नेपाल के पीएम बालेन शाह के खिलाफ उनकी ही पार्टी के सांसदों में क्यों बढ़ रही है नाराजगी
बालेन शाह को नेपाल का प्रधानमंत्री बने अभी चार महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार और कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बालेन शाह को नेपाल का प्रधानमंत्री बने अभी चार महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार और कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ये सवाल सिर्फ विपक्षी दल ही नहीं उठा रहे, बल्कि उनकी अपनी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा बालेन शाह के काम करने के तरीके को लेकर हो रही है।
हाल ही में प्रतिनिधि सभा की एक बैठक के दौरान आरएसपी सांसद जगदीश खरेल ने कहा कि,
सरकार केवल प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के भरोसे नहीं चल सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि सांसदों की गरिमा और उनकी भूमिका का भी सम्मान होना चाहिए। संसद में खरेल ने कहा, "क्या सांसद के तौर पर हमारी भूमिका सिर्फ यहां बैठकर मेज थपथपाने तक सीमित है? इससे न हम संतुष्ट होंगे और न ही जनता।
नेपाली समाचार पत्र कान्तिपुर के अनुसार, कुछ समय से आरएसपी के सांसद संसदीय बहसों, सोशल मीडिया पोस्ट और संसदीय समितियों की बैठकों के जरिए सरकार के कई फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि कई मंत्री जवाबदेही और सुशासन के बुनियादी सिद्धांतों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। आरएसपी सांसद करिश्मा कथारिया ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं करा पाने के लिए सरकार से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। उन्होंने संसद में कहा, "जब किसान कहते हैं कि तेज बुखार में उन्हें पैरासिटामोल से पहले खाद की जरूरत है, तो सरकार का दिल क्यों नहीं पसीजता?" कथारिया ने यह भी आरोप लगाया कि पर्याप्त खाद उपलब्ध होने के सरकारी दावे हकीकत से मेल नहीं खाते और इससे जनता को गुमराह किया जा रहा है।
आरएसपी सांसदों ने कृषि मंत्री गीता चौधरी की भी सीधे आलोचना करते हुए कहा कि उनका मंत्रालय किसानों की समस्याओं का समाधान करने में नाकाम रहा है। इसके अलावा सांसदों ने राज्य संस्थाओं के कथित संरक्षण में चल रही गैरकानूनी गतिविधियों पर भी चिंता जताई।
नेपाल के सरलाही से आरएसपी सांसद अमरेश कुमार सिंह ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा,
पार्टी के सांसद प्रधानमंत्री और सरकार दोनों से सवाल पूछ रहे हैं। लोकतंत्र में कोई भी सवालों से ऊपर नहीं होता। मैंने भी प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर कहा था कि देश को किसी मेट्रोपॉलिटन सिटी की तरह नहीं चलाया जा सकता। फिर भी मेरा मानना है कि फिलहाल सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन उसे अपनी कार्यशैली पर जरूर विचार करना होगा।
नेपाली भाषा के प्रमुख अखबार कान्तिपुर ने आरएसपी के ऐसे छह सांसदों के बयान प्रकाशित किए हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से बालेन शाह सरकार के कामकाज पर असंतोष जताया है।

हालांकि, प्रधानमंत्री बनने से पहले भी बालेन शाह की भाषा और शैली को लेकर विवाद हो चुका है। इसी साल मार्च में चुनाव प्रचार के दौरान धनगढ़ी की एक रैली में उन्होंने कहा था, "जो सड़कें दो साल में बन जानी चाहिए, वे 20 साल तक अधूरी पड़ी रहती हैं। अब ठेकेदारों को समय पर सड़कें पूरी करनी होंगी, चाहे उन्हें पेड़ से बांधना पड़े, सड़क पर सुलाना पड़े या किसी शेड में बंद करना पड़े।" उस समय पारंपरिक राजनीतिक दलों से निराश मतदाताओं ने उनके आक्रामक अंदाज की काफी सराहना की थी। 5 मार्च को हुए आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को भारी जनादेश मिला। पार्टी के गठन के महज चार साल के भीतर ही उसे लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल हो गया। इसके बाद 27 मार्च को बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। चुनावी नतीजों ने उनके प्रति जनता के असाधारण भरोसे को दिखाया था और इसी वजह से उनकी सरकार से उम्मीदें भी काफी बढ़ गई थीं।
इस बीच नेपाल के प्रमुख अंग्रेजी अखबार माय रिपब्लिका ने 13 जुलाई को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया कि आरएसपी प्रमुख रबि लामिछाने भी बालेन शाह की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, "राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबि लामिछाने ने प्रधानमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेन शाह के कामकाज पर असंतोष जताया है। पार्टी के पहले महाधिवेशन के बाद आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। रविवार को दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में लामिछाने ने प्रधानमंत्री शाह को सरकार की कार्यशैली बदलने की सलाह दी।"
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री बालेन शाह पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति और सरकार में पार्टी कोटे के मंत्रियों में संभावित फेरबदल पर चर्चा के लिए लामिछाने के आवास पहुंचे थे। बैठक के दौरान लामिछाने ने काठमांडू और अन्य इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की प्रक्रिया, साथ ही आत्मदाह की कोशिश के बाद इलाज के दौरान जान गंवाने वाले गणेश नेपाली की मौत जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई।
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए आरएसपी सांसद अमरेश सिंह ने कहा कि पार्टी और सरकार को एक ही दिशा में काम करना चाहिए, लेकिन फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा है। नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार युग पाठक भी मानते हैं कि बालेन शाह की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने बीबीसी हिन्दी से कहा, "प्रधानमंत्री संसद में नियमित रूप से नहीं जाते। जब जाते भी हैं तो कुछ मिनट रुकते हैं और किसी सवाल का जवाब नहीं देते। राष्ट्रपति से भी मुलाकात नहीं करते और कई बार उनके अभिभाषण के दौरान बीच में ही उठकर चले जाते हैं।"
युग पाठक का कहना है, "अब तक बालेन शाह के खिलाफ उनकी पार्टी के छह सांसद खुलकर बोल चुके हैं। मेरा मानना है कि आने वाले समय में और सांसद भी अपनी बात रख सकते हैं। बालेन के समर्थन में खड़े रहे कई बुद्धिजीवी भी अब अपना नजरिया बदल रहे हैं। समय भले ही कम बीता हो, लेकिन इस छोटे से दौर में लोगों के मन में भरोसे से ज्यादा सवाल और आशंकाएं दिखाई दे रही हैं।"