Delhi SIR sees one in three voters missing from draft list
Delhi has witnessed the highest removal of 33 percent voters' names.
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान दिल्ली में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का प्रतिशत देश में सबसे अधिक दर्ज किया गया है। सोमवार को जारी मसौदा मतदाता सूची से करीब हर तीन में से एक मतदाता का नाम गायब है।
The Pioneer की एक खबर के अनुसार, दावे पेश करने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही सामने आया कि दिल्ली के,
कुल 1,45,10,299 मतदाताओं में से 47,56,722 लोगों के नाम मसौदा सूची में शामिल नहीं हैं। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR किया गया है, उनमें दिल्ली में सबसे अधिक 33 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
चुनाव आयोग (ECI) के एक अधिकारी ने कहा,
राष्ट्रीय राजधानी होने के कारण दिल्ली में अस्थायी और लगातार स्थान बदलने वाली आबादी बड़ी संख्या में रहती है। नाम हटाए जाने की अधिक संख्या के पीछे यह एक कारण हो सकता है।” संभावित रूप से सबसे अधिक नाम दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में हटाए गए हैं, जहां 43.68 प्रतिशत मतदाता गैर-डिजिटाइज्ड श्रेणी में हैं। इसके बाद नई दिल्ली में 39.24 प्रतिशत, दक्षिणी दिल्ली में 38.68 प्रतिशत और मध्य दिल्ली में 38.04 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। वहीं, 13 जिलों में बाहरी उत्तरी दिल्ली में सबसे कम 24.32 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
मसौदा सूची में जिन मतदाताओं के नाम नहीं हैं, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावे और आपत्तियां दाखिल कर सकेंगे। इस दौरान अधिकारी मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के दावों की बारीकी से जांच करेंगे। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मौके पर जाकर सत्यापन भी करेंगे। दावों और आपत्तियों की जांच, नोटिस जारी करने तथा उनके निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। विवरण सही पाए जाने पर मतदाताओं के नाम अंतिम SIR मतदाता सूची में शामिल कर दिए जाएंगे। अंतिम सूची 4 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।
SIR के तहत बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से उन राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, जहां यह प्रक्रिया चलाई गई थी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार,
महाराष्ट्र में पिछली मतदाता सूची के 21.14 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए। कर्नाटक में 23 प्रतिशत मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से बाहर रहे। हाल ही में विधानसभा चुनाव संपन्न होने वाले पश्चिम बंगाल में करीब 12 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए। पड़ोसी राज्य बिहार में, जहां सबसे पहले SIR कराया गया था, करीब छह प्रतिशत नाम हटे। आंध्र प्रदेश में यह आंकड़ा 10.78 प्रतिशत रहा। दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में SIR के तहत प्रकाशित मसौदा सूची से 29.64 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए।
प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1,500 से घटाकर 1,200 कर दी गई है। इसके साथ ही मतदान केंद्रों की संख्या 13,033 से बढ़कर 14,947 हो गई है। यानी कुल 1,914 नए मतदान केंद्र बढ़ाए गए हैं। दिल्ली में मतदान केंद्रों के युक्तिकरण के बाद उनके स्थानों की संख्या भी 2,696 से बढ़कर 2,856 हो गई है। इस प्रकार मतदान केंद्र स्थलों की संख्या में 160 की वृद्धि हुई है।
दिल्ली SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने प्रतिक्रिया दी है।
संदीप दीक्षित ने नाम काटे जाने पर कहा,
47 लाख बड़ा नंबर है क्योंकि दिल्ली में 1.5 करोड़ वोटर हैं. यह एक तिहाई के बराबर है। दिल्ली के कुछ हिस्सों में लोग आते-जाते रहते हैं या ट्रांसफर होते हैं। हालांकि, दिल्ली के 70 से 80% हिस्से में इस तरह की आवाजाही नहीं होती है। कम से कम दो-चार साल में तो आवाजाही नहीं होती है। "
दिल्ली में मतदाताओं के नाम काटे जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चिंता जताई है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने ‘एक्स’ पर तंज कसते हुए लिखा,
“भारत सरकार देश की आबादी को लेकर बेवजह परेशान है। SIR के जरिए चुनाव आयोग हमारे देश की आबादी 140 करोड़ से घटाकर 50 करोड़ कर देगा।”
SIR शुरू होने से पहले दिल्ली में 1.45 करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 29.86 प्रतिशत को ‘अनुपस्थित/स्थायी रूप से स्थानांतरित/अन्य’ की श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा 1.95 प्रतिशत मतदाताओं को मृत और 0.98 प्रतिशत को किसी दूसरी जगह पंजीकृत बताया गया है। ‘अन्य’ श्रेणी में ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिन्होंने समय पर गणना फॉर्म जमा नहीं किया या जिन्होंने खुद को इस प्रक्रिया में शामिल कराने की इच्छा नहीं जताई।
मतदाता सूची की गहन जांच के बावजूद कई लोगों ने शिकायत की है कि सूची में उनकी उम्र वास्तविक आयु से एक वर्ष कम दर्ज की गई है। इस संबंध में बातचीत करने वाले चुनाव अधिकारी भी इसकी स्पष्ट वजह नहीं बता सके। महाराष्ट्र की मसौदा मतदाता सूची भी सोमवार को जारी हुई, जहां 78.86 प्रतिशत गणना दर्ज की गई। SIR वाले क्षेत्रों में दिल्ली के बाद दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव का आंकड़ा सबसे कम रहा, जहां 70.35 प्रतिशत मतदाताओं की गणना हुई।
Karnataka Chief Minister D.K. Shivakumar and Telangana Chief Minister A. Revanth Reddy wrote to Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar last week, requesting an extension of the deadline for SIR extension. Karnataka has recorded a turnout of 80.52 percent and Telangana 78.3 percent.
Both Congress leaders have requested an extension of the one-month period set for filing claims and objections. They argued that since there are no elections scheduled in either state at present, additional time should be granted to complete the process. They also demanded full implementation of the established procedure, which includes public reading of the voter list in ward committee meetings and gram sabhas, and providing more than three weeks to respond to notices regarding logical discrepancies found in the counting forms. Disputes remain between both states and election officials regarding the documents accepted as proof of date and place of birth.
Despite the Telangana government's request, the 'Family Register Certificate' has not been included in the list of valid documents. Meanwhile, election officials in Karnataka have yet to clarify whether the 'Permanent Residence Certificate' issued by the state government will be accepted.