International

पुतिन के सामने झुकने को क्यों मज़बूर हुए ट्रम्प?

TCN Desk TCN Desk | 15h ago · 6 min read
पुतिन के सामने झुकने को क्यों मज़बूर हुए ट्रम्प?

ट्रंप ने रूसी तेल को लेकर अपना रुख बदल दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को रूस के साथ ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े एक बड़े समझौते की घोषणा की। इस समझौते के तहत रूस वैश्विक ऊर्जा बाजारों को लगभग 50 लाख टन डीजल की आपूर्ति कर सकता है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बातचीत के बाद ट्रंप ने इस समझौते की जानकारी दी। इसके तुरंत बाद अमेरिकी वित्त विभाग ने एक अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी किया, जिसके तहत अगले साल 7 अप्रैल तक रूसी डीजल की खरीद की अनुमति दी गई है।

अब अमेरिका ने रूसी डीजल खरीदने पर लगी रोक को 7 अप्रैल 2027 तक के लिए हटा लिया है। ट्रंप ने शुक्रवार को इसका ऐलान करते हुए कहा कि इस फैसले से दुनियाभर में डीजल की सप्लाई बढ़ेगी जिससे कीमतें कम होंगी। खास बात यह है कि सितंबर में ही ट्रंप ऐसे कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।

Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई बार कह चुके हैं कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन को युद्ध रोकने के बाद ही अमेरिका से राहत मिलनी चाहिए। लेकिन अब ट्रंप ने रूसी तेल को लेकर अपना रुख बदल दिया है।

यह कदम अमेरिका में होने वाले महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों से पहले घरेलू ऊर्जा कीमतें कम करने की ट्रंप की कोशिशों का हिस्सा है। ऊंची महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर लोगों की व्यापक चिंताओं के कारण इन चुनावों में राष्ट्रपति की रिपब्लिकन पार्टी का प्रदर्शन खराब रहने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति के जरिए कीमतें घटाने की घोषणा राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है।


ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा,

मैंने अभी रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ बेहद सफल बातचीत पूरी की है। इसमें यह सहमति बनी है कि रूस अमेरिकी और वैश्विक बाजारों को तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके अलावा नवंबर महीने में 5 लाख टन और उसके तुरंत बाद 10 लाख टन डीजल की आपूर्ति की जाएगी। साथ ही, अपनी डीजल रिफाइनरियों की स्थिति के आधार पर रूस इसके बाद कम समय के भीतर 30 लाख टन डीजल की आपूर्ति करेगा।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस घोषणा से अमेरिकी और वैश्विक उपभोक्ताओं के लिए डीजल की कीमतों में तेजी से कमी आएगी। समझौते में शुरुआती आपूर्ति तत्काल शुरू करने और इसके बाद अलग-अलग चरणों में अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, आखिरी चरण में प्रस्तावित 30 लाख टन डीजल की आपूर्ति रूसी रिफाइनरियों की स्थिति पर निर्भर करेगी।

Social Media


फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रूस के साथ हुए इस ऊर्जा समझौते का ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026’ पर क्या असर पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले महीने इस कानून पर हस्ताक्षर किए थे। इसका स्पष्ट उद्देश्य रूस की ऊर्जा निर्यात से होने वाली कमाई को बुरी तरह प्रभावित करना था। कानून में राष्ट्रपति को रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदार देशों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाने का निर्देश दिया गया है।

इस कानून के तहत उन पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जाना है, जिन्होंने कानून पर हस्ताक्षर होने से पहले के 12 महीनों में रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीदी थी।

भारत, चीन, अजरबैजान, स्लोवाकिया और हंगरी को इस कानून से प्रभावित होने वाले संभावित पांच देशों के रूप में देखा जा रहा था। इन देशों के लिए अमेरिका का नया ऊर्जा समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टैरिफ लागू करने की समयसीमा करीब आ रही है।

कानून के अनुसार,

राष्ट्रपति को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 30 दिनों के भीतर टैरिफ लगाना है। यह समयसीमा 18 अक्टूबर को पूरी होगी। हालांकि, कानून राष्ट्रपति ट्रंप को राष्ट्रीय हित के आधार पर छूट देने का अधिकार भी देता है। ऐसी छूट के जरिए किसी देश को इन टैरिफ से मुक्त रखा जा सकता है। अमेरिका और रूस के बीच ऊर्जा समझौते की घोषणा के बाद अब इस बात को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है कि प्रस्तावित टैरिफ वास्तव में लगाए जाएंगे या नहीं। मतलब साफ है कि पहले प्रतिबंध और टैरिफ लगाने की बात की गई। बिल पास किया गया और अब रूस की शरण में चले गए।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इस घोषणा पर संदेह जताया।


