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रूस से तेल खरीदा तो भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका, सीनेट में बिल पेश

TCN Desk TCN Desk | 15 Jul, 2026 · 4 min read
रूस से तेल खरीदा तो भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका, सीनेट में बिल पेश

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेट में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़ा एक संशोधित बिल पेश किया गया है। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। बिल के अनुसार,

भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह प्रस्ताव रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के समर्थन से लाया गया है। इसका उद्देश्य रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर की जा सके।

बिल में रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक, सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं, वित्तीय संस्थानों, रक्षा उद्योग, बड़े कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है। शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ का प्रावधान था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया।

अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए टैरिफ लगाएगा क्योंकि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी आय बढ़ा रहा है।

भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो उसके कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से अधिक बैरल रूस से आया। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम भी इस बिल के दायरे में हैं। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और धीरे-धीरे अपनी निर्भरता घटा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। इसी आधार पर 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से राहत देने का प्रावधान रखा गया है। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना केवल वे देश हैं जो अब भी रूस के ऊर्जा कारोबार को सबसे बड़ा आर्थिक सहारा दे रहे हैं।

रूस-विरोधी इस बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला है। अमेरिकी राजनीति में इसे 'बाइपार्टिसन बिल' कहा जाता है, यानी ऐसा प्रस्ताव जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सहमत हों। आमतौर पर अमेरिका में बड़े विधेयक राजनीतिक मतभेदों की वजह से अटक जाते हैं, लेकिन जब दोनों दल किसी बिल का समर्थन करते हैं तो उसके कांग्रेस से पारित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

हालांकि, कानून बनने से पहले इस बिल को सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) दोनों से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर ही यह कानून बनेगा। संशोधित बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को यह अधिकार भी देने का प्रस्ताव है कि यदि उन्हें राष्ट्रीय हित में जरूरत लगे तो वे इन प्रतिबंधों या टैरिफ में छूट दे सकेंगे।

यह बिल अप्रैल 2025 में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेश किया था। 11 जुलाई को लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया। ट्रम्प ने कहा कि इस बिल को आगे बढ़ाना ग्राहम की प्राथमिकता थी और अब इसे उनकी याद में आगे बढ़ाया जा रहा है। अब तक 26 सीनेटर इस प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं और आगे समर्थन बढ़ने की उम्मीद है।

ट्रम्प ने पहले 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का इस्तेमाल करते हुए कई देशों पर टैरिफ लगाए थे। इसके तहत राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर राष्ट्रपति सीधे टैरिफ लागू कर सकते थे। लेकिन 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। अदालत ने कहा कि यह अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है। इसी वजह से अब नया बिल लाया गया है, ताकि राष्ट्रपति को कानूनी रूप से यह शक्ति मिल सके।

100% टैरिफ से भारत पर तीन बड़े असर

1. भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे:

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां भारत हर साल करीब 6.5 लाख करोड़ रुपये का सामान भेजता है। 100% टैरिफ लगने पर भारतीय उत्पाद अमेरिका में दोगुने महंगे हो सकते हैं, जिससे उनकी बिक्री पर बड़ा असर पड़ेगा।

2. रूसी तेल से होने वाली बचत बेअसर हो सकती है:

भारत रूसी तेल खरीदकर हर साल करीब 60,000 करोड़ रुपये की बचत करता है। लेकिन अगर अमेरिकी बाजार में निर्यात प्रभावित हुआ, तो उसका नुकसान इस बचत से कई गुना ज्यादा हो सकता है।

3. नौकरियों और रुपये पर दबाव:

100% टैरिफ लगने से अमेरिका को होने वाला भारत का करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये का कपड़ा, हीरा और दवा निर्यात प्रभावित हो सकता है। इससे इन क्षेत्रों में काम करने वाले 15 से 20 लाख लोगों की नौकरियों पर असर पड़ सकता है। निर्यात घटने से देश में डॉलर की आमद कम होगी, जिससे रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ सकता है।