोज एवं बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं।


नेपाल-चीन सीमा के पास भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में बुधवार को आई अचानक बाढ़ के बाद बचावकर्मी कीचड़ और मलबे में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। ‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्रालय को कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपने बचावकर्मी भेजने के औपचारिक एवं अनौपचारिक प्रस्ताव मिले थे। हालांकि, सरकार ने अभियान का नेतृत्व नेपाली सुरक्षा एजेंसियों के हाथों में ही रखने का फैसला किया है।

विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने अखबार को बताया,

हमें चीन, भारत और अन्य देशों से भी इसी तरह के प्रस्ताव मिले थे, लेकिन हमें उन्हें अस्वीकार करना पड़ा।” रॉयटर्स के अनुसार, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नेपाल को बचाव अभियान के लिए दूसरे देशों की सहायता की आवश्यकता नहीं है।

बताया जा रहा है कि,

यह फैसला वर्ष 2015 के विनाशकारी भूकंप के अनुभव को ध्यान में रखकर लिया गया है। उस समय बड़ी संख्या में विदेशी बचाव दलों के पहुंचने से उनके बीच समन्वय और प्रबंधन में कई परेशानियां सामने आई थीं। नेपाल फिलहाल विदेशी बचाव दलों के बजाय एक केंद्रीकृत व्यवस्था के माध्यम से आर्थिक सहायता चाहता है। अधिकारियों के मुताबिक, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के चरण में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अतिरिक्त सहयोग मांगा जाएगा।


आपदा का दायरा बेहद व्यापक है। नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि अब तक 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि घायल अवस्था में 1,545 लोगों को बचाया गया है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, करीब एक हजार लोग अब भी लापता हैं। इनमें 28 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।खोज एवं बचाव अभियान में नेपाल पुलिस के 4,348 जवान लगाए गए हैं। अधिकारियों ने रसुवा से 644, नुवाकोट से 898 और धादिंग से तीन लोगों को सुरक्षित निकाला है।

लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। ‘‘द काठमांडू पोस्ट’’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 178 भारतीय, 65 अमेरिकी, 51 मलेशियाई, 53 यूक्रेनी, 33 ब्रिटिश, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 25 कनाडाई नागरिकों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। इनके अलावा कई अन्य देशों के नागरिक भी लापता हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 100 चीनी नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और मानवीय सहायता का स्वागत किया है। अमेरिका ने पांच लाख डॉलर देने की घोषणा की है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आपातकालीन चिकित्सा सामग्री भेजी है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों से जुड़ी जानकारी, खोज एवं बचाव अभियान और कांसुलर सहायता के समन्वय के लिए एक ‘आपातकालीन नियंत्रण कक्ष’ भी स्थापित किया है।

इस बीच, रेड क्रॉस ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए 3.1 करोड़ डॉलर की आपातकालीन अपील जारी की है। स्विट्जरलैंड स्थित इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज (IFRC) ने तत्काल जीवनरक्षक अभियानों के लिए दस लाख स्विस फ्रैंक जारी करने के अगले ही दिन ढाई करोड़ स्विस फ्रैंक जुटाने की अपील की। दूसरी ओर, यूनिसेफ की टीमें नुवाकोट पहुंच चुकी हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। यूनिसेफ के प्रतिनिधि मानवीय स्थिति का आकलन करने के साथ विस्थापित लोगों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने में जुटे हैं।

जमीनी हालात का जायजा लेने पहुंचे यूनिसेफ के एक प्रतिनिधि ने एएनआई से कहा,

“हम स्थिति का आकलन कर रहे हैं और नेपाल सरकार के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं।”

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद ब्रिटेन ने 50 लाख पाउंड की आर्थिक सहायता और आपातकालीन बचाव दल भेजने की पेशकश की है। इस आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक हजार से अधिक लोग लापता हैं। लापता लोगों में लगभग 33 ब्रिटिश नागरिक भी शामिल हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने गुरुवार (27 अगस्त, 2026) को नेपाल से सामने आ रहे दृश्यों को “बेहद भयावह” बताया। उन्होंने संकट में फंसे ब्रिटिश नागरिकों से स्थानीय अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन ने तत्काल कदम उठाते हुए प्रभावित क्षेत्र में वाणिज्य दूतावास के सहायता कर्मियों को तैनात किया है, ताकि ब्रिटिश नागरिकों को चौबीसों घंटे मदद उपलब्ध कराई जा सके। साउथ वेल्स के दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में बर्नहैम ने कहा, “नेपाल में जो कुछ हुआ है, उसकी बेहद विनाशकारी तस्वीर सामने आ रही है।”