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अगर अमेर‍िका ने लॉरेंस ब‍िश्‍नोई को सौंपने को कहा तो भारत क्‍या कर सकता है?

TCN Desk TCN Desk | 14 Jul, 2026 · 5 min read
अगर अमेर‍िका ने लॉरेंस ब‍िश्‍नोई को सौंपने को कहा तो भारत क्‍या कर सकता है?

अमेरिका ने भारत की जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के गैंग समेत तीन कथित संगठित आपराधिक समूहों के खिलाफ़ बड़ा एक्शन लिया है।

अमेरिका ने भारत की जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के गैंग समेत तीन कथित संगठित आपराधिक समूहों के खिलाफ़ बड़ा एक्शन लिया है। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इन समूहों से जुड़े 24 संदिग्धों की गिरफ्तारी का एलान किया है। यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, नशा तस्करी, जबरन वसूली, सुपारी देकर हत्या और खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या समेत कई मामलों की जांच के तहत की गई है।

अमेरिका के सरकारी वकीलों के मुताबिक़, बिश्नोई गैंग समेत भारत आधारित तीन आपराधिक गिरोहों से कथित संबंध रखने वाले इन संदिग्धों को अमेरिका, कनाडा और यूरोप से गिरफ्तार किया गया है। इसकी जानकारी कैलिफ़ोर्निया के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने दी है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अमेरिका भारत की जेल में बंद किसी आरोपी का प्रत्यर्पण चाहता है, तो क्या भारत उसे सौंप सकता है? दूसरा सवाल यह है कि जब हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कनाडा में हुई, तो अमेरिकी अदालतें इस मामले में कैसे कार्रवाई कर रही हैं? और क्या इस पूरे घटनाक्रम का भारत-अमेरिका संबंधों पर कोई असर पड़ सकता है? इस रिपोर्ट में इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की गई है।

अमेरिका की ओर से सार्वजनिक की गई तीन चार्जशीटों में कुल 37 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें दो ऐसे आरोपी भी हैं, जिन पर भारत की जेल में बंद रहते हुए भी अपने वैश्विक आपराधिक नेटवर्क का संचालन करने का आरोप है। इनमें पंजाब से जुड़े लॉरेंस बिश्नोई और सतिंदरजीत सिंह उर्फ़ गोल्डी बरार के नाम प्रमुख हैं।

आरोप है कि दोनों ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश दिया था। लॉरेंस बिश्नोई फिलहाल गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती जेल में बंद हैं।

25 जून को दाखिल सात बिंदुओं वाले फ़ेडरल ग्रैंड ज्यूरी के आरोप पत्र में 17 लोगों पर अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों में सुपारी देकर हत्या, नशा तस्करी, अपहरण, फिरौती, हथियारों की तस्करी और अन्य संगठित अपराधों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी आरोप पत्रों में लॉरेंस बिश्नोई के अलावा जग्गू भगवानपुरिया का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। क्या भारत लॉरेंस बिश्नोई को अमेरिका को सौंप सकता है? इस सवाल का सीधा जवाब है—हां, लेकिन इसकी प्रक्रिया लंबी और जटिल है।

भारत और अमेरिका के बीच 1997 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी। भारतीय दूतावास की वेबसाइट के मुताबिक़, किसी व्यक्ति के प्रत्यर्पण के लिए यह ज़रूरी है कि जिस अपराध का आरोप उस पर है, वह भारत और अमेरिका दोनों देशों के क़ानूनों के तहत अपराध हो और उसमें कम से कम एक साल की सज़ा का प्रावधान हो। प्रत्यर्पण की मांग औपचारिक रूप से कूटनीतिक माध्यमों से भेजी जाती है। इसके साथ चार्जशीट, गिरफ्तारी वारंट, अपराध का पूरा विवरण, संबंधित क़ानून, लागू धाराएं, संभावित सज़ा और ऐसे सबूत पेश किए जाते हैं जो मुक़दमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार साबित करें। यदि आरोपी पहले ही दोषी ठहराया जा चुका हो, तो अदालत के फैसले की प्रति या किसी न्यायिक अधिकारी का प्रमाण भी देना होता है।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, आपराधिक मामलों के जानकार एडवोकेट निखिल सराफ़ ने कहा,

भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि मौजूद है। अमेरिका औपचारिक अनुरोध भेज सकता है, जिसके बाद भारतीय अदालतें और सरकार क़ानून के अनुसार फैसला करती हैं। वह आगे कहते हैं, "यह प्रक्रिया आम तौर पर लंबी होती है। इसकी गति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार इस मामले को किस प्राथमिकता से आगे बढ़ाती है। अगर सरकार चाहे तो प्रक्रिया तेज़ हो सकती है, लेकिन अगर ऐसा नहीं चाहती तो मामला वर्षों तक चल सकता है।

अमेरिका के संघीय अभियोजकों और फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (एफ़बीआई) ने 'ऑपरेशन हार्डबॉल' के तहत तीन आरोप पत्र दाखिल किए हैं। यह अमेरिका, कनाडा और यूरोप की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क पर शिकंजा कसना है।

इन आरोप पत्रों में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का मामला भी शामिल है। निज्जर की 18 जून 2023 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार ने इस हत्या का आदेश दिया था।

अमेरिकी वकीलों का यह भी आरोप है कि बिश्नोई गैंग ने धार्मिक और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाया, समुदाय के लोगों से फिरौती वसूलने की कोशिश की और कैलिफ़ोर्निया में भी जबरन वसूली की घटनाओं में शामिल रहा।

यहीं से यह सवाल उठता है कि जब हत्या कनाडा में हुई, तो अमेरिकी अदालतें इस मामले की सुनवाई कैसे कर सकती हैं?

अमेरिकी आरोप पत्र के अनुसार, यह कथित आपराधिक नेटवर्क अमेरिका में भी जबरन वसूली, नशा तस्करी और अन्य संगठित अपराधों में सक्रिय था। अभियोजन पक्ष का दावा है कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या इसी व्यापक आपराधिक साज़िश का हिस्सा थी। इसी आधार पर अमेरिकी अदालतें इसे अपने मुक़दमे का हिस्सा मान सकती हैं। अमेरिकी क़ानून के तहत यह ज़रूरी नहीं है कि हर अपराध अमेरिका की सीमा के भीतर ही हुआ हो। यदि किसी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह की गतिविधियों का महत्वपूर्ण संबंध अमेरिका से जुड़ता है, तो कुछ परिस्थितियों में विदेश में हुए अपराध भी अमेरिकी अदालतों के अधिकार क्षेत्र में आ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि लॉस एंजिल्स में जबरन वसूली की गई हो या अमेरिका-कनाडा सीमा से जुड़े नशा तस्करी नेटवर्क का हिस्सा कोई हत्या हो, तो अमेरिकी अभियोजक उस घटना को भी अपने मुक़दमे में शामिल कर सकते हैं।