मुरली मनोहर जोशी ने इशारों में दिया राहुल गांधी को समर्थन
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भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के निष्पक्ष चुनाव और सरकार की जवाबदेही से जुड़े बयान को राहुल गांधी की मांगों से जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के लोकतंत्र, निष्पक्ष चुनाव और सरकार की जवाबदेही से जुड़े बयान को राहुल गांधी की मांगों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, जोशी ने किसी नेता या राजनीतिक दल का नाम लेकर समर्थन नहीं किया। लेकिन वरिष्ठ भाजपा नेता जोशी के बयान से इतना तो स्पष्ट है कि वो वर्तमान मोदी सरकार से खफा हैं और जिन मांगों को लेकर राहुल गांधी मुखर हैं और मोदी सरकार की आलोचना कर रहे हैं, उसके पक्ष में जोशी का भी अप्रत्यक्ष समर्थन है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बारे में पूछे जाने पर जोशी ने कहा कि लोकतंत्र तभी कायम रह सकता है, जब चुनाव निष्पक्ष हों। उन्होंने सरकारों की जवाबदेही पर भी जोर दिया। साथ ही कहा कि संविधान का उल्लंघन होने पर सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए।
इन टिप्पणियों का संदेश चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संवैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है। लोकतंत्र में मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए निष्पक्ष चुनाव आवश्यक हैं। इसी तरह, सरकारों की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। राहुल गांधी चुनावों की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा उठाते रहे हैं और मुरली मनोहर जोशी ने भी संवैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारी और निष्पक्ष चुनाव की बात कही है। इसी पृष्ठभूमि में जोशी के बयान को राहुल की मांगों के अनुरूप बताया जा रहा है।
हालांकि जोशी ने न राहुल गांधी का नाम लिया, न उनकी किसी मांग या आंदोलन का स्पष्ट समर्थन किया। लेकिन जोशी की टिप्पणियां निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार और संविधान की रक्षा जैसे बुनियादी लोकतांत्रिक सवालों को सामने रखती हैं। उनके बयान का राजनीतिक अर्थ तो निकाला ही जा सकता है।
बता दें कि वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने हालिया साक्षात्कारों और बयानों में नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों, कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। इस कड़ी में उत्तराखंड की बीजेपी सरकार के खिलाफ उनकी एक टिप्पणी से भाजपा नेताओं की बैचेनी बढ़ गई थी जब उन्होंने बद्रीनाथ धाम में डीजे की तेज धुन पर होने वाले कार्यक्रम पर अपनी आपत्ति दर्ज की थी।
और यह अकारण नहीं है,
दरअसल पिछले दिनों ऐसे कई मौकों पर मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ मुरली मनोहर जोशी अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर करते आ रहे हैं। चाहे जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर किए गए लाठी चार्ज का मामला हो या नीट पेपर लीक का - वरिष्ठ भाजपा नेता जोशी ने मोदी सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया है।
जोशी ने मोदी सरकार में शिक्षा बजट में कटौती, सरकारी स्कूलों के बंद होने और बढ़ते निजीकरण पर चिंता जताई है। उन्होंने यह भी सवाल किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में पेपर लीक जैसी घटनाएं क्यों नहीं होती थीं और मोदी के शासन में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। पीटीआई के अनुसार, जोशी ने कहा कि,
दिल्ली में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग की भी आलोचना की और कहा कि महिलाओं तथा युवाओं पर निर्मम बल प्रयोग से समाज का एक बड़ा वर्ग सरकार से दूर हो जाएगा। इतना ही नहीं उन्होंने सरकार द्वारा सड़कों पर अत्यधिक खर्च करने और प्राथमिक शिक्षा तथा स्वास्थ्य उपेक्षा पर तंज कसते हुए कहा था कि केवल सड़कें बनाना ही विकास नहीं है
नई शिक्षा नीति पर बोलते हुए डॉ. जोशी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के काल का भी एक बार उल्लेख कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि,
वाजपेयी सरकार के दौरान भी शिक्षा नीति बदलने का सुझाव आया था, लेकिन उन्होंने पुरानी नीति का अध्ययन करने के बाद पाया कि नीति केवल इसलिए नहीं बदली जानी चाहिए क्योंकि उसे राजीव गांधी सरकार के समय बनाया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय पुरानी नीति के ढांचे में ही जरूरी संशोधन किए गए थे।
उन्होंने NEP 2020 के निर्माण में 'नीति आयोग' की भूमिका पर सवाल उठाया और याद दिलाया कि उनके समय 'योजना आयोग' केवल श्रम/रोजगार की जरूरतों का आकलन करता था, शिक्षा के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता था। उन्होंने 'नेबरहुड स्कूल सिस्टम' (पड़ोस के स्कूल में पढ़ाई) की वकालत करते हुए कहा कि अमीर और गरीब सभी बच्चों को शुरुआती दौर में समान और मुफ्त शिक्षा मिलनी चाहिए।

वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा कि शिक्षा का आर्थिक रूप से उत्पादक होना जरूरी है। दिल्ली में M.A., Ph.D. और B.Ed. डिग्रीधारक सफाई कर्मचारी या संविदा पर काम करने को मजबूर हैं। शिक्षा और चिकित्सा केवल मुनाफा कमाने का जरिया नहीं होने चाहिए। प्राइवेट सेक्टर आए, लेकिन अपनी कमाई का एक हिस्सा वापस शिक्षा के विकास में लगाए।
वहीं विकसित भारत के मुद्दे पर जोशी ने कहा कि,
आधुनिक मानदंडों के बजाय मानवीय जीवन मूल्यों पर ध्यान देना होगा। प्रकृति के साथ रहने वाले आदिवासी समुदाय भी अपनी जीवन शैली में विकसित हैं।
