पश्चिम बंगाल में पोस्टर लगे- बिरयानी खाएं, लेकिन हिंदू की दुकान से
विपक्ष ने इसकी आलोचना करते हुए कहा है कि खाने और खरीदारी के फैसलों को धर्म से जोड़ना समाज में विभाजन पैदा कर सकता है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार आने के बाद आए दिन धार्मिक विभाजन की घटनाएं सामने आ रही है। मुस्लिम और ईसाई समुदायों पर हमले बढ़ रहे हैं और अब तो पर्व-त्योहार को भी धार्मिक विभाजन के टूल के रूप में भाजपा सरकार इस्तेमाल करने लगी है। पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में कई चर्चों में तोड़फोड़ की गई और ईसाई समुदाय के लोगों को प्रार्थना करने से मना किया गया। डर और दहशत का ऐसा माहौल बनाया गया ईसाई समुदाय के लोगों ने सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित करना ही बंद कर दिया।
और अब,
दुर्गा पूजा में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में लोगों से हिंदू समुदाय के स्वामित्व वाली दुकानों से मांस और बिरयानी खरीदने की अपील करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। हिंदू जागरण मंच के इस अभियान से धार्मिक पहचान, खानपान की स्वतंत्रता और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी नेताओं ने इसकी आलोचना करते हुए कहा है कि खाने और खरीदारी के फैसलों को धर्म से जोड़ना समाज में विभाजन पैदा कर सकता है।
Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये पोस्टर शहर के कई इलाकों में दिखाई दिए हैं। इनमें भारत नगर स्थित तरुण तीर्थ क्लब के दुर्गा पूजा मैदान के आसपास की दीवारें भी शामिल हैं। यह स्थान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि क्लब का पूजा आयोजन स्थल राज्य के पर्यटन मंत्री और सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष के आवास के नजदीक है। हालांकि, घोष ने कहा है कि उन्हें जानकारी नहीं है कि ये पोस्टर किसने लगाए।
एक पोस्टर में लिखा है,
हिंदू दुकानों से मांस खरीदें।” दूसरे पोस्टर का संदेश है, “बिरयानी खाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। बिरयानी खाएं, लेकिन हिंदू की दुकान से खरीदें। त्योहार की शुरुआत में पूजा स्थल के बाहर लगाए गए इन पोस्टरों ने स्थानीय लोगों और राहगीरों का ध्यान खींचा है। कई लोग रुककर इन्हें पढ़ते दिखाई दिए।
इस अभियान ने सवाल खड़े किए हैं कि,
क्या दुर्गा पूजा जैसे उत्सव के दौरान धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों की खरीदारी को प्रभावित करना उचित है। दुर्गा पूजा बंगाल के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में पूजा पंडालों के आसपास इस तरह के संदेश लगाए जाने को लेकर बहस तेज हो गई है।
हिंदू जागरण मंच के प्रतिनिधि अभिषेक दास ने स्वीकार किया कि संगठन ने ही ये पोस्टर लगाए हैं। उन्होंने कहा कि,
अभियान केवल भारत नगर तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के विभिन्न पूजा पंडालों के सामने भी ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं। संगठन के मुताबिक, इसका उद्देश्य हिंदू एकता का संदेश देना है।

हिंदू जागरण मंच के प्रतिनिधि अभिषेक दास ने कहा,
“ये पोस्टर हमने खुद लगाए हैं। सिर्फ भारत नगर में नहीं, शहर के अलग-अलग पूजा पंडालों के सामने भी पोस्टर लगे हैं। इनके जरिए हम हिंदू जागरण मंच की ओर से हिंदू एकता का संदेश देना चाहते थे।”
पोस्टर विशेष रूप से मांस और बिरयानी हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील करते हैं। इस तरह रोजमर्रा की एक व्यावसायिक गतिविधि को धार्मिक पहचान से जोड़ा गया है। जहां संगठन इसे एकता का अभियान बता रहा है, वहीं आलोचकों का कहना है कि इससे अलग-अलग समुदायों के बीच दूरी बढ़ सकती है।
पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने इस अभियान से दूरी बनाते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि ये पोस्टर किसने लगाए हैं। जिन्होंने लगाए हैं, वही बता सकते हैं कि उन्होंने ऐसे पोस्टर क्यों लगाए।” उनके आवास के पास स्थित पूजा स्थल पर पोस्टर सामने आने के बाद उनकी यह प्रतिक्रिया आई।
सिलीगुड़ी के पूर्व मेयर और वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टरों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि,
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े संगठन धर्म के नाम पर लोगों के बीच विभाजन पैदा कर रहे हैं। ऐसे संगठन आरएसएस द्वारा चलाए जाते हैं। भाजपा आरएसएस की फासीवादी नीतियों का अनुसरण करने वाली पार्टी है। ये जाति और धर्म के नाम पर लोगों के बीच नफरत फैलाते हैं।
उन्होंने कहा कि,
खानपान व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय होना चाहिए। कोई व्यक्ति बंगाली, हिंदू, मुस्लिम, बिहारी या मारवाड़ी हो, उसे यह तय करने की आजादी होनी चाहिए कि वह क्या खाए और कहां से खरीदे। उन्होंने कहा, “हमने पहले कभी ऐसा घिनौना प्रचार नहीं देखा। अब इसका सामना करना पड़ रहा है और इसके पीछे भाजपा है।
भट्टाचार्य ने अभियान को राज्य के राजनीतिक माहौल से भी जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भाषा ऐसे संगठनों का हौसला बढ़ा रही है। उन्होंने पुलिस से पोस्टर हटाने की मांग करते हुए कहा कि ये सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा हैं। हालांकि, भाजपा और आरएसएस के खिलाफ उनके आरोप राजनीतिक दावे हैं; उपलब्ध सामग्री से उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।
सिलीगुड़ी के एक अन्य पूर्व मेयर गौतम देब ने भी अभियान की आलोचना की। उन्होंने कहा,
लोगों को फैसला करने दीजिए। मुझे यह कुछ हास्यास्पद लगता है। हमारा राज्य धर्मनिरपेक्ष है। संविधान की भावना की अनदेखी करके पूजा से ठीक पहले ऐसे पोस्टर लगाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
देब ने कहा कि धार्मिक आधार पर खरीदारी की अपील बंगाल की सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक, बंगाल के लोग राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और इस अभियान का अर्थ समझेंगे। उन्होंने कहा कि यदि पोस्टर असंवैधानिक पाए जाते हैं, तो पुलिस को उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
