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लाडकी बहिन योजना पर कैग का खुलासा, 3,541 करोड़ के अतिरिक्त खर्च पर घिरी महाराष्ट्र सरकार

TCN Desk TCN Desk | 13 Jul, 2026 · 3 min read
लाडकी बहिन योजना पर कैग का खुलासा, 3,541 करोड़ के अतिरिक्त खर्च पर घिरी महाराष्ट्र सरकार

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने महाराष्ट्र की लोकप्रिय 'लाडकी बहिन' योजना में 3,541.16 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया है. रिपोर्ट में जमा खातों में हजारों करोड़ रुपये पड़े रहने और प्रबंधन में बड़ी कमियों का जिक्र किया है. ऑडिट में बिना किसी विशिष्ट औचित्य के 3,541 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय पाया गया. जमा खातों में 15,586 करोड़ रुपये के लंबित होने पर आपत्ति जताई गई.

कैग की रिपोर्ट के अनुसार, योजना को लोगों तक पहुंचाने में 3,541.16 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च हुआ है, साथ ही जमा खातों में हजारों करोड़ रुपये पड़े रहने और वित्तीय प्रबंधन में बड़ी कमियों का भी पता चला है. राज्य विधानसभा में शुक्रवार को पेश की गई कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने योजना में हुए अतिरिक्त खर्च पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया है. अंग्रेजी समाचार पत्र 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग ने योजना के लिए स्वीकृत 29,693.09 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 33,237.24 करोड़ रुपये खर्च किए. जिस वजह से 3,541.16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ. इसमें बताया गया कि योजना के लिए कुल 29,693.09 करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया था, जिसमें अनुपूरक प्रावधानों के जरिये 26,200 करोड़ रुपये और लाडकी बहिन योजना से पुनर्वियोजित 3,490.75 करोड़ रुपये शामिल थे.

महिलाओं को हर महीने दिए जाते हैं 1,500 रुपये

जून 2024 में शुरू की गई इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की उन महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये दिए जाते हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है. माना जाता है कि नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन की 288 में से 230 सीटों पर जीत में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही. ‘लाडकी बहन योजना’ शुरू होने के बाद से ही इसके कारण राज्य के खजाने पर पड़ रहे बोझ को लेकर सवाल उठते रहे हैं. योजना के तहत लाभार्थियों के नियमित सत्यापन में बड़ी संख्या में अपात्र लोगों के नाम भी सामने आए.

14 हजार पुरुषों ने गलत पहचान बताकर 10 महीने तक लिया था योजना का लाभ

अक्टूबर 2025 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता और राज्य मंत्री छगन भुजबल ने दावा किया था कि इस योजना के कारण सरकार के लगभग सभी विभाग धन की कमी से जूझ रहे हैं. इसके बाद फरवरी में राज्य के मंत्री गणेश नाइक ने भी स्वीकार किया था कि योजना का सरकारी विभागों की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ा है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इसे बंद करने का कोई इरादा नहीं रखती. फिलहाल राज्य सरकार इस योजना के तहत 2.4 करोड़ लाभार्थियों को हर महीने भुगतान करने के लिए लगभग 3,700 करोड़ रुपये खर्च करती है. जुलाई 2025 में हुई समीक्षा में यह भी सामने आया कि 14,000 से अधिक पुरुषों ने कथित तौर पर अपनी पहचान गलत बताकर 10 महीने तक इस योजना का लाभ लिया. महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, 14,298 पुरुषों ने फर्जी तरीके से योजना में पंजीकरण कराया, जिससे राज्य को 21.4 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. बाद में उनके खातों में होने वाले भुगतान रोक दिए गए. इसी तरह जून 2025 में राज्यव्यापी सत्यापन अभियान के दौरान लगभग 80 लाख महिलाओं को योजना के लिए अपात्र पाया गया. इसके बाद 30 अप्रैल तक ई-केवाईसी पूरा करने की समय सीमा समाप्त होने पर लाभार्थियों की संख्या लगभग 2.4 करोड़ से घटकर 1.7 करोड़ रह गई. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार वित्तीय दबाव के कारण जानबूझकर लाभार्थियों की संख्या कम कर रही है.