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दिल्ली SIR में 47 लाख लोगों के नाम कटे, आडवाणी-धनखड़-जयशंकर और सीएम रेखा गुप्ता सहीत 33 लाख लोगों को गया नोटिस

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
दिल्ली SIR में 47 लाख लोगों के नाम कटे, आडवाणी-धनखड़-जयशंकर और सीएम रेखा गुप्ता सहीत 33 लाख लोगों को गया नोटिस

दिल्ली में चल रहे SIR के दौरान मौजूदा मतदाताओं में से लगभग 54.6% मतदाताओं के नाम या तो मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं या उन्हें चुनाव आयोग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं।

दिल्ली में वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है। इसी दौरान दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई बड़े नेताओं और दिग्गजों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। मजेदार बात यह है कि इस सूची में मशहूर अर्थशास्त्री बिबेक ओबेरॉय का नाम भी शामिल है, जिनका निधन 2024 में हो गया था।

राज्यसभा सांसद और देश के प्रसिद्ध वकील कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी को भी “पिछले SIR से मैप नहीं हुआ” श्रेणी में नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, दिल्ली के CEO कार्यालय ने कहा है कि जिन मतदाताओं के विवरण में गड़बड़ी है, उन्हें डेटा सुधारने के लिए ECINET के ज़रिए सिस्टम द्वारा तैयार किए गए नोटिस भेजे जा रहे हैं।

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 97 लाख से ज़्यादा लोगों की वोटर लिस्ट जारी की गई है, जिसमें 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में कोई न कोई गड़बड़ी या अंतर मिला है। अधिकतर मामले ऐसे हैं, जिनमें मौजूदा मतदाताओं की जानकारी का 2002 में हुए पिछले SIR की मतदाता सूची से मिलान नहीं हो पाया।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी SIR का नोटिस मिला है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नोटिस की वजह उनके माता-पिता के बीच उम्र का अंतर 15 साल से कम पाया जाना है।

पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की बेटी प्रतिभा और पोती गीतिका को भी SIR का नोटिस मिला है। नोटिस में बताया गया है कि इन तीनों का नाम 2002 की मतदाता सूची से मैच नहीं हुआ, जबकि आडवाणी के बेटे जयंत का नाम रिकॉर्ड से मैच कर गया।

REPORTERS COLLECTIVE की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में चल रहे SIR के दौरान राजधानी के मौजूदा मतदाताओं में से आधे से ज़्यादा,लगभग 54.6% मतदाताओं के नाम या तो मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं या उन्हें ECI की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। SIR से पहले दिल्ली में 1.45 करोड़ मतदाता थे, इनमें से ECI ने पहले 47.6 लाख ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए, जिन्हें अनुपस्थित, दूसरी जगह चले गए, मृत या डुप्लिकेट (ASDD) के तौर पर दर्ज किया गया था।

ECI ने जिन लाखों मतदाताओं के विवरण पर सवाल उठाए हैं, उनके पास अब दिल्ली में अपनी पहचान और वोट देने का अधिकार साबित करने के लिए 29 अक्टूबर तक का समय है। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR के नाम पर पैदा हुई इस अव्यवस्था से दिल्ली के गरीबों को सबसे ज़्यादा नुकसान होगा, भले ही अमीर और ताक़तवर लोग इससे निकलने का कोई VIP रास्ता ढूंढ लें।

VIP मतदाताओं को नोटिस जारी करने के संबंध में दिल्ली CEO द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में जिस तरह का अस्तित्व संकट बताया जा रहा है, वैसा कोई संकट नहीं है। हालांकि, इस नोटिस पर लोग सवाल भी पूछ रहे हैं कि जब देश में सभी वोटर एक समान हैं, तो चुनाव आयोग VIP मतदाताओं के संबंध में अलग से बयान क्यों जारी कर रहा है?


चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों में चेतावनी दी गई है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान किसी मतदान केंद्र पर मतदाताओं के नाम हटाने की दर 2% से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक दर को संदेहास्पद माना जाता है और “निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी द्वारा व्यक्तिगत रूप से दोबारा सत्यापित किया जाना ज़रूरी” बताया गया है। लेकिन REPORTERS COLLECTIVE की जांच में सामने आया कि दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के सभी 14,947 मतदान केंद्रों में से सिर्फ़ 51 बूथ ऐसे हैं, जहां नाम हटाए जाने की दर 2% की तय सीमा के भीतर रही। वहीं, 639 मतदान केंद्रों पर पंजीकृत 50% मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।

रिपोर्ट में ऐसे मतदान केंद्रों के बारे में भी बताया गया है, जहां 70% से ज़्यादा मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे। ऐसे कुल 29 केंद्र थे। इनमें से नौ उन बस्तियों में थे, जहां सरकार ने घरों को ध्वस्त किया था। इन नौ केंद्रों पर 87.87% मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। यानी, इन केंद्रों पर पंजीकृत 10,015 मतदाताओं में से 8,800 के नाम सूची से काट दिए गए। इनमें से कई लोगों को सरकार ने नए पते पर बसाया था। फिर भी ECI ने उनके दस्तावेज़ स्वीकार नहीं किए और उनके नाम हटा दिए।