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होर्मुज़ से गुज़रने वाले जहाज़ों पर क्या टोल लगा सकते हैं ट्रंप, क्या कहता है क़ानून?

TCN Desk TCN Desk | 14 Jul, 2026 · 3 min read
होर्मुज़ से गुज़रने वाले जहाज़ों पर क्या टोल लगा सकते हैं ट्रंप, क्या कहता है क़ानून?

होर्मुज़ स्ट्रेट के नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है

होर्मुज़ स्ट्रेट लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का प्रमुख केंद्र रहा है। अब इस अहम समुद्री मार्ग के नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका ही होर्मुज़ स्ट्रेट का "गार्डियन" (संरक्षक) है और इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बदले वह 20 प्रतिशत टोल वसूलेगा।

इसके जवाब में ईरान के शीर्ष सैन्य मुख्यालय ख़ात्म अल-अंबिया ने कहा कि वह अमेरिका को होर्मुज़ स्ट्रेट के प्रबंधन में किसी भी तरह का दखल नहीं देने देगा।

ट्रंप के बयान पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने एक्स पर तंज़ करते हुए लिखा, "अमेरिकी राष्ट्रपति बिल्कुल सही हैं। जो भी होर्मुज़ स्ट्रेट से कार्गो जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करता है, उसे इस सेवा का भुगतान मिलना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि ईरान हमेशा से होर्मुज़ स्ट्रेट का संरक्षक रहा है और हमेशा रहेगा।

इसी बीच, अमेरिका के हालिया हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया से कहा कि अमेरिका खाड़ी देशों को सुरक्षा देता रहेगा, लेकिन अब इसके बदले उन्हें भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूँ कि हमें भुगतान किया जाए, क्योंकि हम दुनिया के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक की सुरक्षा कर रहे हैं। इस पर हमारा पैसा खर्च हो रहा है।" ट्रंप ने आगे कहा, "सऊदी अरब, यूएई, क़तर, बहरीन, कुवैत और अन्य जिन देशों की हम सुरक्षा कर रहे हैं, उनसे हमें भुगतान मिलेगा। हमें इन देशों की ज़रूरत नहीं है, बल्कि उन्हें हमारी ज़रूरत है। हमारे पास वेनेज़ुएला को मिलाकर पर्याप्त तेल है।"

रॉयटर्स के अनुसार, दुनिया भर में समुद्री आवागमन की निगरानी करने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसी इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइज़ेशन (IMO) के एक प्रवक्ता ने कहा कि

अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाज़ों पर अनिवार्य शुल्क लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है। आईएमओ के प्रवक्ता ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवागमन के लिए इस्तेमाल होने वाले स्ट्रेट्स से गुजरने पर शुल्क लगाए जाने का हम सख्त विरोध करते हैं।"

शिपिंग उद्योग के अधिकारियों ने भी इस प्रस्ताव पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। एक अधिकारी, जिन्होंने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की, ने ट्रंप की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा, "इससे जहाज़ों की आवाजाही आखिर कैसे अधिक सुरक्षित होगी और इसकी क्या गारंटी है?" फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप की घोषणा को व्यावहारिक रूप से कैसे लागू किया जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार, किसी भी देश को अपनी तटरेखा से 12 समुद्री मील (करीब 22 किलोमीटर) तक के क्षेत्रीय समुद्री जल पर अधिकार प्राप्त होता है। होर्मुज़ स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा और उसकी शिपिंग लेन पूरी तरह ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल के भीतर आती है। इसलिए इस क्षेत्र पर दोनों देशों का अधिकार माना जाता है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के अनुच्छेद 38 के तहत होर्मुज़ स्ट्रेट समेत दुनिया के 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्यों से सभी जहाज़ों को बिना किसी बाधा के "ट्रांज़िट पैसेज" का अधिकार प्राप्त है।