छात्रों से संवाद में बोले राहुल- देश में पेपर लीक का उद्योग चल रहा है
छात्रों से संवाद करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर सीधा हमला किया।
देहरादून में आयोजित कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों ने राहुल गांधी से सीधा संवाद किया। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2.5 लाख से ज्यादा की संख्या में छात्र-छात्राओं ने इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंजीकरण कराया था। छात्रों से संवाद करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर सीधा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक अब छिटपुट घटनाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है, जिसने लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है।
छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से संवाद करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि
आज देश में पेपर लीक का उद्योग चल रहा है, मानो किसी रेस्तरां के मेन्यू कार्ड की तरह हर परीक्षा की एक तय कीमत हो। उन्होंने दावा किया कि पैसे देकर किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र हासिल किया जा सकता है, जबकि ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्र लगातार नुकसान उठा रहे हैं।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाली देहरादून की छात्रा रिया थापा के पिता मंच पर अपनी बेटी को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि परीक्षा देने के बाद रिया बेहद उत्साहित थी और उसे पूरा भरोसा था कि उसका चयन हो जाएगा। लेकिन जैसे ही पेपर लीक की खबर सामने आई, वह पूरी तरह टूट गई। उन्हें लगा कि वर्षों की मेहनत और सपने एक झटके में बिखर गए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन वे चाहते हैं कि किसी और परिवार को ऐसा दर्द न सहना पड़े।
रिया के पिता को सांत्वना देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी नहीं, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं के सपनों पर सीधा हमला है। अब समय आ गया है कि भारत में छात्र-केंद्रित और पूरी तरह सुरक्षित परीक्षा प्रणाली विकसित की जाए, जिसमें तकनीक का प्रभावी उपयोग हो, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और पूरी परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी व भरोसेमंद बने।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रश्नपत्रों का रैंडमाइजेशन किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर अलग-अलग दिनों में सुरक्षित तरीके से परीक्षाएं आयोजित की जाएं। विश्वविद्यालयों और परीक्षा एजेंसियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त रखा जाना चाहिए। कुलपतियों और परीक्षा संस्थानों के प्रमुखों की नियुक्ति निष्पक्ष प्रक्रिया से होनी चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल का शिक्षा संस्थानों पर प्रभाव नहीं होना चाहिए।
राहुल गांधी ने प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में निजी कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं कराना सरकार की जिम्मेदारी है और इसे निजी संस्थाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाए तथा प्रभावित छात्रों को न्याय और उचित मुआवजा दिया जाए।
कार्यक्रम में ऑनलाइन गणित शिक्षक अभिनय शर्मा ने भी शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वे किसी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करने नहीं, बल्कि छात्रों की आवाज उठाने के लिए मंच पर आए हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि बार-बार होने वाले पेपर लीक के लिए शिक्षा मंत्री जवाबदेह नहीं हैं, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी। अभिनय शर्मा ने नई शिक्षा नीति के अधूरे क्रियान्वयन, प्रश्नपत्रों में बार-बार सामने आने वाली त्रुटियों और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए छात्रों से शुल्क वसूलने की व्यवस्था की भी आलोचना की। उनका कहना था कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जवाबदेह संस्थागत ढांचा विकसित नहीं होगा, तब तक छात्रों का भरोसा दोबारा कायम नहीं हो सकेगा।