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ईरान पर हमले की जानकारी लीक करने वालों को गोली मार देनी चाहिए: ट्रंप

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 9 min read
ईरान पर हमले की जानकारी लीक करने वालों को गोली मार देनी चाहिए: ट्रंप

राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जुड़ी एक घटना का जिक्र करते समय आया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बार फिर संवेदनशील सरकारी सूचनाएं मीडिया तक लीक करने वालों के खिलाफ बेहद सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की गोपनीय जानकारी लीक करने वाले लोगों को गोली मार देनी चाहिए। ट्रंप ने ऐसे लोगों को ‘धरती का कचरा’ बताते हुए कहा कि उन्हें जेल में डाल देना चाहिए और जिंदगी भर जेल में ही रखा जाना चाहिए।

Time Magazine की एक रिपोर्ट के मुताबिक एरिजोना के बुलहेड सिटी में एक राजनीतिक रैली के दौरान दिए गए उनके इस बयान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सरकारी गोपनीयता और पत्रकारिता की भूमिका को लेकर बहस तेज कर दी है।


ट्रंप ने रैली में कहा,

“मेरी राय में, जानकारी लीक करने वालों को गोली मार देनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, पुराने दिनों में हम लीक करने वालों को गोली मार देते थे। आप जानते हैं, जब वे यह बता देते थे कि आप किसी देश पर किस समय हमला करने वाले हैं।”
राष्ट्रपति का यह बयान ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जुड़ी एक घटना का जिक्र करते समय आया। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पर एक योजनाबद्ध सैन्य हमले को इसलिए टालना पड़ा, क्योंकि किसी व्यक्ति ने अमेरिकी सेना के रवाना होने और पहुंचने के समय की जानकारी लीक कर दी थी।
ट्रंप की टिप्पणी से ऐसा प्रतीत हुआ कि वह जून 2025 में चलाए गए अमेरिकी सैन्य अभियान ‘Operation Midnight Hammer’ का जिक्र कर रहे थे। इस अभियान के दौरान अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर अचानक हमला किया था। उस समय ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक युद्ध चला था।
AFP


जून में हुए इस हमले के बाद अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की एक प्रारंभिक रिपोर्ट लीक हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान के परमाणु ठिकानों को उतना नुकसान नहीं पहुंचा था, जितना ट्रंप प्रशासन ने शुरुआत में दावा किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अब भी यूरेनियम संवर्धन करने में सक्षम हो सकता था। कुछ खबरों में यह भी कहा गया था कि हमले से पहले ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों से संवर्धित परमाणु सामग्री को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया था।

ट्रंप ने रैली में इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए कहा,

“किसी ने जानकारी लीक की थी। वह कोई घटिया इंसान था। उसे जेल में डाल देना चाहिए और गोली मार देनी चाहिए। उसे अपनी बाकी जिंदगी जेल में बितानी चाहिए।”
उन्होंने दावा किया कि लीक करने वाले व्यक्ति ने यह जानकारी सार्वजनिक कर दी थी कि अमेरिकी सैन्य अभियान से जुड़े लोग मिसौरी से रात 12 बजकर 7 मिनट पर रवाना होने वाले थे। ट्रंप ने कहा कि यह जानकारी न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन में भी प्रकाशित हुई थी।

इसके कुछ ही देर बाद ट्रंप ने रैली को कवर कर रहे पत्रकारों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वे भी लीक करने वालों से लगभग उतने ही बुरे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार गलत सूचनाएं लीक करते हैं। ट्रंप ने कहा, “वे गलत जानकारी लीक करते हैं। इससे वे भी लीक करने वाले बन जाते हैं, है ना?” गोपनीय सरकारी सूचनाएं लीक करने वालों के प्रति ट्रंप का विरोध नया नहीं है। राष्ट्रपति बनने से पहले भी वह कई बार ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।

साल 2010 में फॉक्स न्यूज के ब्रायन किल्मीड के रेडियो कार्यक्रम के एक प्रचार वीडियो में ट्रंप ने WikiLeaks की आलोचना की थी। उस समय WikiLeaks ने अमेरिकी सेना के पूर्व इंटेलिजेंस विश्लेषक Chelsea Manning की ओर से उपलब्ध कराए गए लाखों गोपनीय सैन्य और कूटनीतिक दस्तावेज जारी किए थे।
TIME Magazine


