परिसीमन पर मोदी को खड़गे की चेतावनी, बोले- बिना चर्चा संसद में न लाएं संविधान संशोधन विधेयक
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस की ओर से सरकार से बातचीत के लिए चार बार मांग की गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परिसीमन (Delimitation) की किसी भी प्रस्तावित प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किए बिना कोई बड़ा फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। खड़गे ने चेतावनी दी कि सरकार को संविधान संशोधन से जुड़े किसी व्यापक प्रभाव वाले विधेयक को बिना पर्याप्त चर्चा के संसद में पारित कराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर यह मांग की। उन्होंने संसद के मानसून सत्र के औपचारिक रूप से समाप्त होने की अधिसूचना जारी करने में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए। खड़गे ने इस स्थिति को 'अभूतपूर्व' बताया और कहा कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन इसके 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं किया गया था।
खड़गे के मुताबिक,
परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार को आगे बढ़ने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तार से चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सभी दलों को आपस में विचार-विमर्श करने और दूसरे संबंधित पक्षों की राय जानने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना जरूरी है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री को पहले भी लिखे गए पत्रों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल को उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि परिसीमन से संबंधित किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने उनकी इस मांग पर ध्यान नहीं दिया। इसके बजाय सरकार ने 14 अप्रैल की देर शाम संबंधित विधेयकों को सार्वजनिक किया और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुला लिया।
खड़गे ने कहा कि,
17 अप्रैल को लोकसभा में परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका और वह निर्णायक अंतर से पारित नहीं हो पाया।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि इसके बाद भी कांग्रेस की ओर से सरकार से बातचीत और चर्चा की मांग लगातार की जाती रही। खड़गे के अनुसार, उन्होंने 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था। अब उन्होंने चौथी बार यह मांग दोहराई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से कहा कि सरकार अपने नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने और उन्हें संसद में विचार के लिए पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तृत चर्चा करे।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को आगाह किया कि सरकार को संविधान संशोधन से जुड़े किसी महत्वपूर्ण विधेयक को बिना पर्याप्त चर्चा के संसद से पारित कराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि सभी राजनीतिक दलों को अपने स्तर पर विचार-विमर्श करने, एक-दूसरे के साथ चर्चा करने और अन्य संबंधित पक्षों की राय जानने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
खड़गे ने कहा कि,
परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जल्दबाजी में निर्णय लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह पहले सभी पक्षों की चिंताओं और सुझावों को सुने, ताकि संसद में किसी प्रस्ताव पर सार्थक चर्चा हो सके।
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से कहा कि वह पहले की तरह किसी व्यापक प्रभाव वाले संविधान संशोधन विधेयक को संसद में जबरन पारित कराने का प्रयास दोबारा न करें। उनके अनुसार, पहले भी सरकार की ओर से ऐसा प्रयास किया गया था, लेकिन संबंधित विधेयक लोकसभा में आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका।

कांग्रेस अध्यक्ष के इस पत्र को पार्टी के महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। जयराम रमेश ने लिखा कि,
मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद के मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान करने में हो रही अभूतपूर्व देरी और मोदी सरकार की ओर से परिसीमन को लेकर की जा सकने वाली संभावित कार्रवाइयों पर चिंता जताई है।
कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन जैसे संवेदनशील संवैधानिक विषय पर कोई भी फैसला लेने से पहले व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश की जानी चाहिए। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे मुद्दों पर संसद में चर्चा से पहले राजनीतिक दलों को अपने विचार रखने और प्रस्तावों का अध्ययन करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करना है। इसका उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार व्यवस्थित करना होता है। परिसीमन की प्रक्रिया का असर विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व और चुनावी राजनीति पर पड़ सकता है। इसी वजह से इस विषय पर राजनीतिक दलों के बीच चर्चा और सहमति को महत्वपूर्ण माना जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इसी आधार पर प्रधानमंत्री से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
फिलहाल खड़गे के पत्र के जरिए कांग्रेस ने सरकार से स्पष्ट रूप से कहा है कि परिसीमन से जुड़े नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले सभी दलों को विश्वास में लिया जाए। पार्टी की मांग है कि संसद में किसी बड़े संवैधानिक बदलाव की प्रक्रिया पर्याप्त विचार-विमर्श और चर्चा के बाद ही आगे बढ़ाई जाए।
