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IIT संस्थानों में 5 साल में 45 छात्रों ने की आत्महत्या, आधे से ज्यादा SC-ST-OBC वर्ग से: सरकारी आंकड़ा

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
IIT संस्थानों में 5 साल में 45 छात्रों ने की आत्महत्या, आधे से ज्यादा SC-ST-OBC वर्ग से: सरकारी आंकड़ा

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में छात्र आत्महत्या का मामला गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।

देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में छात्र आत्महत्या का मामला गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 से 2024-25 के बीच देश के IITs में कम से कम 53 छात्रों की मौत हुई। इनमें 45 मौतें आत्महत्या और आठ मौतें अन्य अप्राकृतिक कारणों से हुईं। खास बात यह है कि इनमें आधे से ज्यादा यानी 29 मौतें SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों की थीं।

Hindustan Times (HT) को मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक,

इन पांच वर्षों में IITs में छात्रों की मौत की संख्या लगातार बढ़ी है। 2020-21 में पांच छात्रों की मौत हुई थी, जो 2021-22 और 2022-23 में बढ़कर छह-छह हो गई। इसके बाद 2023-24 में यह संख्या तेजी से बढ़कर 17 और 2024-25 में 19 हो गई।


आंकड़ों के अनुसार,

पांच साल में हुई कुल 53 मौतों में 45 यानी 84.9 फीसदी मामले आत्महत्या के थे। वहीं आठ मौतों को अप्राकृतिक मौत की श्रेणी में रखा गया। अकेले 2024-25 में 19 छात्रों की मौत हुई, जिनमें छह मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुईं।

श्रेणीवार आंकड़ों की बात करें तो सामान्य वर्ग के 23 छात्रों की मौत हुई, जबकि OBC वर्ग के 12, SC के 10, ST के सात और EWS वर्ग के एक छात्र की मौत हुई।

इस तरह SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों की कुल 29 मौतें हुईं, जो कुल मौतों का 54.7 फीसदी है।

आंकड़ों के मुताबिक, सामान्य वर्ग के 23 मृत छात्रों में से सात की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई। वहीं OBC के सभी 12, ST के सभी सात और EWS के एक छात्र की मौत आत्महत्या के कारण हुई। SC वर्ग के 10 छात्रों में से नौ की मौत आत्महत्या से हुई। सामान्य वर्ग के छात्रों की मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ा। 2020-21 में सामान्य वर्ग से कोई मौत दर्ज नहीं हुई थी, जबकि 2021-22 में चार, 2022-23 में तीन, 2023-24 में सात और 2024-25 में नौ मौतें दर्ज की गईं।


SC, ST और OBC छात्रों की मौतों में भी 2023-24 से तेज बढ़ोतरी देखी गई। इन वर्गों में 2020-21 में पांच, 2021-22 में दो और 2022-23 में तीन मौतें हुई थीं। इसके बाद 2023-24 में यह संख्या बढ़कर नौ और 2024-25 में 10 हो गई।
पांच साल के दौरान IIT खड़गपुर, IIT दिल्ली और IIT हैदराबाद में सबसे ज्यादा सात-सात छात्रों की मौत दर्ज की गई। इसके बाद IIT कानपुर और IIT (BHU) वाराणसी में छह-छह और IIT मद्रास में पांच छात्रों की मौत हुई।

केवल आत्महत्या के मामलों को देखें तो IIT हैदराबाद में सबसे ज्यादा सात आत्महत्याएं दर्ज हुईं। इसके बाद IIT खड़गपुर, IIT दिल्ली और IIT कानपुर में छह-छह आत्महत्याएं हुईं। वहीं अप्राकृतिक मौतों के मामले में IIT (BHU) वाराणसी और IIT पटना में सबसे ज्यादा दो-दो मामले दर्ज किए गए। आंकड़ों के अनुसार, सामान्य वर्ग के 23 मृत छात्रों में से 13 मौतें IIT खड़गपुर, IIT (BHU) वाराणसी और IIT दिल्ली में हुईं।

OBC वर्ग के 12 मृत छात्रों में से सात मौतें IIT रुड़की, IIT दिल्ली और IIT मद्रास में दर्ज की गईं। वहीं SC वर्ग के 10 मृत छात्रों में से छह मौतें IIT हैदराबाद और IIT दिल्ली में हुईं।

यह आंकड़े IITs की ओर से शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग को भेजी गई जानकारी पर आधारित हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव निलेश चंद्र श्रीवास्तव ने 1 दिसंबर 2025 को IITs को पत्र भेजकर छात्रों की आत्महत्या और अप्राकृतिक मौतों से जुड़ी जानकारी मांगी थी।
यह जानकारी कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल की ओर से लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब के लिए मांगी गई थी। सवाल में SC, ST और OBC छात्रों के नामांकन, पढ़ाई पूरी करने की दर, जातिगत भेदभाव की शिकायतों, छात्रों की आत्महत्या और अप्राकृतिक मौतों के साथ-साथ UGC के समानता संबंधी नियमों के क्रियान्वयन की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई थी।

हालांकि, मंत्रालय को IITs से जवाब मिलने के बावजूद यह आंकड़े संसद में पेश नहीं किए गए। इससे पहले जुलाई 2023 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने संसद को बताया था कि2018 से 2023 के बीच IITs में 39 छात्रों ने आत्महत्या की थी। स्वतंत्र आकलनों में मौतों की संख्या इससे ज्यादा होने की संभावना भी जताई गई थी।

अकादमिक विशेषज्ञों और फैकल्टी सदस्यों के मुताबिक, IITs में छात्रों की आत्महत्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें शैक्षणिक दबाव, सामाजिक अलगाव, छात्रों और शिक्षकों के बीच सीमित संवाद और कैंपस में समावेशन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

BITS पिलानी के वाइस चांसलर और IIT दिल्ली के पूर्व निदेशक प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव ने कहा कि,

समस्या केवल कैंपस में काउंसलर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। आज के छात्र पहले की तुलना में ज्यादा विविध सामाजिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके सामने अकादमिक दबाव, रिलेटिव ग्रेडिंग, अकेलापन, शिक्षकों से सीमित बातचीत और नौकरी को लेकर चिंता जैसी चुनौतियां हैं। ऐसे में IITs को केवल संकट आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय रोकथाम पर ध्यान देना चाहिए और छात्रों की मानसिक एवं सामाजिक भलाई को कैंपस जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 दिसंबर 2025 तक देश के 23 IIT परिसरों में कुल 108 काउंसलर उपलब्ध थे।

नोट: मानसिक तनाव या भावनात्मक संकट का सामना कर रहे व्यक्ति को किसी भरोसेमंद व्यक्ति, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या उपलब्ध आपातकालीन सहायता सेवा से संपर्क करना चाहिए।