ट्रंप ने तब कहा था, “मुझे लगता है कि यह शर्मनाक है। मुझे लगता है कि इसके लिए मृत्युदंड या कुछ ऐसा होना चाहिए।” बाद में जब ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय थे, तब उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) के पूर्व Inteligence Analyst Edward Snowden पर भी कई बार निशाना साधा। स्नोडेन ने 2013 में अमेरिकी सरकार के निगरानी कार्यक्रमों से जुड़े गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। इन खुलासों के बाद दुनिया भर में सरकारी निगरानी और नागरिकों की निजता को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई थी।

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ट्रंप ने Edward Snowden को ‘जासूस’ बताते हुए कहा था कि उन्हें फांसी दे दी जानी चाहिए।

राष्ट्रपति बनने के बाद भी ट्रंप ने गोपनीय सूचनाएं लीक किए जाने के मुद्दे पर कई बार नाराजगी जताई। साल 2017 में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप के चुनाव अभियान से जुड़े लोगों का रूस की खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई बार संपर्क हुआ था।

इस रिपोर्ट के बाद ट्रंप ने तत्कालीन ट्विटर पर लिखा था कि वाशिंगटन में सूचनाएं लीक करना और यहां तक कि गोपनीय सूचनाओं को गैरकानूनी तरीके से सार्वजनिक करना वर्षों से एक बड़ी समस्या रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसे लोगों को पकड़ लिया जाएगा।

साल 2019 में एक व्हिसलब्लोअर ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ट्रंप ने 2020 के अमेरिकी चुनाव में हस्तक्षेप कराने के लिए अपने पद की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक अन्य देश से मदद मांगी थी।

इस मामले में ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन के कर्मचारियों से कहा था कि वह जानना चाहते हैं कि व्हिसलब्लोअर को जानकारी किसने दी। उन्होंने कहा था, “यह लगभग जासूस जैसा है। आप जानते हैं कि पुराने दिनों में, जब हम समझदार हुआ करते थे, जासूसों और देशद्रोहियों के साथ क्या किया जाता था? हम उनके साथ आज के मुकाबले अलग तरीके से पेश आते थे।”

हालांकि, ट्रंप का गोपनीय सूचनाओं के लीक होने के प्रति विरोध हर मामले में एक जैसा नहीं रहा है। जब ऐसे खुलासों से उन्हें राजनीतिक फायदा मिला, तो उन्होंने उनका स्वागत भी किया।

2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से कुछ दिन पहले ओहायो के विलमिंगटन में एक रैली के दौरान ट्रंप ने विकीलीक्स की ओर से जारी किए गए ईमेल की तारीफ की थी। इन ईमेल में उनकी प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन के चुनाव अभियान के अध्यक्ष जॉन पोडेस्टा के निजी संदेश और डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के ईमेल शामिल थे।

ट्रंप ने तब कहा था, “मुझे WikiLeaks पढ़ना बहुत पसंद है!”

उन्होंने रूस की ओर से क्लिंटन के ईमेल हैक किए जाने की संभावना पर भी टिप्पणी की थी और रूस से अपील की थी कि अगर उसके पास क्लिंटन से जुड़े दस्तावेज हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए।

ट्रंप ने एक अन्य मौके पर यह भी संकेत दिया था कि अगर Edward Snowden पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के जन्म से जुड़े रिकॉर्ड जारी कर दें, तो वह उनके प्रशंसक बन सकते हैं। उस समय ओबामा के जन्मस्थान को लेकर ट्रंप की ओर से प्रचारित किए गए षड्यंत्र के सिद्धांतों ने भी राजनीतिक विवाद पैदा किया था।

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में प्रशासन ने मीडिया तक संवेदनशील सूचनाएं पहुंचने से रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं।

ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के गोला-बारूद के घटते भंडार से संबंधित खबरें सामने आने के बाद पेंटागन ने दर्जनों असैन्य कर्मचारियों और सैन्य अधिकारियों के पॉलीग्राफ टेस्ट कराए। इन परीक्षणों का उद्देश्य गोपनीय सूचनाएं लीक करने वाले व्यक्ति का पता लगाना था। ट्रंप ने इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करने वालों के लिए लंबे समय तक जेल की सजा की मांग की थी। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर रिपोर्टिंग करने के बाद वॉल स्ट्रीट जर्नल और वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकारों को समन भी भेजे गए थे। हालांकि, दोनों समाचार संगठनों ने इन समन का विरोध किया और बाद में अमेरिकी न्याय विभाग ने उन्हें वापस ले लिया।

जनवरी में एफबीआई ने वॉशिंगटन पोस्ट के एक पत्रकार के घर पर छापा मारा था। यह कार्रवाई एक सरकारी ठेकेदार के खिलाफ चल रही जांच के तहत की गई थी। उस ठेकेदार पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को गलत तरीके से संभालने का आरोप था।
अप्रैल में न्याय विभाग ने एक पूर्व सैन्य कर्मचारी को गिरफ्तार करने की घोषणा की। उस पर आरोप था कि उसने राष्ट्रीय रक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी ऐसे लोगों को भेजी थी, जिन्हें उसे प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी। इनमें एक पत्रकार भी शामिल था।

पेंटागन ने पत्रकारों को चेतावनी दी थी कि अगर वे अनधिकृत सामग्री प्रकाशित नहीं करने से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं, तो उनकी पहुंच रोकी जा सकती है। पेंटागन प्रेस कोर के कई पत्रकारों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। मार्च में एक संघीय न्यायाधीश ने भी प्रेस के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रक्षा विभाग की मीडिया पहुंच नीति के कई प्रावधानों को रद्द कर दिया।

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने किसी समूह के लोगों को गोली मारने की बात कही है।

तीन साल पहले कैलिफोर्निया में रिपब्लिकन नेताओं के साथ दोपहर के भोजन के दौरान उन्होंने दुकानों में लूटपाट करने वालों को गोली मारने का समर्थन किया था। उस समय वह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले खुद को अपराध के खिलाफ सख्त नेता के रूप में पेश कर रहे थे।

ट्रंप ने कहा था कि लोग दुकानों से सामान लूटकर ले जाते हैं और बाद में उसे बेचते हैं। उन्होंने दावा किया था कि अगर पुलिस को अपना काम करने की अनुमति दी जाए और जरूरत पड़ने पर लुटेरों को गोली मारने की छूट मिले, तो ऐसी घटनाएं तुरंत रुक जाएंगी।

2019 में प्रवासियों को अमेरिका में प्रवेश करने से रोकने के लिए भी ट्रंप ने गोली मारने का सुझाव दिया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार Michael D. Shear और Julie Hirschfeld Davis की किताब Border Wars Inside Trump's Assault on Immigration के मुताबिक, ट्रंप ने अपने सहयोगियों के सामने सुझाव दिया था कि सीमा पार करने वाले प्रवासियों के पैरों में गोली मारी जाए। हालांकि, उन्हें बताया गया कि ऐसा करना कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं होगा। बाद में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि वह सीमा सुरक्षा को लेकर सख्त हो सकते हैं, लेकिन इतने सख्त नहीं हैं।

CNN

2020 में George Floyd की मौत के बाद हुए नस्लीय न्याय प्रदर्शनों के दौरान भी ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सेना के इस्तेमाल पर विचार किया था। उनके पहले कार्यकाल में रक्षा मंत्री रहे मार्क एस्पर के अनुसार, ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के पैरों में गोली मारने का आदेश देने पर भी विचार किया था।

पिछले सप्ताह ट्रंप ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार अमेरिकी सेना के किसी सैनिक को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मृत्युदंड दिए जाने की योजना को मंजूरी दी। उन्होंने इस कार्रवाई का लाइव प्रसारण करने की संभावना को लेकर भी उत्साह दिखाया था। हालांकि, इस प्रस्ताव पर नकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद ट्रंप के रुख में बदलाव के संकेत मिले।

शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा,

“इसके दो विकल्प हैं—इसे नहीं दिखाना या इसे दिखाना। क्योंकि इसे दिखाने से शायद दूसरे लोग भी वह काम नहीं करेंगे, जो उसने किया। इसलिए मैं अंत में इस पर फैसला करूंगा। मुझे पता है कि सेना क्या करना चाहती है, लेकिन फैसला हम करेंगे।”
Reuters

ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सरकारी गोपनीयता बनाए रखने की सीमा क्या होनी चाहिए और संवेदनशील सूचनाएं सार्वजनिक करने वालों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई उचित है। उनके आलोचकों के लिए यह बयान प्रेस की स्वतंत्रता और असहमति के प्रति उनके रवैये को लेकर चिंताएं बढ़ाने वाला है, जबकि ट्रंप अपने रुख को गोपनीय सूचनाओं के लीक होने से होने वाले संभावित नुकसान से जोड़ते रहे हैं।