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क्या नरोत्तम मिश्रा को हाशिए पर धकेलने की हो रही साजिश? क्यों हो रही आरएसएस की चर्चा

TCN Desk TCN Desk | 14 Jul, 2026 · 3 min read
क्या नरोत्तम मिश्रा को हाशिए पर धकेलने की हो रही साजिश? क्यों हो रही आरएसएस की चर्चा

कभी मध्य प्रदेश बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में रहे नरोत्तम मिश्रा की वापसी पार्टी ने क्यों रोक दी?

दतिया में बीजेपी द्वारा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उपचुनाव का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद शुक्रवार शाम से विरोध शुरू हो गया, जो शनिवार तक हिंसक हो गया। नरोत्तम समर्थकों ने सड़क जाम किया और पथराव हुआ। प्रशासन के अनुसार, कई वरिष्ठ अधिकारियों समेत आठ पुलिसकर्मी घायल हुए। कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना है। हालात काबू में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। दतिया सीट से तीन बार विधायक रहे मिश्रा 2023 विधानसभा चुनाव हार गए थे।

टिकट कटने पर मिश्रा ने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी तरह की हिंसा या सड़क जाम न करें और अपनी बात पार्टी मंच पर रखें। हालांकि सवाल सिर्फ विरोध का नहीं, बल्कि यह भी है कि कभी मध्य प्रदेश बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में रहे नरोत्तम मिश्रा की वापसी पार्टी ने क्यों रोक दी।

बीजेपी नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,

दतिया उपचुनाव मिश्रा के लिए 2023 की हार के बाद सक्रिय राजनीति में वापसी का बड़ा अवसर था। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाई, विभिन्न समुदायों से संपर्क किया और अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश की थी।

बीबीसी के रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि

फैसला केवल दतिया सीट तक सीमित नहीं था। उनके मुताबिक, यदि नरोत्तम मिश्रा जीतकर विधानसभा लौटते तो राज्य में एक नया शक्ति केंद्र उभरता, जबकि मुख्यमंत्री मोहन यादव अभी अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व समानांतर पावर सेंटर नहीं चाहता था।

वरिष्ठ पत्रकार नितेंद्र शर्मा का भी मानना है कि सरकार पहले से कई मुद्दों पर दबाव में है। ऐसे समय में संगठन के भीतर नई शक्ति केंद्र बनने से आंतरिक खींचतान बढ़ सकती थी।स्थानीय स्तर पर लगभग तय माना जा रहा था कि टिकट मिश्रा को मिलेगा, लेकिन बीजेपी ने अंतिम समय में आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर यह संकेत दिया कि अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व ही करता है।

वरिष्ठ पत्रकार देशदीप सक्सेना के अनुसार,

नरोत्तम मिश्रा के मुख्यमंत्री मोहन यादव और मौजूदा पार्टी नेतृत्व से रिश्ते पहले जैसे मजबूत नहीं थे। उनका कहना है कि बीजेपी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का प्रभाव पहले से बढ़ा है और पार्टी अब ऐसे नेतृत्व को आगे बढ़ा रही है जो मौजूदा संगठनात्मक रणनीति के अनुरूप हो।

सक्सेना ने गोपाल भार्गव, प्रह्लाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय और शिवराज सिंह चौहान जैसे वरिष्ठ नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि पुराने प्रभावशाली नेताओं के सामने अब नई चुनौतियां हैं। उन्होंने राज्यसभा चुनाव और दतिया टिकट वितरण को भी इसी बदलाव का हिस्सा बताया। राजनीतिक विश्लेषक राजेश बादल ने भी माना कि आरएसएस की बढ़ती भूमिका और संगठन में उसकी मजबूत पकड़ नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने की एक बड़ी वजह रही।

राजनीतिक विश्लेषक राजेश बादल के मुताबिक,

बीजेपी संगठन के भीतर भी शक्ति संतुलन बना रही है और अपनी राजनीतिक कार्यशैली बदलते हुए साफ-सुथरी छवि का संदेश देना चाहती है।

दतिया उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी। ऐसा लगता है कि बीजेपी की हार हो या जीत, नरोत्तम मिश्रा की हार तय है।