लेखक, मुस्लिम यूथ ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के संयोजक और कम्यूनिटी लीडर है, साथ ही सूफिज़्म और मुस्लिम मामलों पर लगातार लिखते रहते हैं.
शरजील इमाम ने मुस्लिम सियासी नुमाइंदगी, कांग्रेस की भूमिका, सेक्युलर सियासत और आनुपातिक प्रतिनिधित्व जैसे अहम मौज़ू उठाए हैं। इन पर बहस होनी चाहिए। क्या मुसलमानों को सियासत में पर्याप्त नुमाइंदगी मिल रही है? क्या सेक्युलर पार्टियां उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेती हैं? क्या मौजूदा चुनावी निज़ाम में सुधार की गुंजाइश है? ये जायज़ सवाल हैं। लेकिन किसी तजज़िये में कुछ सही सवाल होने का अर्थ यह नहीं कि उसके तमाम नतीजों को भी बग़ैर जांचे-परखे क़ुबूल कर लिया जाए।
2h ago
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