हवा में लटके लूडो गेम के पासे जैसी अजीबोगरीब इमारतों को देखना हो तो टोरंटो आएं
टोरंटो के कुछ अजीबोगरीब इमारतों और स्थापत्य कला के नमूनों के दर्शन करा रहे हैं अतुल अरोड़ा
हाल की कनाडा यात्रा में एक दिन टोरंटो डाउनटाउन में अवारगी करते हुए कुछ अजीबोगरीब इमारतों और स्थापत्य कला के नमूनों के दर्शन हुए ,पेश है उनमें से कुछ की अजीबोगरीब कहानियाँ .
क्यूब हाउस : एक सनकभरा सपना
टोरंटो के ईस्ट एंड में, सूमाक स्ट्रीट के व्यस्त चौराहे पर कई सालों तक एक ऐसा अजूबा खड़ा रहा जिसे देखकर राहगीर अपनी गाड़ियां धीमी कर लेते थे—टोरंटो क्यूब होम्स (Cube Houses)। ज़मीन पर टिके साधारण चौकोर मकानों की दुनिया में ये घर हवा में लटके विशाल हरे लूडो गेम के पासे (dice) जैसे लगते थे, मानो किसी बच्चे ने खेलते-खेलते सड़क किनारे छोड़ दिया हो।

इस अनूठी इमारत की जड़ें नीदरलैंड के मशहूर आर्किटेक्ट पिएट ब्लोम (Piet Blom) के रॉटरडैम वाले डिजाइन से जुड़ी थीं।
1996 में ओटावा के दो बिल्डर भाइयों—मार्टिन और बेन हॉगमैन—ने उस डच प्रयोग से प्रेरणा लेकर टोरंटो के एक तिकोने, बेकार पड़े भूखंड पर तीन जुड़े हुए 'क्यूब' बना दिए। उनका क्रांतिकारी विचार था कि शहर की जमीन कम है, तो क्यों न 45 डिग्री के कोण पर झुके हुए ढांचे बनाकर ऊपर की तरफ जगह बनाई जाए? हर क्यूब एक पेड़ की तरह खड़ा था और पूरा ढांचा मिलकर एक छोटा सा शहरी जंगल।
इन घरों में रहना किसी रियलिटी शो से कम रोमांचक नहीं। सीधी दीवारें ढूंढना नामुमकिन था; खिड़कियां या तो सीधे आसमान की ओर खुलती थीं या सड़क की तरफ झुकती थीं। अगर आप बिस्तर पर लेटें, तो कांच के तिरछे फलक से रात के तारे दिखते थे। अलमारी लगाने या तस्वीर टांगने के लिए साधारण बढ़ई नहीं, बल्कि किसी ज्यामिति के प्रोफ़ेसर की ज़रूरत पड़ती थी। यह जगह कला प्रेमियों, डिजाइन के दीवानों और लीक से हटकर जीने वालों के लिए एक जादुई बसेरा बन गई।

हालाँकि, वक्त और शहर के रियल एस्टेट बूम ने इस सनक भरे सपने को बख्शा नहीं। 2020 के आसपास इस ज़मीन को एक कॉन्डोमिनियम डेवलपर को बेच दिया गया। क्यूब्स को खाली कराके 2021 के अंत तक इन्हें उखाड़कर एक दूरदराज़ फार्म में सुरक्षित रख दिया गया ताकि भविष्य में इन्हें दोबारा कहीं और जोड़ा जा सके।भले ही चौराहे से वे क्यूब गायब हो चुके हैं, लेकिन टोरंटो के इतिहास में वे हमेशा उस ज़िद की निशानी बने रहेंगे जो साबित करती है कि ज़िंदगी सिर्फ सीधी लकीरों में ही नहीं, बल्कि आड़े-तिरछे कोणों में भी ख़ूबसूरती से बसर की जा सकती है।
आधा घर : एक आम परिवार की रियल एस्टेट की अंधी दौड़ के ख़िलाफ़ ज़िद
टोरंटो की सेंट पैट्रिक स्ट्रीट पर टहलते हुए नज़र मकान नंबर 54½ पर पड़ी, तो एक पल के लिए लगा कि आँखें धोखा खा रही हैं या किसी ने असली ज़िंदगी में फ़ोटोशॉप चला दिया है। यह है टोरंटो का मशहूर 'हाफ हाउस' (The Half House)—
एक ऐसा घर जिसे देखकर लगता है कि किसी विशालकाय आरी से उसे बीचो-बीच से काटकर आधा हिस्सा गायब कर दिया गया हो।

