पुलिसिया दमन के खिलाफ राहुल गांधी की हुंकार, बोले- जिम्मेदारों को सजा दिलवाएंगे
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के साथ कई प्रदर्शनकारी छात्र और कार्यकर्ता मौजूद थे।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के दौरान पुलिस मारपीट का मुद्दा उठाया। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के आधिकारिक आवास, 10 जनपथ पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल के साथ कई प्रदर्शनकारी मौजूद थे। इन लोगों ने हिरासत के दौरान पुलिस पर मारपीट, धमकाने और फोन छीनने के आरोप लगाए और अपनी आपबीती सुनाई।
राहुल गांधी ने कहा कि,
अमित शाह जी- ध्यान से देख लीजिए, ये हिंदुस्तान है । यहां न कोई हिंदू है, न मुस्लिम। न पुरुष है, न महिला। न कोई जाति है। यहां सिर्फ एक आवाज है, एक प्रोटेस्ट है- ये हिंदुस्तान है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह, आप दोनों इस आवाज के सामने खड़े मत होइए, क्योंकि इसके सामने कोई खड़ा नहीं हो सकता।मैं सभी युवाओं और छात्रों से कह रहा हूं कि आप वीडियो एविडेंस रखिए।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि ,
जब ये मामला ख़त्म हो जाएगा, तब हम इन सबूतों का इस्तेमाल करेंगे और ऊपर से लेकर नीचे तक सबको सजा दिलवाएंगे। कोई बचेगा नहीं।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि पुलिस कार्रवाई के वीडियो रिकॉर्ड करें और उन्हें भेजें। राहुल ने कहा कि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराएंगे, तो उन्होंने कहा कि इसका फैसला उन पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने रमित वर्मा नाम के एक बांसुरी कलाकार का परिचय कराया। रमित ने बांसुरी पर ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ की धुन बजाई। इसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘डंडे’ की कार्रवाई के प्रतीकात्मक जवाब के तौर पर पेश किया गया।
रमित ने आरोप लगाया कि उन्हें हिरासत में लेकर सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने पीटा।
रमित का आरोप था कि,
बजरंग दल और आरएसएस से जुड़े लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को डंडों और पत्थरों से धमकाया तथा पुलिस से उन्हें हिरासत में लेने को कहा। उन्होंने दावा किया कि उनके पास धमकी दिए जाने का वीडियो है।
रमित ने आरोप लगाते कहा कि,
11 अक्टूबर को RSS-बजरंग दल के गुंडों के कहने पर पुलिस ने मुझे हिरासत में लिया था। ये वही गुंडे थे, जो शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे प्रोटेस्टर्स को धमका रहे थे। इन गुंडों के पास डंडे और पत्थर थे। डिटेंशन बस में पुलिस ने बहुत से लोगों के फोन छीन लिए और उससे डेटा डिलीट कर दिया। कईयों को तो फोन वापस भी नहीं किए गए। बस में मेरे साथ कुछ फीमेल प्रोटेस्टर्स भी थीं, लेकिन वहां कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि,
प्रदर्शनकारियों के फोन छीनकर फॉर्मेट कर दिए गए। उनके मुताबिक, वहां कम से कम 15 महिलाएं मौजूद थीं। समर ने 20 जुलाई की एक घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस दिन भी आरएएफ के एक जवान ने उन्हें डंडा मारा था।
राहुल गांधी ने एनएसयूआई की एक महिला कार्यकर्ता का भी परिचय कराया। उन्होंने उसे ‘शेरनी’ बताते हुए कहा कि मारपीट के बावजूद उसका हौसला नहीं टूटा।
कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान प्रदर्शनकारियों को बुरी तरह पीटा गया। उसने महिला कांस्टेबल चंचल यादव पर उसे घसीटने और कनॉट प्लेस थाने ले जाते समय मारपीट करने का आरोप लगाया।
एनएसयूआई कार्यकर्ता के मुताबिक, प्रदर्शन जारी रखने के लिए वे पुलिस की बस रोकने की कोशिश कर रहे थे। उसने कहा कि प्रदर्शनकारी बस से उतरकर उसके नीचे बैठ जाते थे, ताकि उनका विरोध जारी रह सके। उसने आरोप लगाया कि,
बस के भीतर महिला पुलिसकर्मी ने उसकी गर्दन पकड़कर पीछे धकेला, जिससे वह सीट पर गिर गई। इसके बाद उसके चेहरे और कान के पास नाखूनों से खरोंचा गया। कार्यकर्ता के अनुसार, जब उसने थोड़ा प्रतिरोध किया, तो उसे जोरदार थप्पड़ मारा गया।
उसने दावा किया कि,
उठने की कोशिश करने पर उसके बाल पकड़कर बार-बार खींचे गए। अंततः वह नीचे गिर गई, लेकिन मारपीट जारी रही। उसके मुताबिक, खींचतान के दौरान उसकी बाली कान में धंस गई। कान नीला पड़ गया और चोट के कारण उसका आकार भी बदल गया। उसने बताया कि उसी शाम अस्पताल में डॉक्टरों को बाली निकालनी पड़ी।
एनएसयूआई कार्यकर्ता ने पुलिसकर्मी पर धमकी देने का भी आरोप लगाया। उसके मुताबिक, उससे कहा गया कि वह बार-बार प्रदर्शन में न आए और पुलिस उसके राजनीतिक नेतृत्व के बारे में जानती है। उसने दावा किया कि वहां मौजूद पुरुष पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप नहीं किया।
एनएसयूआई कार्यकर्ता ने बताया कि कनॉट प्लेस थाने के पास केरल की उसकी सहयोगी तीरा ने उसे बचाने की कोशिश की। आरोप है कि तीरा को भी पीटा गया, उसके प्राइवेट पार्ट पर वार किया गया और सड़क पर घसीटा गया।
उसके मुताबिक, दोनों को थाने ले जाया गया। उसने दावा किया कि उसके खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107 के तहत कार्रवाई की गई। थाने के कमरा नंबर 107 में सादे कपड़ों में मौजूद कई महिलाओं ने उसे पीटा, जिससे पैरों पर नीले निशान पड़ गए। उसने आरोप लगाया कि महिलाओं ने उसके नेता के बारे में पूछते हुए धमकियां दीं और कमरे में बंद करके मारपीट की।
