अमेरिकी विदेश मंत्री के भारत दौरे का क्या है अंबानी कनेक्शन, क्यों कसा राहुल गांधी ने तंज़?
ट्रंप के साथ अंबानी परिवार के संबंध भी कई वजहों से चर्चा में रहे हैं। हाल ही में डॉनल्ड ट्रम्प ने अंबानी द्वारा अमेरिका में निवेश की घोषणा की थी।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो छह महीने के भीतर दूसरी बार भारत के दौरे पर आएंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार 14 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। इस दौरे में ऊर्जा और व्यापार से जुड़े मुद्दे सबसे अहम होंगे। रुबियो मुंबई और जामनगर जाएंगे। रुबियो 19 से 22 अक्टूबर तक भारत में रहेंगे। भारत आने से पहले वह एक क्षेत्रीय सम्मेलन में शामिल होने के लिए उज्बेकिस्तान के समरकंद जाएंगे। हालांकि, इस बार वह दिल्ली नहीं आएंगे।

THE HINDU की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बताया है कि मार्को रुबियो अपनी यात्रा के दौरान भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, क्षेत्रीय और वैश्विक हालात पर चर्चा करने तथा ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर बातचीत होगी।
मार्को रुबियो की इस यात्रा के दौरान गुजरात के जामनगर जाने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। उनका यह दौरा काफी सुर्खियां बटोर रहा है। इसकी एक वजह यह भी है कि आमतौर पर किसी देश के प्रतिनिधि दूसरे देश के दौरे पर जाते हैं, तो उसकी राजधानी जाते हैं। लेकिन मार्को रुबियो इस बार दिल्ली के बजाय मुंबई आएंगे और इसके बाद उनका जामनगर जाने का कार्यक्रम है।
रुबियो का जामनगर जाना इसलिए भी खास है, क्योंकि यहाँ रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी है, जिसे एक ही स्थान पर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी माना जाता है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि अंबानी परिवार इस दौरे के दौरान एक बड़े स्वागत समारोह का आयोजन कर सकता है। पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले उद्योगपति एलन मस्क और भारतीय उद्योगपति तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी के बीच जुबानी जंग देखने को मिली थी।
7 अक्टूबर 2026 को एलन मस्क ने भारत के बड़े उद्योगपतियों पर देश में स्टारलिंक की सेवाओं को शुरू होने से रोकने का आरोप लगाया। इसके अगले दिन मस्क ने सोशल मीडिया मंच X पर एक और पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा कि स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और भारत सरकार के हर कानून तथा जरूरत का पालन करने में उसे पांच साल लगे हैं। इसके बावजूद उसे लाइसेंस क्यों नहीं मिला? क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?

9 अक्टूबर को मस्क ने एक और पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी को संबोधित करते हुए उन्हें “प्रिय प्रधानमंत्री अंबानी” लिखा।
ट्रंप के साथ अंबानी परिवार के संबंध भी कई वजहों से चर्चा में रहे हैं। 10 मार्च को रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर एक नई तेल रिफाइनरी बनाने की घोषणा की थी। इस परियोजना में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज निवेश कर रही है।
इस रिफाइनरी का निर्माण टेक्सास के ब्राउन्सविल बंदरगाह पर किया जाएगा। इसकी क्षमता प्रतिदिन 1,68,000 बैरल तेल का प्रसंस्करण करने की होगी। परियोजना की घोषणा करने वाली कंपनी अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग ने एक बयान में कहा कि इस रिफाइनरी से भारत के साथ अमेरिका के व्यापार घाटे में 300 अरब डॉलर की कमी लाने में मदद मिलेगी।
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री का जामनगर दौरा और अंबानी परिवार की ओर से उनके संभावित स्वागत की खबरें काफी दिलचस्प हैं।
खबर यह भी है कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसको लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तंज कसा। उन्होंने X पर लिखा-
“मिस्टर रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। मोदी जी, आपके विदेश मंत्रालय के अधिकारी ही समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या हो रहा है। आपको उन्हें समझाना चाहिए। हां, अगर आप चाहें तो यह काम मुझसे भी करवा सकते हैं।”
कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने शुक्रवार को दावा किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो दिल्ली नहीं आएंगे, बल्कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को मुंबई बुलाया है। X पर एक पोस्ट में खेड़ा ने कहा कि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के ट्वीट का जवाब देते हुए खेड़ा ने लिखा- “अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पुष्टि की है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो दिल्ली नहीं आ रहे हैं और उन्होंने इसके बजाय भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को मुंबई बुलाया है। किसी विदेशी सरकार द्वारा भारत की ज़मीन पर ही भारत के विदेश मंत्री को बुलाना, मोदी सरकार के मानकों के हिसाब से भी कूटनीतिक गिरावट का एक नया स्तर है।”
खेड़ा ने आगे दावा किया कि इस घटनाक्रम से विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारी भी असमंजस में पड़ गए हैं। खेड़ा ने कहा-
“मंत्रालय में हमारे एक सूत्र के मुताबिक, इस घटनाक्रम ने विदेश मंत्रालय के अपने अधिकारियों को भी पूरी तरह असमंजस और अव्यवस्था की स्थिति में डाल दिया है।”
Md. Tousif
मोहम्मद तौसिफ़ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर नजर रखते हैं और ‘द क्रेडिबल हिस्ट्री’ में रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं।