इस अजूबे की कहानी 19वीं सदी के उत्तरार्ध में शुरू होती है। 1890 and 1893 में यहाँ छह जुड़े हुए विक्टोरियन शैली के मकान (रो-हाउस) बनाए गए थे। सब कुछ दशकों तक शांति से चलता रहा, लेकिन 1950 और 60 के दशक में टोरंटो में प्रॉपर्टी डेवलपर्स का दौर आया। एक बड़ी रियल एस्टेट कंपनी पूरे ब्लॉक की ज़मीन खरीदकर वहां नई इमारतें खड़ी करना चाहती थी। डेवलपर ने एक-एक करके सेंट पैट्रिक स्ट्रीट के मकान मालिकों को मोटी रकम की पेशकश की। पाँच मकानों के मालिक मान गए और अपने घर बेच दिए। लेकिन नंबर 54½ पर रहने वाला वैलकेयर (Valkair) परिवार अपनी ज़िद पर अड़ गया। उन्होंने साफ़ कह दिया—
"चाहे जो हो जाए, हम अपना पुश्तैनी आशियाना नहीं बेचेंगे।" डेवलपर्स ने दबाव बनाया, धमकियाँ दीं और कानूनी रास्ते भी तलाशे, पर परिवार चट्टान की तरह डटा रहा। आखिरकार, खीझकर बिल्डरों ने एक अभूतपूर्व और हैरतअंगेज़ कदम उठाया। 1970 के दशक में इंजीनियरों और मज़दूरों को बुलाया गया। सर्जिकल सटीकता के साथ, पड़ोस के सारे मकानों को गिरा दिया गया, यहाँ तक कि नंबर 54½ से सटी हुई साझी दीवार (Party Wall) को भी इस तरह अलग किया गया कि इस एक परिवार के हिस्से को खरोंच तक न आए। जब धूल छंटी, तो मलबे के बीच गर्व से खड़ा था—आधा घर।
आज भी यह घर अपनी खाली, सपाट और बिना खिड़कियों वाली साइड-वॉल के साथ अकेला खड़ा है। यह महज़ ईंट-गारे का कोई अजीब ढांचा नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट दबाव और रियल एस्टेट की अंधी दौड़ के ख़िलाफ़ एक आम परिवार के अटूट आत्मसम्मान और जिद्दी हौसले का ज़िंदा स्मारक है। वैलकेयर (Valkair) परिवार की अगली पीढ़ियों ने इस घर को 2010 के दशक की शुरुआत तक अपने पास सहेज कर रखा था। बाद में इसे एक नए मालिक को बेच दिया गया, जिन्होंने इसकी ऐतिहासिक बनावट और अनोखे स्वरूप को जस का तस रखते हुए इसके भीतरी हिस्से का नवीनीकरण (renovation) कराया।
यह कोई सार्वजनिक संग्रहालय या पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि एक निजी घर है जहाँ लोग सामान्य रूप से रहते हैं—फ़र्क बस इतना है कि इसके बाहर हर रोज़ उत्सुक पर्यटकों और फोटोग्राफरों की भीड़ इस अनोखी इमारत को निहारने ज़रूर रुकती है।
लेस्लीविले डॉलहाउस : खालीपन को बचपन की मासूम यादों से भरने की अजीब दास्तान
लेस्लीविले के शांत और शालीन उपनगरीय इलाके में टहलते हुए जब 37 बर्टमाउंट एवेन्यू पर पहुँचे, तो लगा कि आप किसी आम कनाडाई मोहल्ले से सीधे 'एलिस इन वंडरलैंड' के तिलिस्मी पागलपन में कूद पड़े हैं। इस घर की मालकिन शर्ली सुम्प्रवेले ने 1990 के दशक में अपने पति के निधन के बाद अकेलेपन को मात देने के लिए एक अनोखा रास्ता चुना—उन्होंने अपने घर के आगे की छोटी सी बगिया में पुराने खिलौने सजाने शुरू किए, और फिर यह सिलसिला ऐसा चला कि पूरा घर ही एक सनकी 'खिलौना लोक' बन गया।

