क्यों नेपाल के पीएम बालेन शाह के खिलाफ हो गए हैं उनके ही पार्टी के सांसद?
बालेन शाह को नेपाल का प्रधानमंत्री बने अभी चार महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार और कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री बने बालेन शाह को अभी चार महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। खास बात यह है कि आलोचना सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी अपनी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के भीतर भी असंतोष की आवाजें सुनाई देने लगी हैं।
हाल ही में प्रतिनिधि सभा में आरएसपी सांसद जगदीश खरेल ने कहा कि सरकार सिर्फ प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के भरोसे नहीं चल सकती। उन्होंने सांसदों की भूमिका और सम्मान का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि क्या उनकी जिम्मेदारी सिर्फ संसद में मेज थपथपाने तक सीमित रह गई है।
नेपाली अखबार कान्तिपुर के मुताबिक, आरएसपी के कई सांसद लगातार सरकार के फैसलों और मंत्रियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। सांसद करिश्मा कथारिया ने किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने पर सरकार से सार्वजनिक माफी मांगने की बात कही, जबकि कृषि मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए।
आरएसपी सांसद अमरेश कुमार सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री भी सवालों से ऊपर नहीं होते। उनके मुताबिक सरकार को फिलहाल कोई खतरा नहीं है, लेकिन उसे अपनी कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
इस बीच अंग्रेजी अखबार माय रिपब्लिका की 13 जुलाई की रिपोर्ट में दावा किया गया कि आरएसपी प्रमुख रबि लामिछाने भी बालेन शाह के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं की हालिया मुलाकात में सरकार की कार्यशैली, अतिक्रमण विरोधी अभियान, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी और अन्य विवादित मुद्दों पर चर्चा हुई।
नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार युग पाठक का भी मानना है कि बालेन शाह की कार्यशैली को लेकर सवाल लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री संसद में नियमित रूप से जवाब नहीं देते और पार्टी के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। उनका कहना है कि जनता ने बालेन शाह से बड़ी उम्मीदें लगाई थीं, लेकिन शुरुआती महीनों में उन उम्मीदों की जगह अब सवाल और आशंकाएं बढ़ती नजर आ रही हैं।
नेपाली भाषा के प्रमुख अखबार कान्तिपुर ने आरएसपी के ऐसे छह सांसदों के बयान प्रकाशित किए हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से बालेन शाह सरकार के कामकाज पर असंतोष जताया है।
