Politics

देश में क्या 'जनरल डायर' की इमरजेंसी का गुजरात मॉडल लागू है?

Pro. Hemantkumar Shah Pro. Hemantkumar Shah | 1h ago · 4 min read
देश में क्या 'जनरल डायर' की इमरजेंसी का गुजरात मॉडल लागू है?

पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल ने अमित शाह को उस समय जनरल डायर कहा था।

जंतर मंतर पर हुए पुलिस जुल्म और दमन का रिश्ता क्या गुजरात मॉडल से है? आइए, हम जरा गुजरात के हालिया और थोड़े पुराने अतीत की ओर नजर डालें और देश की मौजूदा स्थिति के साथ उसके ताने-बाने को जोड़ने का प्रयास करें।

गुजरात के पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने 2015 के पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज और गोलीबारी के संबंध में गत 11 जुलाई 2026 को एक जनसभा में एक बड़ी बात कही थी।

PTI

नितिन पटेल ने ऐसा कहा था कि,

अहमदाबाद में जीएमडीसी (GMDC) मैदान पर 25 अगस्त 2015 को हजारों लोगों की हुई शांतिपूर्ण सभा के बाद पाटीदारों पर हुए लाठीचार्ज और गोलीबारी का आदेश किसने दिया था, यह आज भी एक रहस्य है।

नितिन पटेल ने यह दावा किया कि,

इस लाठीचार्ज के आदेश के बारे में तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल भी अनभिज्ञ थीं, जो आनंदीबेन पटेल अभी उत्तर प्रदेश की राज्यपाल हैं। इस घटना के पीछे किसी अदृश्य शक्ति या किसी बड़े षड्यंत्र के होने की आशंका भी नितिन पटेल ने व्यक्त की थी।
PTI


इस गोलीबारी में 14 लोग मारे गए थे, 27 नागरिक घायल हुए थे, 203 पुलिसकर्मी घायल हुए थे और 650 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

नितिन पटेल के इस बयान का अर्थ यह होता है कि गुजरात सरकार के बाहर से कोई पुलिस को लाठीचार्ज करने और गोलीबारी करने का आदेश दे रहा था। कौन हो सकता है वह व्यक्ति? पता नहीं।

PTI

अब एक दूसरा मुद्दा महत्वपूर्ण है कि पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल ने अमित शाह को उस समय जनरल डायर कहा था। तो क्या अमित शाह उस लाठीचार्ज और गोलीबारी के लिए जिम्मेदार थे?

Social Media

यह निश्चित रूप से कहा नहीं जा सकता क्योंकि उस समय अमित शाह कोई सरकारी मंत्री थे ही नहीं। तो फिर हार्दिक पटेल ने अमित शाह को जनरल डायर क्यों कहा, यह एक बड़ा सवाल है। दूसरी तरफ, नितिन पटेल यह कहते हैं कि उनकी सरकार में से किसने लाठीचार्ज और गोलीबारी करने का आदेश दिया था, वह एक रहस्य है।

पीटीआई


इसके अलावा, एक दूसरी बात भी महत्त्वपूर्ण है। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात परिवर्तन पार्टी बनाई थी और वे भाजपा के खिलाफ लड़े थे। हालांकि, वे राजनीतिक परिवर्तन लाने में असफल रहे थे।

उस समय एक चुनाव प्रचार सभा में 8 दिसंबर 2012 को नरेंद्र मोदी को केशुभाई पटेल ने “ढूंढियो राक्षस” कहा था। नरेंद्र मोदी 2001 में गुजरात में आए विनाशकारी भूकंप के बाद केशुभाई पटेल को हटाकर मुख्यमंत्री बने थे, यह तो एक हकीकत है। यह “ढूंढियो राक्षस” का अर्थ क्या है? गुजरात में जब कोई व्यक्ति बहुत ही लालची, षड्यंत्रकारी और क्रूर होता है और जो दूसरों को लगातार परेशान करता रहता है, लोगों को प्रताड़ित करता है, उसे सामान्य बोलचाल में तंज कसते हुए 'ढूंढियो राक्षस' कहा जाता है।
Social Media


इतना ही नहीं, यह याद रखने की भी जरूरत है कि केशुभाई पटेल ने सबसे पहले 22 जून-2004 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन को Mini-emergency जैसी स्थिति बताया था। उस समय नरेंद्र मोदी के शासन को गुजरात में मुश्किल से तीन साल बीते थे। गांधीनगर स्थित अपने निवास स्थान पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बयान दिया था। उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि,

गुजरात में विधायक अपनी भावनाएं व्यक्त करने से डर रहे हैं और राज्य में भय का माहौल है। और उस समय तो केशुभाई भाजपा में ही थे।

इन सभी बातों को ध्यान में रखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं और अमित शाह गृह मंत्री हैं,

Social Media


तब वर्तमान में SIR के संदर्भ में जो आंदोलन चल रहा है उसमें लाठीचार्ज न हो, पैलेट गन न चले, अश्रु गैस के गोले न फेंके जाएं, वॉटर कैनन न चले और गिरफ्तारियां न हों तथा लोगों को जेल में न डाला जाए तो अचरज की बात ही होगी।

Social Media

उल्लेखनीय बात यह है कि हार्दिक पटेल के खिलाफ सभी मामले अभी हाल ही में वापस ले लिए गए हैं और क्योंकि वे थोड़े समय के लिए गुजरात कांग्रेस के उपाध्यक्ष पद पर रहने के बाद भाजपा में शामिल हो गए थे क्योंकि शायद उन्हें उन मामलों का डर लग रहा था। वर्तमान में वे भाजपा के विधायक भी हैं।

भारत के लोकतंत्र के लिए यह प्रश्न बहुत ही महत्त्वपूर्ण है कि चुने हुए मुख्यमंत्री गुजरात में मौजूद हैं, लेकिन उन्हें पता ही नहीं है कि गोलीबारी करने का आदेश किसने दिया था।

उस समय गृह राज्य मंत्री रजनीकांत पटेल थे। नितिन पटेल के कहने का अर्थ तो यह भी होता है कि रजनीकांत पटेल को भी इसकी जानकारी नहीं थी। नितिन पटेल का दावा है कि लाठीचार्ज और गोलीबारी का आदेश किसने दिया था, इसकी जानकारी उन्हें भी आज तक नहीं है और यह एक रहस्य ही है।

उल्लेखनीय बात यह है कि वे विजय रूपाणी के मंत्रिमंडल में उप मुख्यमंत्री थे। अब जो सवाल समूचे देश स्तर पर खड़ा हुआ है वह यह है कि जंतर मंतर पर गत 20 जुलाई को पुलिस दमन के लिए आदेश किसने दिया था? इस सवाल का जवाब तो खोजना ही पड़ेगा।

Pro. Hemantkumar Shah

Pro. Hemantkumar Shah

प्रो शाह जाने-माने अर्थशास्त्री हैं और गुजरात में लंबे समय तक अध्यापन के बाद लेखन और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।