आज इस घर की एक भी इंच जगह खाली नहीं है;
बाड़ से लेकर पोर्च और छज्जों तक पर हज़ारों बार्बी डॉल, सुपरमैन, टेडी बियर, प्लास्टिक के जलपरियाँ और क्रिसमस की घंटियाँ टिकी हुई हैं। हवा चलने पर यहाँ लगे सैकड़ों विंड चाइम एक अजीब सा संगीत छेड़ते हैं और अनगिनत प्लास्टिक की आँखें आपको एकटक देखती हैं। यह इमारत कोई पेशेवर आर्किटेक्चर नहीं, बल्कि एक इंसान के अपने खालीपन को बेपनाह रंगों और बचपन की मासूम यादों से भरने की दिल छू लेने वाली अजीब दास्तान है।
37 बर्टमाउंट एवेन्यू पर स्थित इस मकान को इसकी मूल मालकिन (शर्ली सुमैसर) की उम्र और स्वास्थ्य कारणों से उनके परिवार ने 2024 की गर्मियों में इसे बेच दिया। नए मालिकों ने घर का नवीनीकरण (renovation) करने से पहले सितंबर 2024 के अंत में एक विदाई कार्यक्रम आयोजित किया। उस दौरान पड़ोसियों और प्रशंसकों को चैरिटी डोनेशन के बदले अपनी पसंद का खिलौना स्मृति-चिह्न (souvenir) के तौर पर ले जाने की अनुमति दी गई। घर के बाहरी हिस्से से सभी बार्बी डॉल्स, खिलौने और सजावटी सामान हटा दिए गए हैं और इमारत को पूरी तरह से नयी साज सज्जा के साथ एक सामान्य आधुनिक आवासीय घर बना दिया गया है।
भौतिक रूप से वह इमारत आज भी वहीं खड़ी है, लेकिन तीन दशकों तक टोरंटो की पहचान रहा वह अनोखा और सनकी 'डॉलहाउस' अब केवल शहर की यादों, तस्वीरों और किस्सों में ही ज़िंदा है।
बर्कज़ी पार्क डॉग फाउंटेन (Berczy Park Dog Fountain)
टोरंटो के पुराने इलाके में गूडरहैम बिल्डिंग के ठीक पीछे मौजूद यह दो-मंज़िला फव्वारा शहर का सबसे खिलंदड़ा वाला नज़ारा है। लैंडस्केप आर्किटेक्ट क्लॉड कॉर्मियर द्वारा डिजाइन किए गए इस फव्वारे के चारों तरफ अलग-अलग नस्लों के 27 आदमकद लोहे के कुत्ते अपनी मुंडियाँ उठाए खड़े हैं —और सब के सब एकटक शीर्ष पर रखी एक सुनहरी हड्डी (Golden Bone) को निहार रहे हैं। इन सभी कुत्तों के मुँह से पानी की धार निकलकर बीच के कुंड में गिरती है, मानो सब के सब एक साथ उस हड्डी पर लार टपका रहे हों।

इस महफिल में असली ट्विस्ट लाती है एक अकेली, चतुर बिल्ली, जो दूर से इन सब कुत्तों की दीवानगी को बेरुखी से देख रही है और उसके पास में ही दो छोटी चिड़ियाँ बैठी हैं। 2017 में जब इसे खोला गया, तो यह महज़ एक फव्वारा नहीं रहा बल्कि शहर के कुत्तों और उनके मालिकों का सबसे पसंदीदा अड्डा बन गया, जहाँ असली कुत्ते अक्सर इन लोहे के कुत्तों को असली समझकर उनके इर्द-गिर्द भौंकते और सूँघते नज़र आते हैं।
बर्कज़ी पार्क डॉग फाउंटेन के पीछे मुख्य सोच इसके लैंडस्केप आर्किटेक्ट क्लॉड कॉर्मियर (Claude Cormier) का यह दर्शन था कि "शहरी सार्वजनिक स्थान गंभीर और औपचारिक होने के बजाय लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले होने चाहिए।"
इस अनूठे फाउंटेन को तैयार करने के पीछे की मानसिकता:
- समुदाय की असली ज़रूरत की पहचान: पार्क के पुनर्निर्माण से पहले यह देखा गया कि डाउनटाउन टोरंटो के इस इलाके में रहने वाले अधिकांश लोगों के पास पालतू कुत्ते हैं और वे उन्हें टहलाने इसी पार्क में लाते हैं। पारंपरिक ऐतिहासिक स्मारकों के बजाय उन कुत्तों और उनके मालिकों के रिश्ते को ही इस सार्वजनिक स्थल का मुख्य नायक बना दिया गया।
- पारंपरिक औपचारिकता का मज़ाक (Subversive Humor): 19वीं सदी के विक्टोरियन शैली के फव्वारे आमतौर पर राजाओं, सेनापतियों या पौराणिक देवदूतों को समर्पित होते थे। कॉर्मियर ने जानबूझकर उसी भव्य, शास्त्रीय दो-मंज़िला डिजाइन को अपनाया, लेकिन इंसानी हस्तियों की जगह 27 अलग-अलग नस्लों के कुत्तों को शीर्ष पर रखी एक 'सुनहरी हड्डी' की पूजा करते हुए बिठा दिया।
- विविधता और समावेशिता (Inclusivity): पार्क में पग और पूडल से लेकर लैब्राडोर और जर्मन शेफर्ड तक लगभग हर लोकप्रिय नस्ल को शामिल किया गया ताकि हर कुत्ता मालिक अपने पालतू जानवर से जुड़ाव महसूस कर सके। साथ ही, फाउंटेन के निचले हिस्से में ज़मीनी स्तर पर पानी के कुंड बनाए गए ताकि असली कुत्ते भी वहाँ पानी पी सकें। यह स्मारक इस बात की गवाही है कि शहर की वास्तुकला सिर्फ कंक्रीट और नियमों की बंदिश नहीं, बल्कि जीवन की हल्की-फुल्की खुशियों का जश्न भी हो सकती है।
Atul Arora
अमेरिका में बसे अतुल अरोड़ा ट्रैवल ब्लॉगर हैं। रोजनामचा नाम का इनका एक यू-ट्यूब चैनल है जिसमें वो खालिस कनपुरिया अंदाज में Humour शो करते हैं।