ज्ञानेश कुमार समेत तीनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को SC में चुनौती, पद पर बने रहने का कानूनी आधार पूछा
याचिका में तीनों के खिलाफ ‘क्वो वारंटो रिट जारी करने की मांग की गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की नियुक्तियों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नियुक्तियों में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। याचिका में तीनों के खिलाफ ‘क्वो वारंटो रिट जारी करने की मांग की गई है, जिसके तहत उनसे पूछा जाए कि वे किस कानूनी अधिकार से अपने पदों पर बने हुए हैं।
Live Law की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूरी पयाला ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दाखिल की है। इसमें 14 मार्च, 2024 की उन अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है, जिनके जरिए ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू चुनाव आयुक्त नियुक्त हुए थे। इसके अलावा, 17 फरवरी, 2025 की अधिसूचना के तहत कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त और विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि,
इन नियुक्तियों में कानून की धाराओं 5, 6 और 8(1) का अनुपालन नहीं किया गया। धारा 6 का हवाला देते हुए उन्होंने तर्क दिया है कि सर्च कमेटी को प्रत्येक रिक्त पद के लिए पांच व्यक्तियों का पैनल तैयार करना चाहिए था। लेकिन मार्च, 2024 में चुनाव आयुक्तों के दो पद खाली होने पर समिति ने दोनों पदों के लिए कुल छह नाम ही सुझाए।
इस संबंध में याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 22 मार्च, 2024 के आदेश का उल्लेख है। वर्ष 2023 के कानून को चुनौती देने वाले मामले में अदालत ने कहा था कि,
धारा 6 के अनुसार दो रिक्तियों के लिए दस नाम होने चाहिए। अदालत ने जल्दबाजी में अपनाई गई प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए यह भी कहा था कि चयन समिति के सदस्यों को उम्मीदवारों का पूरा विवरण उपलब्ध कराने के बाद ही नियुक्तियां की जानी चाहिए।
याचिका के मुताबिक, 13 मार्च, 2024 को विधायी विभाग के सचिव ने विपक्ष के नेता को 200 से अधिक व्यक्तियों की सूची भेज दी थी, जबकि सर्च कमेटी ने तब तक अपनी अंतिम सूची तैयार नहीं की थी। अगले दिन कमेटी ने छह नाम सुझाए और उसी दिन चयन समिति ने कुमार तथा संधू का चयन कर लिया। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि क्या इन छह नामों को धारा 6 के अनुरूप तैयार ‘पैनल’ माना जा सकता है।
उम्मीदवारों की पात्रता पर भी सवाल उठाए गए हैं। धारा 5 के अनुसार, नियुक्ति के लिए व्यक्ति भारत सरकार के सचिव के समकक्ष पद पर कार्यरत हो या रह चुका हो। साथ ही, वह सत्यनिष्ठ हो और चुनावों के प्रबंधन तथा संचालन का ज्ञान एवं अनुभव रखता हो। धारा 8(1) चयन समिति को अपनी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से निर्धारित करने के लिए कहती है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि,
ज्ञानेश कुमार और संधू की आधिकारिक परिचय सामग्री तथा कार्यकारी सेवा विवरण में नियुक्ति से पहले चुनावों के प्रबंधन या संचालन से जुड़ा कोई विशिष्ट दायित्व दर्ज नहीं है। कुमार के सेवा विवरण में 26 ट्रांसफर दर्ज हैं, लेकिन किसी को चुनाव संबंधी कार्य के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है।

ज्ञानेश कुमार एर्नाकुलम के जिला कलेक्टर रहे थे, लेकिन रिकॉर्ड में यह पदस्थापना भू-राजस्व प्रबंधन और जिला प्रशासन की श्रेणी में दर्ज है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट नहीं है कि कुमार जिला निर्वाचन अधिकारी, चुनाव पर्यवेक्षक या किसी अन्य चुनाव संबंधी भूमिका में नियुक्त हुए थे या नहीं।
संधू के बारे में भी ऐसी ही दलील दी गई है। उनके आधिकारिक परिचय में जिलाधिकारी, उत्तराखंड के मुख्य सचिव, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष और लोकपाल के सचिव जैसे पद दर्ज हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता का कहना है कि इनमें चुनाव प्रबंधन से जुड़ी किसी जिम्मेदारी का उल्लेख नहीं है।

विवेक जोशी के मामले में याचिका ने हरियाणा के मुख्य सचिव, भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त तथा वित्तीय सेवा विभाग और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में सचिव जैसे पदों का उल्लेख किया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, उनके सार्वजनिक परिचय में भी चुनाव संबंधी जिम्मेदारी दर्ज नहीं है। हालांकि, उन्होंने माना है कि सार्वजनिक विवरण से बाहर की ऐसी नियुक्तियों की जानकारी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के पास हो सकती है।
वर्ष 2025 की नियुक्तियों को चुनौती देते हुए याचिका कहती है कि ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयुक्त से मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए जाने और जोशी की नियुक्ति के लिए धाराओं 5 से 8 का स्वतंत्र रूप से पालन जरूरी था। इसमें नया पैनल तैयार करना और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाना शामिल है। चयन समिति की बैठक 17 फरवरी, 2025 को हुई थी और ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति 19 फरवरी से प्रभावी हुई। उसी बैठक में उनके स्थान पर जोशी चुने गए।
याचिकाकर्ता ने दोनों वर्षों की सर्च कमेटी और चयन समितियों के मूल रिकॉर्ड अदालत में पेश करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड मांगने के लिए 27 सितंबर और 2 अक्टूबर, 2026 को दाखिल आरटीआई आवेदन लंबित हैं। अंतरिम राहत के तौर पर रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और भविष्य की नियुक्तियों में अग्रिम मानदंड, प्रत्येक रिक्ति पर पांच नाम तथा चयन के कारण दर्ज करने जैसे उपाय मांगे गए हैं।
मुख्य मांग है कि नियुक्तियां कानूनसम्मत नहीं पाए जाने पर पद रिक्त घोषित किए जाएं। याचिका यह प्रश्न भी उठाती है कि अनुच्छेद 324(5) के बावजूद ऐसी रिट जारी हो सकती है या नहीं। गौरतलब है कि अधिवक्ता अनिल कुमार के जरिए दाखिल यह याचिका एसआईआर संबंधी फैसलों पर विपक्ष और सीजेपी के विरोध के बीच आई है।
