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भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक, हैकर्स का दावा- कंट्रोल रूम का लेआउट डार्क वेब पर

TCN News Desk TCN News Desk | 1h ago
भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक, हैकर्स का दावा- कंट्रोल रूम का लेआउट डार्क वेब पर

भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम से जुड़े हजारों दस्तावेज कथित तौर पर लीक हो गए हैं।

भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम से जुड़े हजारों दस्तावेज कथित तौर पर लीक हो गए हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स ग्रुप 'वर्ल्ड लीक्स' ने दावा किया है कि उसने इन दस्तावेजों को डार्क वेब पर अपलोड कर दिया है।

रॉयटर्स के अनुसार, लीक दस्तावेजों में पावर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की सूची, कंट्रोल रूम से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल हैं। सर्वर मई में हैक हुआ था और जून में डेटा लीक होने का दावा किया गया, लेकिन इसकी जानकारी अब सामने आई है।


तमिलनाडु के कुडनकुलम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने पुष्टि की है कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा (Yotta) का सर्वर साइबर हमले का शिकार हुआ था। कंपनी ने बताया कि इस घटना की सूचना सरकार को दे दी गई है।

रैनसमवेयर ग्रुप 'वर्ल्ड लीक्स' का दावा है कि उसने कुडनकुलम परियोजना से जुड़े 19,000 से अधिक दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। ये दस्तावेज रिलायंस ग्रुप से चुराए गए 8.58 लाख फाइलों के बड़े डेटा सेट का हिस्सा हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश दस्तावेज कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की यूनिट-3 और यूनिट-4 से जुड़े हैं, जिनका निर्माण कार्य जारी है और जिन्हें 2027 तक चालू किए जाने की उम्मीद है। लीक फाइलों में वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम के इंजीनियरिंग ब्लूप्रिंट, कॉमन कंट्रोल रूम का फ्लोर लेआउट, उपकरणों की निरीक्षण रिपोर्ट, सप्लायर सूची, वेंडर प्रस्ताव, बैठकों के रिकॉर्ड और बीमा से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव के वरिष्ठ निदेशक निकोलस रोथ ने कहा कि

यदि यह डेटा उल्लंघन सही साबित होता है, तो इससे संयंत्र की सुरक्षा पर "गंभीर" खतरा पैदा हो सकता है।

स्वतंत्र साइबर सुरक्षा शोधकर्ता राकेश कृष्णन के अनुसार,

केकेएनपी (KKNP) सर्च टर्म से जुड़ी करीब 19 हजार फाइलें, जिनका कुल आकार 14.3 गीगाबाइट है, 11 जून से ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

हालांकि, रॉयटर्स ने 2016 से लेकर 2025 के मध्य तक की तारीख वाली इन फाइलों की समीक्षा की, लेकिन उनकी प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका। वर्ल्ड लीक्स की वेबसाइट पर रिलायंस से जुड़ी कुल 8.58 लाख फाइलों में इन 19 हजार दस्तावेजों को सबसे संवेदनशील बताया गया है।

डेटा लीक कैसे हुआ? 6 प्वाइंट में समझें

  1. रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-3 और यूनिट-4 परियोजना का ठेकेदार है।
  2. परियोजना से जुड़ा कुछ डेटा थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा के सर्वर पर मौजूद था।
  3. योट्टा ने 29 मई 2026 को अपने सर्वर पर संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया और दावा किया कि साइबर हमले को रोक दिया गया।
  4. जून के अंत में रिलायंस ने योट्टा को जानकारी दी कि 'वर्ल्ड लीक्स' नामक हैकर समूह डेटा चोरी का दावा कर रहा है।
  5. इसके बाद डार्क वेब पर 8.58 लाख फाइलों में से करीब 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया गया।
  6. इन कथित दस्तावेजों में ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की जानकारी, निरीक्षण रिपोर्ट और बैठकों से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।

न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) रिलायंस के साथ मिलकर पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है। वहीं, भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) भी डेटा लीक की जांच में जुटी हुई है। परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डार्क वेब पर मौजूद ये दस्तावेज असली हैं, तो इनके जरिए कोई हमलावर संयंत्र के सपोर्ट सिस्टम, सप्लाई चेन और सुरक्षा ढांचे को बेहतर ढंग से समझ सकता है। इससे भविष्य में साइबर हमलों या अन्य सुरक्षा जोखिमों की आशंका बढ़ सकती है।

गौरतलब है कि कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट इससे पहले भी साइबर हमले का शिकार हो चुका है। वर्ष 2019 में संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। हालांकि, उस समय NPCIL ने स्पष्ट किया था कि प्लांट की परिचालन (ऑपरेशनल) प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित रही और उस पर हमले का कोई असर नहीं पड़ा।