NYT का दावा : इजराइल सालों तक अहमदीनेजाद को अपने पक्ष में लाने की कोशिश करता रहा
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को इंटेलिजेंस एसेट के तौर पर मोसाद के एक सुरक्षित ठिकाने पर ले जाने की एक नाटकीय कोशिश के तौर पर सामने आया।
New York Times की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजराइल ने कई वर्षों तक ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद से गुप्त संपर्क बनाए रखे। इजराइल उन्हें भविष्य में ईरान के संभावित नेता के रूप में देख रहा था और इसी वजह से उन्हें अपने पक्ष में लाने की कोशिश की गई। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद इस योजना का सबसे अहम हिस्सा नाकाम हो गया।
न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना इसलिए भी हैरान करने वाली थी क्योंकि अहमदीनेजाद 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे और अपने कार्यकाल में उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तेज़ किया। वे लगातार इजराइल के खिलाफ कड़े बयान देते थे और होलोकॉस्ट से भी इनकार करते थे। 2009 के चुनावी विरोध प्रदर्शनों को भी उनके शासन में सख्ती से दबाया गया था। लेकिन राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उनकी राजनीति और सार्वजनिक छवि में बदलाव दिखाई देने लगा। उन्होंने इजराइल के खिलाफ बयान कम कर दिए, ईरान की सुरक्षा एजेंसियों और सत्ता प्रतिष्ठान की आलोचना शुरू की और खुद को पहले से अधिक नरम और आम लोगों का नेता दिखाने की कोशिश की। इसी बदलाव को इजरायली खुफिया एजेंसियों ने एक अवसर के रूप में देखा।
इस पूरी योजना में विदेशों में गुप्त मुलाकातें, आर्थिक मदद और ईरान के भीतर से अहमदीनेजाद को निकालने की तैयारी शामिल थी। 2024 की शुरुआत में हंगरी के बुडापेस्ट स्थित लुडोविका यूनिवर्सिटी में जलवायु परिवर्तन पर एक सम्मेलन आयोजित कराया गया। बाहर से यह एक सामान्य शैक्षणिक कार्यक्रम था, लेकिन दावा है कि इसका असली उद्देश्य अहमदीनेजाद और इजरायली खुफिया अधिकारियों के बीच गुप्त बातचीत कराना था।
बताया गया है कि उस समय मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया खुद बुडापेस्ट जाकर अहमदीनेजाद से मिले थे। बाद में मोसाद ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को भी यह जानकारी दी कि उनका अहमदीनेजाद से संपर्क स्थापित हो चुका है। जून 2025 में अहमदीनेजाद एक बार फिर बुडापेस्ट गए। उनके साथ मौजूद ईरानी सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि इस यात्रा के दौरान वे दो बार सुरक्षा घेरे से निकलकर कई घंटों तक गायब रहे। बाद में उन्होंने कहा कि वे विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों से मिलने गए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2023 में ग्वाटेमाला में आयोजित एक पर्यावरण सम्मेलन के दौरान भी इजरायली एजेंटों ने उनसे संपर्क किया हो सकता है।
New York Times की रिपोर्ट में दावा किया गया कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद अहमदीनेजाद को कई बार चुनाव लड़ने से रोका गया। उनके करीबी लोगों के अनुसार, उन्हें लगने लगा था कि मौजूदा इस्लामिक गणराज्य की व्यवस्था रहते वे दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकते। इसलिए उनका मानना था कि यदि विदेशों का समर्थन मिले तो वे सत्ता परिवर्तन के बाद ईरान का नेतृत्व कर सकते हैं, इजराइल को मान्यता दे सकते हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के Abraham Accords के तहत संबंध सामान्य बना सकते हैं। उनके पूर्व सलाहकार अब्दोलरेज़ा दावरी ने न्यूयार्क टाइम्स से कहा कि अहमदीनेजाद का मकसद पैसा नहीं बल्कि दोबारा सत्ता हासिल करना था। उनके अनुसार, अहमदीनेजाद के पास पहले से पर्याप्त संसाधन थे, लेकिन वे फिर से देश की सत्ता के शीर्ष पर पहुंचना चाहते थे।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने अहमदीनेजाद के रहने और विदेश यात्राओं के कुछ खर्चों में आर्थिक मदद की और कई बार विदेश में उनसे गुप्त मुलाकातें कीं।
इस योजना का सबसे बड़ा चरण 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान के शुरुआती दिनों में अहमदीनेजाद के तेहरान स्थित परिसर पर हवाई हमला हुआ। इस हमले में उनके सुरक्षाकर्मियों की इमारत और बुलेटप्रूफ वाहन को निशाना बनाया गया। हमले के तुरंत बाद एक काली Peugeot कार वहां पहुंची और अहमदीनेजाद को तेज़ी से वहां से निकालकर ईरान के भीतर ही एक गुप्त सुरक्षित ठिकाने पर ले गई। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि इस कार को मोसाद के एजेंट चला रहे थे। उद्देश्य था कि उन्हें सरकारी निगरानी से बाहर निकालकर इजरायल की सत्ता परिवर्तन की योजना पर काम शुरू किया जाए। अहमदीनेजाद इस पूरे ऑपरेशन से असहज हो गए। उन्हें यह तरीका बेहद जोखिम भरा लगा और वे पूरी योजना को लेकर संदेह में पड़ गए। बाद में वे उस सुरक्षित ठिकाने से निकल गए, हालांकि वे वहां से कैसे निकले, यह अब भी स्पष्ट नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद अहमदीनेजाद कई महीनों तक सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए। बाद में वे ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में थोड़ी देर के लिए नजर आए। उस समय उन्होंने मास्क और भारी जैकेट पहन रखी थी तथा उनके आसपास सुरक्षा कर्मी मौजूद थे। चार वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के हवाले से New York Times ने दावा किया है कि अब अहमदीनेजाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की खुफिया इकाई की निगरानी में हैं और उन्हें घर में नजरबंद रखा गया है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ईरानी अधिकारियों को इजरायल के साथ उनके कथित संपर्कों की जानकारी मिल गई थी। अहमदीनेजाद से जुड़ी यह योजना इजरायल की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा थी। इसमें उत्तरी इराक में मौजूद ईरानी कुर्द विपक्षी समूहों को हथियार देने, पश्चिमी ईरान के कुछ इलाकों पर कब्जा करने और अंत में तेहरान की ओर बढ़ने जैसी योजनाएं भी शामिल थीं। हालांकि, यह पूरी रणनीति भी अंततः सफल नहीं हो सकी।
हांलाकि अहमदीनेजाद ने मंगलवार को न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने उन्हें भर्ती करने की कोशिश की थी और वे नजरबंद हैं। अनादोलू की रिपोर्ट के अनुसार, अहमदीनेजाद के कार्यालय ने एक बयान में अखबार पर जनता की राय को गुमराह करने और ईरान में आंतरिक फूट डालने के लिए मनगढ़ंत खबरें प्रकाशित करने का आरोप लगाया।
Md. Tousif
मोहम्मद तौसिफ़ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर नजर रखते हैं और ‘द क्रेडिबल हिस्ट्री’ में रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं।