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लेबनान की सेना ने इज़राइल के साथ सैन्य तालमेल से किया इंकार

Ashok Kumar Pandey Ashok Kumar Pandey | 13 Jul, 2026 · 3 min read
लेबनान की सेना ने इज़राइल के साथ सैन्य तालमेल से किया इंकार

अमरीकी पहल पर इज़राइल और लेबनॉन सरकार के बीच हुई डील पड़ी खतरे में

हाल ही में अमेरिका की मध्यस्थता से लेबनान और इज़राइल के बीच हुए सुरक्षा समझौते के बावजूद, लेबनान की सेना (Lebanese Armed Forces-LAF) ने इज़राइल के साथ प्रत्यक्ष सैन्य समन्वय स्थापित करने से इंकार कर दिया है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब अमेरिका दोनों देशों के बीच स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू कराने की कोशिश कर रहा है। अमरीका चाहता था कि लेबनॉन की सेना इज़रायली सेना के साथ मिलकर हिज़्बुल्लाह को खत्म करने में सहयोग करे।

समझौते की बुनियाद

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रस्ताव में दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में लेबनानी सेना की तैनाती बढ़ाने और इज़राइली सेना की चरणबद्ध वापसी का सुझाव दिया गया था। इसके तहत एक संयुक्त सैन्य समन्वय तंत्र की स्थापना की योजना बनाई गई। लेकिन लेबनानी सेना ने स्पष्ट कर दिया कि वह इज़राइल के साथ किसी भी प्रकार का सीधा संपर्क नहीं रखेगी। उनकी प्राथमिकता केवल अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा तंत्र के माध्यम से काम करना है।

राजनीतिक विरोधाभास

लेबनान के भीतर इस समझौते को लेकर पहले से ही राजनीतिक मतभेद मौजूद हैं। हिज़्बुल्लाह और उसके सहयोगी दल इसे लेबनान की संप्रभुता के विरुद्ध मानते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह व्यवस्था इज़राइल के हितों को प्राथमिकता देती है और देश पर बाहरी दबाव बढ़ाती है। दूसरी ओर, अमेरिका का तर्क है कि यदि दक्षिणी लेबनान में केवल सरकारी सेना की मौजूदगी सुनिश्चित होती है, तो इससे सीमा पर स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।

समझौते का कार्यान्वयन

विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते का सबसे चुनौतीपूर्ण पहलू इसका क्रियान्वयन है। लेबनानी सेना को देश के भीतर राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी कार्रवाई को इज़राइल के साथ प्रत्यक्ष सहयोग के रूप में न देखा जाए। इसी कारण से सेना ने किसी भी संयुक्त संचालन या सीधे सैन्य समन्वय से दूरी बनाए रखने का संकेत दिया है।

इज़राइल की स्थिति

इस बीच, इज़राइल ने यह स्पष्ट किया है कि उसकी पूर्ण वापसी तब ही संभव होगी जब दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह का सैन्य ढांचा समाप्त हो जाए और सुरक्षा की गारंटी मिल सके। वहीं, लेबनान के कई राजनीतिक दल पहले इज़राइली वापसी की मांग कर रहे हैं, उसके बाद अन्य सुरक्षा उपायों पर विचार किया जाएगा। इस मतभेद के कारण समझौते के लागू होने की प्रक्रिया अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।


असल में, जहाँ लेबनॉन सरकार अमरीकी दबाव में पूरी तरह समर्पण करती हुई दिखाई दे रही है, वहीं लेबनॉन के भीतर एक बड़ी आबादी इसके खिलाफ है। डर है कि कहीं एक बार फिर लेबनॉन में गृहयुद्ध जैसे हालात न बन जाएँ।

Ashok Kumar Pandey

Ashok Kumar Pandey

Ashok Kumar Pandey is the Managing Editor of The Credible News.