उन्होंने एक्स पर लिखा,

रूस के साथ तनाव कम करने के किसी स्पष्ट और स्थायी समझौते के बिना उसके खिलाफ प्रतिबंधों में किसी भी तरह की ढील देना साफ तौर पर कमजोरी है। यह रूस के पक्ष में जाता है—उसे और अधिक लोगों को मारने, लंबे समय तक युद्ध जारी रखने, अमेरिका के प्रति और भी कम सम्मान रखने तथा दुनिया को ज्यादा नुकसान पहुंचाने की गुंजाइश देता है।

हाल के महीनों में यूक्रेनी सेना ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले किए हैं। इन हमलों को लेकर कीव और वॉशिंगटन के बीच कुछ मतभेद भी सामने आए हैं। अमेरिका को आशंका है कि रूसी ऊर्जा निर्यात में व्यवधान आने से वैश्विक कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसी पृष्ठभूमि में रूस से डीजल आपूर्ति बढ़ाने और उसकी खरीद को अस्थायी अनुमति देने का अमेरिकी फैसला सामने आया है।

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब यूक्रेन का एक प्रतिनिधिमंडल युद्ध समाप्त करने के रास्तों पर चर्चा के लिए अमेरिका में मौजूद था। साथ ही, 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी कांग्रेस चुनावों में चार सप्ताह से भी कम समय बचा है। रिपब्लिकन पार्टी अपना मामूली बहुमत बचाने की कोशिश कर रही है।
PBS


अमेरिका ने अक्टूबर 2025 में रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे। इनका संबंध फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध से था। रॉयटर्स के मुताबिक, डीजल की बिक्री से रूस को अरबों डॉलर की कमाई हो सकती है। इसी संभावित कमाई को लेकर यूक्रेन और कुछ अमेरिकी सांसद सवाल उठा रहे हैं।

ज़ेलेंस्की ने कहा कि समझौता रूस को युद्ध के लिए अतिरिक्त धन देगा और शांति की दिशा में चल रही कोशिशों को कमजोर करेगा।

उन्होंने अपने प्रतिनिधिमंडल की अमेरिका में मौजूदगी पर भी सवाल उठाया। ज़ेलेंस्की का कहना था कि उन्हें लगता है कि उनकी टीम को दिखावे के लिए आगे रखा गया, जबकि उसी दौरान रूस के साथ डीजल समझौते की घोषणा कर दी गई। उनके मुताबिक, यह घटनाक्रम युद्ध समाप्त करने को लेकर जारी बातचीत पर भी प्रश्न खड़े करता है।


समझौते पर आपत्ति केवल यूक्रेन ने नहीं जताई। रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन ने भी फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस द्वारा हाल में पारित प्रतिबंधों को लागू करने का समय है, उन्हें हटाने का नहीं।

Reuters के मुताबिक, बेकन ने कहा कि जब रूसी सेना यूक्रेनी नागरिकों को मार रही है, तब पुतिन को और पैसा नहीं दिया जाना चाहिए। उनकी प्रतिक्रिया बताती है कि रूस के साथ इस समझौते को लेकर ट्रंप की अपनी पार्टी में भी असहमति है।

28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किए जाने के बाद से डीजल की कीमतें 70 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। वाहन चालकों के संगठन एएए के मुताबिक, गुरुवार को अमेरिका में डीजल की औसत कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई।

समझौते की खबर के बाद अमेरिकी डीजल वायदा कीमतों में लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट आई और वे 4.64 डॉलर प्रति गैलन पर आ गईं। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों ने इस गिरावट को स्थायी राहत मानने से सावधान किया है। ट्रंप अगले कुछ दिनों में नया निर्देश जारी कर सकते हैं। इसके तहत विभाग प्रमुखों से डीजल की कीमतें नियंत्रित करने के रास्ते तलाशने को कहा जाएगा। तेल और ईंधन उत्पादन बढ़ाने के लिए शीत युद्ध के दौर के डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।