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IDBI बैंक में 61% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार और LIC, कनाडा और दुबई की कंपनी के साथ हो सकती है डील

TCN Desk TCN Desk | 15 Jul, 2026 · 2 min read
IDBI बैंक में 61% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार और LIC, कनाडा और दुबई की कंपनी के साथ हो सकती है डील

भारत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर IDBI बैंक में अपनी 60.7% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं।

भारत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर IDBI बैंक में अपनी 60.7% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। इस रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment) के तहत कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और दुबई की एमिरेट्स NBD ने बोली लगाई है। फिलहाल दोनों कंपनियों की बोलियों का वैल्यूएशन किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह सौदा अगले एक महीने के भीतर अंतिम रूप ले सकता है।

IDBI बैंक में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को वरिष्ठ नौकरशाहों के एक पैनल ने बैठक कर इस ट्रांजैक्शन की समीक्षा की और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा की। फिलहाल कंपनियों की संशोधित (रिवाइज्ड) बोलियों की जांच की जा रही है। यह प्रस्तावित सौदा केंद्र सरकार के रणनीतिक विनिवेश कार्यक्रम का अहम हिस्सा है। मौजूदा शेयरहोल्डिंग के अनुसार,

IDBI बैंक में केंद्र सरकार की 45.48% हिस्सेदारी है, जबकि LIC के पास 49.24% शेयर हैं। दोनों मिलकर अपनी संयुक्त हिस्सेदारी में से 60.7% हिस्सा बेच रहे हैं।

IDBI बैंक में कंट्रोलिंग स्टेक खरीदने की दौड़ में दो प्रमुख दावेदार हैं। पहला, भारतीय मूल के कनाडाई उद्योगपति प्रेम वत्सा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और दूसरा, दुबई का प्रमुख बैंकिंग समूह एमिरेट्स NBD।

मौजूदा बाजार मूल्य के आधार पर इस प्रस्तावित अधिग्रहण की कुल वैल्यू करीब 5.7 अरब डॉलर आंकी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा पूरा होता है, तो यह भारत के बैंकिंग क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में शामिल होगा।

सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि वैल्यूएशन की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगले एक महीने के भीतर हिस्सेदारी बिक्री को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। इस खबर के बाद IDBI बैंक के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। बैंक का शेयर करीब 3% की बढ़त के साथ 86.48 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ।

जब सरकार किसी सरकारी कंपनी या बैंक में अपनी बड़ी हिस्सेदारी, आमतौर पर 50% या उससे अधिक, किसी निजी या बाहरी कंपनी को बेच देती है और साथ ही उस कंपनी का प्रबंधन (मैनेजमेंट कंट्रोल) भी नए खरीदार को सौंप देती है, तो इसे रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment) कहा जाता है। इसका उद्देश्य सरकारी उपक्रमों में निजी निवेश बढ़ाना, संचालन को अधिक कुशल बनाना और सरकार की हिस्सेदारी कम करना होता है।