मानसून सत्र में कांग्रेस राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पेपर लीक और एथनॉल के मुद्दे पर सरकार को घेरेगी
कांग्रेस संसद के आगामी मानसून सत्र में पेपर लीक, राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी एथनॉल ब्लेंडिंग नीति समेत कई मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरेगी।
कांग्रेस ने गुरुवार को फैसला लिया है कि वह संसद के आगामी मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं, पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी, एथनॉल ब्लेंडिंग नीति समेत कई मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरते हुए जवाब मांगेगी। पार्टी ने स्पष्ट किया कि विदेश नीति, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी उसके प्रमुख एजेंडे में रहेंगे।
मानसून सत्र के लिए संसदीय रणनीति को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास '10 जनपथ' पर गुरुवार दोपहर बैठक आयोजित की गई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि,
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी, प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था का "सुनियोजित पतन", संस्थानों पर कब्जा, राजनीतिक दलों को तोड़ने के प्रयास, विभिन्न घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोप, बढ़ती महंगाई, विदेश नीति की कथित विफलताएं, 3.5 करोड़ वाहन मालिकों पर एथनॉल ब्लेंडिंग थोपने का मुद्दा, बेलगाम वनों की कटाई तथा SC, ST, OBC और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर कथित हमले ऐसे प्रमुख विषय हैं, जिन पर कांग्रेस मानसून सत्र में मोदी सरकार से जवाब मांगेगी।
बैठक के बाद महासचिव जयराम रमेश और सांसद नासिर हुसैन ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि
सरकार जिन प्रमुख विधेयकों को लाने की तैयारी कर रही है, कांग्रेस उनका विरोध करेगी। पार्टी ने परिसीमन, संविधान संशोधन, 'वन नेशन, वन इलेक्शन' (ONOE), विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में संभावित बदलावों का विरोध करने का ऐलान किया है।
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने अभी तक औपचारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि मानसून सत्र में कौन-कौन से विधेयक पेश किए जाएंगे। इसी कारण बैठक में संभावित विधेयकों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस सरकार से प्रस्तावित विधेयकों की जानकारी मांगेगी। इसके साथ ही पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाएगी।
कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक की मौजूदा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। जयराम रमेश ने कहा कि यह बैठक अब केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उनके अनुसार, बैठक में विभिन्न दलों के नेता अपनी राय रखते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय कुछ ही लोग लेते हैं और विपक्ष के सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।
परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस संबंध में कोई विधेयक लाती है तो उसका पूरी ताकत से विरोध किया जाएगा। पार्टी इस मुद्दे पर पूरे विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास करेगी। साथ ही संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव का भी विरोध किया जाएगा। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक दलों में टूट-फूट कराकर और अन्य तरीकों से लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है, जो संविधान की भावना के विपरीत है।
बैठक में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' से जुड़े प्रस्ताव और इस पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस ने दोहराया कि वह इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि सांसदों, विधायकों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री के चुनाव एक साथ कराने से जुड़े किसी भी विधेयक का वह संसद के भीतर और बाहर विरोध करेगी।