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BJP allies question CEC Gyanesh Kumar's performance

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 5 min read
BJP allies question CEC Gyanesh Kumar's performance

BJP's allied parties have demanded clarity from Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar.

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर उठे सवालों पर शुक्रवार को भाजपा के सहयोगी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। तेलुगु देशम पार्टी (TDP), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) का कहना है कि आयोग को लोगों के मन में पैदा हुई शंकाएं दूर करनी चाहिए।

The Indian Express ने 23 सितंबर को खबर दी थी कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी आपत्तियों में कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए जाने और प्रक्रिया में गंभीर खामियां होने के मुद्दे शामिल थे। इस रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

केंद्रीय मंत्री और LJP (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने पत्रकारों से कहा कि,


चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। अगर उस पर सवाल उठ रहे हैं, तो अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखना मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “अगर लोगों को चुनावी प्रक्रिया पर ही संदेह होने लगे, तो यह चिंताजनक है। आयोग को राहुल गांधी के सामने नहीं, बल्कि जनता के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए और लोगों के मन की शंकाएं दूर करनी चाहिए।

TDP के लोकसभा में नेता लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि,

आंध्र प्रदेश में SIR पारदर्शी तरीके से किया गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र में अहम जिम्मेदारी निभाने वाली संवैधानिक संस्था है। ऐसे में किसी के भी सवाल उठाने पर उचित स्पष्टीकरण देना और पारदर्शिता बनाए रखना संस्था में जनता का भरोसा मजबूत करेगा।

RLM प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने The Indian Express से कहा कि,

अब तक सामने आई बातों से आयोग के कामकाज को लेकर सवाल जरूर उठता है। उन्होंने कहा कि मामला जो भी हो, चुनाव आयोग को उठाए जा रहे सवालों और चिंताओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

वहीं, JD(U) प्रवक्ता राजीव रंजन ने विपक्ष से पूछा कि यदि आरोप सही हैं, तो अब तक कोई औपचारिक शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई गई। उन्होंने कहा कि RJD अपनी संभावित हार के लिए बार-बार चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रही थी। उनके मुताबिक, SIR में अनियमितताओं के आरोप लगने पर आयोग ने भी पूछा था कि इतने आरोपों के बावजूद कोई आधिकारिक शिकायत क्यों नहीं की गई।

23 सितंबर की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने आयुक्तों के लिखित नोट्स को स्वीकार किया, लेकिन उन्हें अपनी ‘निर्णय लेने की प्रक्रिया’ का हिस्सा बताया। उपनिदेशक पी. पवन के हस्ताक्षर से जारी प्रेस नोट में आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में अलग-अलग राय और टिप्पणियां विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा होती हैं। आयोग के अनुसार, सदस्यों के लिखित नोट्स, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच की प्रक्रिया नियमित रूप से चलती है तथा आयुक्तों के सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए थे।

हालांकि, आयोग ने दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाई गई विशिष्ट चिंताओं पर जवाब नहीं दिया। उसने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि उन चिंताओं का समाधान किया गया था या नहीं और यदि किया गया था, तो कैसे।

बता दें कि इससे पहले CJP ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से अपनी दर्ज आपत्तियों पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। संगठन ने आयोग से आपत्ति संबंधी नोट, उन पर दिए गए जवाब और संबंधित रिकॉर्ड प्रकाशित करने को कहा, ताकि परस्पर विरोधी दावों की स्वतंत्र जांच हो सके.

CJP की यह मांग The Indian Express की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसके मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े ऐसे फैसलों पर लिखित आपत्ति जताई, जो उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। रिपोर्ट में Form 6 में गैरकानूनी प्रावधान जोड़ने का भी उल्लेख किया गया था।

हालांकि चुनाव आयोग ने इन टिप्पणियों के अस्तित्व को स्वीकार किया, लेकिन उन्हें अपनी ‘निर्णय लेने की प्रक्रिया’ का हिस्सा बताया। आयोग ने दोनों आयुक्तों की चिंताओं पर सीधे जवाब नहीं दिया और यह भी स्पष्ट नहीं किया कि उनका समाधान हुआ या नहीं। उप निदेशक पी. पवन के हस्ताक्षर वाले प्रेस नोट में आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में अलग-अलग विचार और टिप्पणियां विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, सदस्यों के लिखित नोट, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच नियमित प्रक्रिया का हिस्सा थे तथा आयुक्तों के सुझाव चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए दिए गए थे।

CJP प्रवक्ता सौरव दास ने तीन मुद्दों की तत्काल जांच की मांग की।

पहला,

ऑनलाइन Form 6 में अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने के बाद पहली बार मतदाता बनने वालों के पंजीकरण में रुकावट। इस घोषणा के तहत नए आवेदकों से पिछली SIR मतदाता सूचियों में अपना या अपने माता-पिता का नाम होने की जानकारी मांगी जा रही है।

दूसरा मुद्दा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की अपीलों का निपटारा है। दास ने SIR से जुड़े मामलों, अपीलों और इस संबंध में आयोग द्वारा उठाए गए कानूनी कदमों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। तीसरा मुद्दा मतदाता सूची के डेटा का केंद्रीकरण है।

दास ने कहा कि,

चुनाव आयोग नागरिकों से किसी व्यवस्था पर भरोसा करने को नहीं कह सकता, जबकि वह यह बताने से इनकार करे कि मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और डेटा तक पहुंच से जुड़े बड़े बदलावों को मंजूरी कैसे दी जा रही है। नागरिक के मतदान के अधिकार को प्रभावित करने वाले हर फैसले का स्पष्ट कानूनी आधार, उसकी जिम्मेदारी लेने वाला अधिकारी और पारदर्शी रिकॉर्ड होना चाहिए।

आशुतोष रांका ने कहा कि वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटने का असर चुनावों से आगे भी पड़ सकता है, क्योंकि प्रशासनिक सत्यापन में भी मतदाता रिकॉर्ड इस्तेमाल किए जाते हैं। उन्होंने आयोग से पूछा कि पारदर्शी और सुलभ अपील व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना नाम हटाने की मंजूरी किसने दी।

रांका ने कहा कि,

मतदान का अधिकार अनुच्छेद 326 के तहत चुनावी ढांचे में संरक्षित संवैधानिक अधिकार है। जिन नागरिकों के नाम हटाए गए हैं, आयोग को उन्हें जवाब देना होगा।

Apart from the resignation of Gyanesh Kumar, CJP has demanded an independent investigation into the decisions taken during SIR. The organization wants the investigation to identify the officials who approved the controversial changes and directives.