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भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लेकिन चीन के सामने अमेरिका का तेवर क्यों पड़ा ढीला?

Md. Tousif Md. Tousif | 53m ago · 4 min read
भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लेकिन चीन के सामने अमेरिका का तेवर क्यों पड़ा ढीला?

अमेरिका ने ईरान के पेट्रोलियम कारोबार से जुड़े होने के आरोप में 4 भारतीय कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध की घोषणा की है।

अमेरिका ने ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े होने के आरोप में चार भारतीय कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका की ओर से की गई यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ शुरू किए गए ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत की गई है। इसका मकसद ईरान की सरकार के आय के प्रमुख स्रोतों पर प्रतिबंध लगाकर उसकी कमाई को रोकना है।


दरअसल, अमेरिकी सेना जंग के मैदान में ईरानी सेना को निर्णायक रूप से मात नहीं दे पाई है। युद्ध की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के कई लक्ष्य घोषित किए थे, लेकिन उनमें से कोई भी लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सका। इसलिए अब ट्रंप प्रशासन एक नई रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत लंबे समय से अमेरिका के कड़े प्रतिबंध झेल रहे ईरान पर और अधिक आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।

CNN के मुताबिक, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक दिन पहले उन देशों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी, जो ईरान के साथ किसी भी तरह के व्यापारिक संबंध रखते हैं। बेसेंट ने यह भी कहा था कि,

राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे पर कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से व्यक्तिगत रूप से सहयोग का अनुरोध कर रहे हैं। हालांकि, वित्त मंत्री ने किसी देश का नाम नहीं लिया था, लेकिन CNN ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि चीन, भारत, तुर्किये, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश इन प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं।

ECONOMIC TIMES की 26 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ईरान के साथ व्यापार करने के आरोप में चार भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन चार भारतीय कंपनियों के नाम हैं:

1. पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी

2. सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड

3. पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड

4. प्रकृतिज इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि पोर्टईज पार्टनर्स एक कस्टम्स ब्रोकर कंपनी है। उस पर आरोप है कि उसने ईरान से पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खेप भारत लाने में मदद की।

इसके अलावा, अमेरिका ने सदाशिवा ओवरसीज पर कई कंपनियों से करीब 6.9 करोड़ डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पाद आयात करने का आरोप लगाया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पीपी सॉफ्टटेक और प्रकृतिज इंफ्रा ने भी कथित तौर पर करीब 2.5-2.5 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए।

इन कंपनियों और लोगों के अलावा, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने सोमवार को 60 अन्य व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाए थे।

चीन के सामने अमेरिका ने टेके घुटने

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट या विदेश मंत्रालय ने अपने बयानों में चीन का नाम नहीं लिया, जबकि चीन ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। बेसेंट ने यह बताने से भी इनकार कर दिया कि क्या इन प्रतिबंधों के तहत चीनी बैंकों पर कार्रवाई की जाएगी।

चीन के विदेश मंत्रालय ने 25 अगस्त को एक बयान जारी कर कहा कि ईरान के साथ उसका सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है, इसलिए इसमें किसी तरह की बाहरी दखलअंदाजी या रुकावट नहीं होनी चाहिए।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने मंगलवार को कहा कि ,

चीन ईरान पर लगाए गए नए अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है और अपने अधिकारों तथा हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।

25 अगस्त की Financial Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर ट्रंप प्रशासन ईरान से जुड़े नए द्वितीयक प्रतिबंधों (Secondary Sanctions) का दायरा बढ़ाकर बड़ी चीनी कंपनियों को भी इसमें शामिल करता है, तो चीन इसका कड़ा जवाब देगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और करीब 90% ईरानी तेल चीन खरीदता है। इसलिए अगर अमेरिका चीन की बड़ी कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाता है, तो इससे दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो सकता है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने वाली है।

चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि चीन अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए “सभी जरूरी कदम उठाएगा।” चीन ने यह भी कहा कि वह ऐसे एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध करता है, जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी से कोई आधार नहीं है।

चीन की बड़ी सरकारी तेल कंपनियां आम तौर पर ईरानी तेल पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करती हैं। लेकिन चीन की कुछ छोटी निजी रिफाइनरियां, जिन्हें “टीपॉट रिफाइनरी” कहा जाता है, अभी भी ईरान से तेल खरीदकर उसे प्रोसेस करती हैं।

चीन ने पिछले कुछ वर्षों में ऐसा तंत्र भी विकसित किया है, जिसके तहत अगर कोई विदेशी व्यक्ति या संस्था चीनी कंपनियों या उनकी सप्लाई चेन पर विदेशी प्रतिबंध लागू कराने में मदद करती है, तो चीन उसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकता है।

Md. Tousif

Md. Tousif

मोहम्मद तौसिफ़ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर नजर रखते हैं और ‘द क्रेडिबल हिस्ट्री’ में रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं।