प्रदर्शन की कवरेज कर रहे कई पत्रकार हिरासत में, Delhi Police पर लगाया बदसलूकी का आरोप
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प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रहे कई पत्रकारों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें Scroll के पत्रकार आयुष तिवारी और राजनीतिक संपादक शोएब दानियाल के अलावा Newslaundry , नवभारत टाइम्स, Reuters और मलयालम समाचार चैनल रिपोर्टर टीवी के पत्रकार शामिल हैं।
The Hindu की एक रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के मुताबिक, पहचान बताने और प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। कुछ पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी और उन्हें खींचकर ले जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
Scroll के पत्रकार आयुष तिवारी को आईटीओ के पास हिरासत में लिया गया। वह जंतर मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल पर नहीं थे। उनके मुताबिक, उनका प्रेस कार्ड साफ दिखाई दे रहा था और उन्होंने कई बार पुलिसकर्मियों को बताया कि वह पत्रकार हैं। इसके बावजूद उन्हें पुलिस वैन में बैठाकर ले जाया गया। तिवारी ने कहा कि उन्होंने चिल्लाकर अपनी पहचान बताई, लेकिन पुलिसकर्मियों ने जवाब दिया कि हर कोई खुद को पत्रकार बता रहा है। इस घटना ने प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे मीडियाकर्मियों के काम और उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
Scroll के राजनीतिक संपादक शोएब दानियाल को सीआर पार्क के पास हिरासत में लिया गया। यह इलाका मध्य दिल्ली और जंतर मंतर से दूर है। दानियाल उस समय टैक्सी का इंतजार कर रहे थे। दोनों पत्रकारों को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। स्क्रॉल के इन पत्रकारों की हिरासत की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स ने भी की है।
Newslaundry ने बताया कि उसके पत्रकार अनमोल प्रीतम, अश्विनी कुमार सिंह, आस्था सव्यसाची और अंशु गुप्ता को भी हिरासत में लिया गया। संस्थान के मुताबिक, जब पत्रकारों ने खुद को मीडिया का सदस्य बताया तो कथित तौर पर उनसे कहा गया, “कोई मीडिया नहीं है।” पत्रकारों की पहचान की अनदेखी किए जाने के इन आरोपों के बीच मीडिया संस्थानों ने अपने कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सार्वजनिक की।
वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम को भी दिल्ली पुलिस ने कवरेज करने से रोक दिया।
अजीत अंजुम ने एक्स पोस्ट करते कहा कि,
जंतर -मंतर की तो चारों तरफ से किलेबंदी है ही लेकिन CP से जंतर -मंतर की तरफ जाने वाली सड़क संसद मार्ग को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। आज सुबह मैं संसद मार्ग पर शूट करते हुए CP के आउटर सर्कल तक गया तो वापसी में मुझे इस तरह से रोका गया। आज मीडिया के लिए बहुत सख्ती है।
नवभारत टाइम्स के दो पत्रकारों, ऋतिक जोशी और राहुल चरास, को भी रिपोर्टिंग के दौरान हिरासत में लिया गया। अखबार के संपादक आशीष पांडेय ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल के साथ बदसलूकी भी की गई। पांडेय के मुताबिक, उनकी टीम के पास मीडिया पहचान पत्र थे, जो साफ दिखाई दे रहे थे। इसके बावजूद दोनों पत्रकारों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
मलयालम समाचार चैनल रिपोर्टर टीवी की दो महिला पत्रकारों, रोशनी राजन और फरज़ा टीएम, को कथित तौर पर पुलिस ने खींचकर वहां से हटाया। दोनों विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं। वहीं, पत्रकार पीयूष राय ने सोशल मीडिया पर बताया कि रॉयटर्स के लिए काम करने वाले पत्रकार सौरभ शर्मा को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। अलग-अलग संस्थानों के पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की इन खबरों के बीच प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठा है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया निगरानी संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ)ने दिल्ली पुलिस से सभी हिरासत में लिए गए पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को तत्काल रिहा करने की मांग की। संस्था ने उनके उपकरण लौटाने, शारीरिक दुर्व्यवहार की खबरों की जांच कराने और पत्रकारों को बिना किसी हस्तक्षेप के प्रदर्शन की कवरेज करने देने की अपील की। उसने कहा कि स्वतंत्र प्रेस लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। संस्था ने यह भी बताया कि वह घटनाक्रम पर नजर रख रही है और अन्य हिरासत में लिए गए पत्रकारों तथा मीडियाकर्मियों की पहचान जुटा रही है।
जंतर मंतर पर यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी के राजनीतिक अभियान और वाम दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने आयोजित किया था। आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शन सुबह दस बजे शुरू होना था। प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठे सवालों के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पिछले कुछ सप्ताह में इसी मांग को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए हैं।

पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। प्रदर्शन से पहले राजधानी में लोगों को जुटने से रोकने के लिए कई प्रतिबंध लगाए गए। इनमें लोगों को हिरासत में लेना, ट्रेनें रद्द करना, 45 मेट्रो स्टेशन बंद करना और मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करना शामिल था। आयोजकों ने इन कदमों को डराने की कार्रवाई बताया। शनिवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों से सैकड़ों प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक नेताओं को भी हिरासत में लिया गया।
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद विमान के अंदर से हिरासत में लिया गया। यूट्यूबर ध्रुव राठी और अभियान की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह को अन्य स्थानों से हिरासत में लिया गया। इस बीच, पत्रकारों की रिहाई और उन्हें स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने देने की मांग सामने आई है।
