अंकिता भंडारी को मिले इंसाफ: राहुल-प्रियंका ने थामा माता-पिता का हाथ
अंकिता के पिता ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की है कि जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रोक दी जाए।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को इंडिया गेट पर उत्तराखंड की अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ धरने में शामिल हुए। उनके इस कदम से 2022 में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट की हत्या का मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। परिवार की मांग है कि वरिष्ठ भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर तब तक रोक लगाई जाए, जब तक मामले की चल रही सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती।
राहुल गांधी बुधवार को इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी के माता-पिता के धरने में शामिल हुए। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना भी मौजूद थीं।
राहुल गांधी ने कहा कि,
चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक ‘VIP’ आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम ज़रूर मिला। जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाज़ा जाता है - उस महिला-विरोधी BJP से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती। आज, अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार ले कर, अपने घर से मीलों दूर, India Gate पर बैठे हैं। मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं - उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी।
यह धरना उत्तराखंड के पूर्व बीजेपी प्रभारी दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के विरोध में किया जा रहा है। दुष्यंत गौतम पर आरोप है कि 2022 में अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में जिस ‘वीआईपी’ का जिक्र हुआ था, उनका उससे संबंध है। दुष्यंत गौतम पर न सिर्फ हत्या बल्कि बलात्कार का भी आरोप है।
राहुल गांधी के साथ उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे।
योगिता भयाना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर धरने की एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ नजर आ रही हैं।
उन्होंने पोस्ट में लिखा,
“हम अभी भी इंडिया गेट पर धरने पर बैठे हैं। परिवार की मांग है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए!”
अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की है कि जांच पूरी होने तक गौतम की नियुक्ति रोक दी जाए। परिवार का आरोप है कि अंकिता की हत्या की परिस्थितियों में एक अज्ञात वीआईपी की भूमिका थी और उसने अपने आरोपों में भाजपा नेता दुष्यंत गौतम का नाम भी लिया है। हालांकि, गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
यह धरना ऐसे मामले में एक नए घटनाक्रम के रूप में सामने आया है, जिसमें तीन लोगों को अंकिता की हत्या के लिए पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। ताजा विवाद इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या जांच के दौरान उस वीआईपी की भूमिका की पर्याप्त पड़ताल की गई, जिस पर अंकिता के साथ यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया था।
मंगलवार को उत्तराखंड कांग्रेस ने भी गौतम की नियुक्ति के खिलाफ प्रदर्शन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पीड़ित परिवार की जवाबदेही तय करने की मांग को नजरअंदाज किया है। उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि,
इस नियुक्ति से परिवार की पीड़ा और बढ़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और उत्तराखंड की भाजपा सरकार वीआईपी की भूमिका की जांच कराने की परिवार की मांग पर कार्रवाई करने में विफल रही हैं।
हालांकि, भाजपा की उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने मामले में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। इनमें आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी, विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन, प्रभावी अभियोजन और पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देना शामिल है।
अंकिता भंडारी ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। नौकरी शुरू करने के महज 20 दिन बाद वह लापता हो गई थीं। यह रिजॉर्ट पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य द्वारा संचालित किया जाता था। लापता होने के छह दिन बाद अंकिता का शव एक नहर से बरामद हुआ था।
उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच में सामने आया था कि अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले मेहमानों को यौन सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसका उन्होंने विरोध किया था।
मई 2025 में पौड़ी गढ़वाल की एक अदालत ने पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों, अंकित गुप्ता तथा सौरभ भास्कर को दोषी ठहराते हुए तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले में तीनों की हत्या के मामले में आपराधिक जिम्मेदारी स्थापित हुई, लेकिन कथित वीआईपी से जुड़े अलग आरोपों का निपटारा नहीं हुआ।
मामला सामने आने के बाद से ही वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने ऐसे संदेशों का हवाला दिया था, जिनसे संकेत मिलता था कि अंकिता रिजॉर्ट में उनसे की जा रही “अतिरिक्त सेवाओं” की मांग को लेकर परेशान थीं और वहां से नौकरी छोड़कर जाना चाहती थीं।
परिवार लगातार मांग करता रहा है कि इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि क्या दोषी ठहराए गए तीन लोगों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भी इस मामले में शामिल था। दिसंबर 2025 में यह विवाद उस समय और तेज हो गया, जब पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करने वाली उर्मिला सनावर ने कुछ वीडियो और एक ऑडियो क्लिप जारी की। सनावर ने आरोप लगाया कि मामले में “गट्टू” नाम से पहचाना जाने वाला एक वरिष्ठ नेता वीआईपी था।
रिकॉर्डिंग में राठौर पर गौतम को इन आरोपों से जोड़ने की बात कहने का आरोप लगा। हालांकि, बाद में राठौर ने दावा किया कि ऑडियो क्लिप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से बनाई गई थी। गौतम ने भी अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया।
इससे पहले पुलिस की एसआईटी कह चुकी थी कि उसे हत्या में किसी प्रभावशाली नेता की संलिप्तता स्थापित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। इन आरोपों के कारण अलग से कानूनी कार्यवाही भी शुरू हुई है। जनवरी 2026 में गौतम ने सनावर, राठौर, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य लोगों के खिलाफ मानहानि याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने उन्हें हत्या के मामले से गलत तरीके से जोड़ा और उनकी छवि खराब की।
इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को मामले से गौतम को जोड़ने वाली सोशल मीडिया पोस्ट 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया। जून 2026 में देहरादून पुलिस ने गौतम को मामले में झूठा फंसाने की साजिश रचने के आरोपों के सिलसिले में राठौर को गिरफ्तार किया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अंकिता के परिवार की मांग है कि कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। परिवार का कहना है कि जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक मामले से जुड़े संदेह पूरी तरह दूर नहीं होंगे।
