जंतर-मंतर पर अब नहीं कर सकेंगे प्रदर्शन, मोदी सरकार ने किया डी-नोटिफाई, तीन नए जगह तय
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दिल्ली का रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड प्रदर्शन स्थल बनाए गए हैं।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे जंतर-मंतर का निर्धारित प्रदर्शन स्थल का दर्जा समाप्त कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस की ओर से सोमवार को जारी एक सर्कुलर में यह जानकारी दी गई। सर्कुलर में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन नए स्थानों की सूची भी दी गई है। दिल्ली का रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड प्रदर्शन स्थल बनाए गए हैं।
दिल्ली पुलिस के सर्कुलर के मुताबिक,
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध और प्रदर्शन आयोजित करने के अधिकार के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थानों की पहचान करने को एक समिति गठित की थी। समिति को मौजूदा निर्धारित प्रदर्शन स्थल की जगह दूसरे उचित स्थलों का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। उसकी सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित कर दिया गया है।
इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों की रोक और वैकल्पिक स्थल निर्धारित नहीं किए जाने का मुद्दा उठाने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले को मंगलवार को सुना जाएगा। याचिका में राजधानी में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लिए जगह उपलब्ध होने का सवाल उठाया गया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के सामने एक वकील ने मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। वकील ने दलील दी कि प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल निर्धारित नहीं किए जाने के कारण शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर अंकुश लग रहा है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
पीठ ने कहा कि,
सुप्रीम कोर्ट पहले से ही प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर विचार कर रहा है और उसने केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा है। अदालत के मुताबिक, जब शीर्ष अदालत इस विषय पर सुनवाई कर रही है, तो हाई कोर्ट को यह देखना होगा कि वह उसी मुद्दे पर किस सीमा तक दोबारा विचार कर सकता है।
पीठ ने कहा,
“मंगलवार को सुनेंगे। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले पर विचार कर रहा है। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को हलफनामे दाखिल करने के लिए भी कहा है। जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले को देख रहा है, तो हमें यह देखना होगा कि हम किस हद तक इस पर फिर विचार कर सकते हैं। इसलिए इसे मंगलवार को लेते हैं।”
तत्काल सुनवाई की मांग कर रहे वकील ने अदालत से कहा कि,
पाबंदियों ने बोलने और अपनी बात रखने के अधिकार को काफी प्रभावित किया है। उन्होंने दलील दी कि स्वतंत्र अभिव्यक्ति को बड़े स्तर पर दबाया गया है और इसका व्यापक असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, कानूनी तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए उपयुक्त जगह का उपलब्ध होना जरूरी है।

वकील ने कहा,
“आज जंतर-मंतर भी बंद है। प्रशासन ने कोई दूसरी जगह निर्धारित नहीं की है, जहां कानून के अनुसार प्रदर्शन किया जा सके। आज शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दबाया जा रहा है। यह एक काला दिन होने जा रहा है। हमने 1975 में ऐसी स्थिति का सामना किया था।”
हाई कोर्ट मंगलवार को एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई करेगा। इसमें आरोप लगाया गया है कि सप्ताहांत में हुए प्रदर्शन के दौरान बाहरी लोग वहां घुस आए और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को परेशान किया। अदालत ने इस याचिका को भी अगले दिन सुनवाई के लिए लेने पर सहमति जताई। इस तरह मंगलवार को राजधानी में विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह से वामपंथी छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और विपक्षी नेताओं ने सेंट्रल और दक्षिण दिल्ली के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इन प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस ने कड़ी पाबंदियां लगाईं और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। प्रदर्शन में पहुंचने वाले सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें छात्र, विपक्षी नेता और हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के वकील भी शामिल थे। प्रतिबंधों और हिरासत की कार्रवाई को लेकर अदालतों में सवाल उठाए गए हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर 10 और 11 अक्टूबर को सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे थे। अब जंतर-मंतर का दर्जा समाप्त किए जाने और नए स्थलों की घोषणा के बीच, प्रदर्शन संबंधी पाबंदियों पर मंगलवार की सुनवाई अहम होगी।
