CJP के सौरभ दास ने BCI के चेयरमैन से क्यों मांगा 14 करोड़ के खर्च का हिसाब?
मनन कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सिर्फ एक साल में बैठकों और सम्मेलनों पर 14 करोड़ रुपये खर्च किए।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह- संयोजक सौरभ दास ने जैसे ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा पर हमला किया, उनके सुर बदल गए।
CJP के सह-संयोजक सौरभ दास ने मनन कुमार मिश्रा पर हमला करते एक एक्स पोस्ट किया और कहा कि ,
मनन कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सिर्फ एक साल में बैठकों और सम्मेलनों पर 14 करोड़ रुपये खर्च किए। उन्हें NALSAR के छात्रों को लेकर जारी अपने बेहद आपत्तिजनक आदेश का एक हिस्सा महज एक घंटे के भीतर वापस लेना पड़ा। तो सवाल है कि ये 14 करोड़ रुपये आखिर कहां और कैसे खर्च किए जा रहे हैं? इसके अलावा यात्रा और ठहरने पर भी 12 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेकिन इसका नतीजा क्या रहा? अगर मिश्रा युवा छात्रों के खिलाफ इतना कठोर आदेश जारी कर सकते हैं, तो फिर वे युवा वकीलों और लॉ स्कूलों के कल्याण के लिए आखिर क्या कर रहे हैं? वह 2012 से इस पद पर हैं और 2030 तक इस पद पर बने रहेंगे। अब आपका समय पूरा हो चुका है, मिश्राजी!
इतना ही नहीं CJP ने उनके पिछले रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए और उनके इस्तीफे की मांग की।
हालांकि मनन कुमार मिश्र ने ने CJP के सौरभ दास के इस हमले पर तुरंत प्रतिक्रिया दी और कहा कि,
मैं अभिजीत दीपके और सौरव दास से यह कहना चाहता हूं कि हमारे और उनके हित एक ही हैं—छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना।
मिश्रा ने आगे कहा कि,
असल में छात्रों के हितों को नुकसान पहुंचाने की कभी कोई मंशा नहीं थी। फैसला अचानक लिया गया था और जैसे ही यह काउंसिल के संज्ञान में आया, इसे रोक दिया गया। इस मामले पर काउंसिल में चर्चा हुई। काउंसिल के सभी वरिष्ठ सदस्यों ने इस पर विचार किया और उसके बाद हमने इस फैसले को पूरी तरह वापस ले लिया। किसी जांच का सवाल ही नहीं है।
CJP नेताओं को सीधे संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि चाहे अभिजीत दीपके हों या मिस्टर दास, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि जहां तक छात्रों के हितों का सवाल है, इसमें कोई समस्या नहीं है। छात्रों के हितों की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी है और यह बार काउंसिल ऑफ इंडिया तथा उसके सदस्यों की भी जिम्मेदारी है। छात्रों के अधिकारों के मुद्दे पर BCI और CJP के बीच किसी तरह का टकराव नहीं होने पर जोर देते हुए BCI चेयरमैन ने कहा, “अगर किसी को कोई भ्रम है या संवाद में कोई कमी रह गई है, तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि छात्रों के हित हमारे और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए सर्वोपरि हैं। हमें देश के युवाओं के हितों की रक्षा करनी है। अभिजीत दीपके जो चाहते हैं, वही हम भी चाहते हैं युवाओं के हितों की रक्षा। इसलिए यहां हितों का कोई टकराव नहीं है।
मिश्रा ने CJP प्रवक्ता सौरव दास के उस आरोप का भी जवाब दिया, जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने बैठकों और सम्मेलनों पर 14 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
BCI चेयरमैन ने कहा,
मुझे नहीं पता कि 14 करोड़ रुपये का यह आंकड़ा कहां से आया है। ऐसी कोई बैठकें नहीं होती हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया विभिन्न विषयों पर सेमिनार जरूर आयोजित करती है, लेकिन बैठकों और सम्मेलनों पर 14 करोड़ रुपये खर्च करने जैसी कोई बात नहीं है। मिश्रा ने आगे कहा कि अगर किसी तरह का “कम्युनिकेशन गैप” रहा है, तो वह CJP नेताओं से बात करने और पूरे मामले को समझाने के लिए तैयार हैं।
बता दें कि BCI ने गुरुवार को सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि हैदराबाद स्थित NALSAR के 2026 बैच के किसी भी स्नातक का वकील के रूप में नामांकन न किया जाए। यह निर्देश विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की प्रस्तावित भागीदारी का कुछ छात्रों द्वारा विरोध किए जाने के बाद दिया गया था। हालांकि, व्यापक आलोचना के बाद यह आदेश वापस ले लिया गया। इस विवाद की जड़ें CJI सूर्यकांत द्वारा बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई टिप्पणियों में थीं, जिनमें उन्होंने उनके लिए “कॉकरोच” शब्द का भी इस्तेमाल किया था। इसी टिप्पणी ने परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ Gen Z आंदोलन की जमीन तैयार की थी। सीजेआई सूर्यकांत की इस टिप्पणी के बाद देशभर में हुए व्यापक आंदोलन से नरेंद्र मोदी सरकार बैकफुट पर आई और 12 साल के भाजपा सरकार के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
गौरतलब है कि मनन कुमार मिश्रा वरिष्ठ अधिवक्ता और बिहार से राज्यसभा सांसद हैं। उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया था। वह देश में वकीलों और कानूनी शिक्षा की शीर्ष नियामक संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष भी हैं। मौजूदा विवाद में उनकी यह भूमिका केंद्र में है। बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले मिश्रा ने छपरा के राजेंद्र कॉलेज से बीएससी (ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने पटना लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की। उन्होंने वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत गोपालगंज सिविल कोर्ट से की। इसके बाद 1982 में वह पटना हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। बाद में वह सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता बने।
मिश्रा नवंबर 2014 से BCI का नेतृत्व कर रहे हैं। 2025 में उन्हें रिकॉर्ड सातवीं बार लगातार BCI का अध्यक्ष चुना गया। अध्यक्ष का कार्यकाल दो साल का होता है। कानूनी क्षेत्र के अलावा मिश्रा राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। भाजपा में शामिल होने से पहले उन्होंने 2010 का बिहार विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था। 2024 में भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया, जहां वह निर्विरोध निर्वाचित हुए।