International

चीन-नेपाल सीमा पर झील फटने का खतरा टला! 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता

TCN Desk TCN Desk | 2h ago · 4 min read
चीन-नेपाल सीमा पर झील फटने का खतरा टला! 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता

नेपाल में बाढ़ के कारण मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है।

चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बनी झील के फटने का खतरा अब कम हो गया है। इसी क्षेत्र में इस सप्ताह की शुरुआत में विनाशकारी बाढ़ आई थी। चीनी अधिकारियों ने शनिवार (29 अगस्त, 2026) को बताया कि झील का आकार घटता दिखाई दे रहा है।

The Hindu की एक खबर के अनुसार, नेपाल सरकार के जल संसाधन मंत्रालय के हवाले से बताया कि गुरुवार (27 अगस्त, 2026) से शनिवार (29 अगस्त, 2026) सुबह तक की सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिलता है कि चीन के तिब्बत क्षेत्र और नेपाल की सीमा पर दो नदियों के संगम पर फैली इस झील का पानी धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है। इसके कारण झील में जमा पानी लगातार कम हो रहा है।

बता दें कि नेपाल के भोटेकोसी नदी में आई बाढ़ के कारण मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ‘द काठमांडु पोस्ट’ की खबर के अनुसार मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 हो गई है एवं 2,426 लोग अब भी लापता है।

वैज्ञानिक इस बात की जांच कर रहे है कि ग्लेशियर के टूटकर गिरने और बर्फ-चट्टानों के खिसकने से भोटेकोसी नदी में बाढ़ कैसे आई। चीन के अधिकारियों ने ये जानकारी दी है नेपाल में एक विशाल अवरोधक झील का निर्माण हो गया है और झील पहले से ही ओवरफ्लो हो रही है और आने वाले दिनों में इसमें और अधिक पानी आने से यह टूट सकती है।

नेपाल में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है जिसमें अनेक लोगों के मौत की खबर के साथ ही अनेक लोगों के लापता होने की खबर आई जिसमें विभिन्न पर्यटक भी थे। नेपाल में निजी और सार्वजनिक संपत्ति बह गई जिसके कारण उन्हे बहुत नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल में बाढ़ भूस्खलन के बाद आई जिससे भोटेकसी नदी की सहायक नदी लेंडे के प्रवाह अवरुद्ध हुआ और नेपाल की चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी में स्थित तिमुरे को प्रभावित किया। अधिकांश हिस्सा बाढ़ के बहाव के चपेट में आया जिससे अनेक बस्तियाँ भी तबाह हो गई।


रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेन्द्र ढुंगाना ने बताया कि,

सुबह जब उन्होंने जमीन हिलते हुए महसूस किया तो उन्हें लगा कि भूकंप आया है। जब उन्होंने बाहर देखा पानी की विशाल लहर जिसके पीछे धुएं का गुब्बार सा दिखाई दे रहा था, ऊपर से तेजी से नीचे आ रही थी और तिमुरे बाजार की ओर बढ़ रही थी।बाढ़ जैसे निचले इलाकों की ओर बढ़ी, बाढ़ ने अपने रास्ते में आने वाले सभी चीजों को तबाह किया जिसमें पशु, इमारतें और लोग भी शमिल थे।

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आपदा विशेषज्ञों का कहना है बुधवार की बाढ़ नेपाल के आधुनिक इतिहास की सबसे घातक बाढ़ों में से एक हो सकती है - संभवतः 1993 में सरलाही, रौतहट और मकवानपुर में आई बाढ़ के बाद से हुई हर आपदा को पीछे छोड़ सकती है, जिसमें 1,400 लोग मारे गए थे और जिसे लंबे समय से देश की सबसे बड़ी आपदा माना जाता रहा है।

नेपाल की आपदा से प्रभावित लोगों की तलाश बचाव दल कर रहे हैं और निकले इलाकों में अब भी शव बरामद किए जा रहे हैं चीनी अधिकारियों ने कहा कि वे झील की निगरानी करना और जलवैज्ञानिक विश्लेषण करना जारी रखेंगे, साथ ही संभावित आपातकालीन बचाव और बाढ़ नियंत्रण अभियानों की तैयारी करेंगे।

मीडिया रेपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल के मौसम विभाग ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में और बारिश की चेतावनी दी गई है जिससे राहत कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है। चीनी अधिकारियों ने कहा है नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के टूटने से बनी झील का खतरा कम हो गया है। सरकारी प्रकाशक सीसीटीवी ने जल संसाधन मंत्रालय के हवाले से बताया है बृहस्पतिवार से शनिवार तक की उपग्रह तस्वीरों से पता चल रहा है कि दो नदियों की संगम की सीमा पर स्थित झील का पानी धीरे-धीरे बह रहा है जिससे जलाशय का जलस्तर कम हो रहा है।

खोज, बचाव और राहत कार्य के लिए 15,224 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया जा रहा है। बारिश के मौसम में नेपाल लगभग हर साल बाढ़ की चपेट में आता है। पर्यावरण में आए दिन परिवर्तन हो रहा है जिससे हर साल मौसम में बदलाव देखने को मिलता है। खबरों के मुताबिक सुरक्षा कर्मी जैसे-जैसे पहचान के लिए प्रभावित क्षेत्रों में जाएंगे बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ने की पूरी आशंका है साथ ही लापता लोगों की खोज की जा रही है।