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SIR के बाद अब SSR लेकर आया चुनाव आयोग, 17 राज्यों में अपडेट होगी मतदाता सूची

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
SIR के बाद अब SSR लेकर आया चुनाव आयोग, 17 राज्यों में अपडेट होगी मतदाता सूची

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चुनाव आयोग मतदाताओं को परेशान करने के लिए एक और नया झंझट लेकर आया है।

SIR को लेकर पिछले कुछ समय से देशभर में चल रहा व्यापक प्रदर्शन अभी थमा नहीं, राजनीतिक विवाद अभी भी चरम पर है और अब चुनाव आयोग मतदाताओं को परेशान करने के लिए एक और नया झंझट लेकर आया है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची को अपडेट करने का आदेश दिया है। इस प्रक्रिया को विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) कहा जाता है। इसके तहत मतदाता सूची में नए नाम जोड़े जाएंगे और गलतियों को ठीक किया जाएगा। जिन लोगों का नाम सूची में नहीं है, वे अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।


हांलाकि जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया जारी है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां SSR की तारीखें बाद में घोषित की जाएंगी।

आयोग ने 1 जनवरी 2027 को मतदाता बनने की पात्रता की तारीख तय की है। इसका मतलब है कि इस तारीख तक पात्र होने वाले लोग मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को जारी की जाएगी। इससे पहले जनवरी 2025 में मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया था।

निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची अपडेट की जाएगी।

आयोग ने 29 सितंबर को भी अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में छूट गया है, युवाओं और पहली बार वोट देने के योग्य हुए लोगों का नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
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आयोग ने मतदाता सूची में बदलाव के लिए तारीखें तय कर दी हैं। इसके अनुसार, 2 नवंबर तक मतदान केंद्रों की व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद 12 नवंबर को मतदाता सूची का प्रारूप जारी होगा। प्रारूप सूची जारी होने के बाद लोग उसमें अपना नाम और अन्य जानकारी देख सकेंगे। अगर किसी का नाम सूची में नहीं है या उसके नाम, पते और दूसरी जानकारी में कोई गलती है, तो वह सुधार के लिए आवेदन कर सकता है।

दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की तारीख 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक होगी। अधिकारियों को इन आवेदनों की जांच करके 28 दिसंबर तक उनका निपटारा करना होगा। इसके बाद 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।

आयोग ने यह भी बताया है कि,

जो लोग 1 जनवरी 2027 तक पात्र नहीं बन पाएंगे, लेकिन बाद में मतदाता बनने की योग्यता पूरी करेंगे, वे भी पहले से आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 की पात्रता तारीखों के आधार पर आवेदन लिए जाएंगे।
मतदाता सूची को अपडेट करने की यह प्रक्रिया विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से अलग है। SIR में मतदाता सूची की व्यापक जांच की जाती है और उसे नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। वहीं, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) में पहले से मौजूद मतदाता सूची में जरूरी बदलाव किए जाते हैं।

इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना शामिल हैं, जहां मतदाता सूची दोबारा अपडेट की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अभी SIR शुरू नहीं हुआ है। आयोग ने कहा है कि इन क्षेत्रों में मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम तय किया जाएगा।

निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मतदाता सूची अपडेट करने के लिए पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इस दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी और मतदाता पंजीकरण से जुड़े अधिकारियों के पद खाली नहीं रहने चाहिए। आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा करने पर भी कुछ सीमाएं तय की हैं। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में नाम हटाने के आवेदन जमा करने पर रोक लगाना है।

अगर किसी मतदान केंद्र पर कुल मतदाताओं के 2 प्रतिशत से ज्यादा नाम हटाने के आवेदन आते हैं, तो संबंधित अधिकारी को हर मामले की व्यक्तिगत रूप से जांच करनी होगी। इसी तरह, अगर कोई व्यक्ति पांच से ज्यादा मामलों में नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराता है, तो उन मामलों की भी अलग से जांच की जाएगी।

आयोग ने मतदान केंद्रों की व्यवस्था को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। आयोग की अनुमति के बिना किसी मतदान केंद्र पर 1,200 से ज्यादा मतदाता नहीं रखे जा सकेंगे। मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय नहीं करनी चाहिए। उन्हें ऐसी प्राकृतिक बाधाओं का सामना भी नहीं करना पड़ेगा, जिससे मतदान केंद्र तक पहुंचने में परेशानी हो। मतदान केंद्रों को भवनों के भूतल पर बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को वहां पहुंचने में आसानी हो। इसके अलावा, एक ही घर या फ्लैट में रहने वाले परिवारों को अलग-अलग मतदान केंद्रों या हिस्सों में बांटने से बचने को कहा गया है।

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मतदाताओं के पते भी एक समान तरीके से दर्ज किए जाएंगे। जहां मकान नंबर उपलब्ध नहीं होगा, वहां इस्तेमाल किए गए वैकल्पिक नंबर को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाएगा।

आयोग ने अधिकारियों को पिछली मतदाता सूची के आंकड़ों की जांच करने का भी निर्देश दिया है। इसमें कुल आबादी के मुकाबले मतदाताओं की संख्या, महिला और पुरुष मतदाताओं का अनुपात और 18 से 19 साल के युवाओं की संख्या देखी जाएगी। जहां कमी मिलेगी, वहां उसे दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे।